भयंकर बाढ़ के बाद श्रीलंका की कलीसिया ‘आशा बनाये रखने’ का काम कर रही है
श्रीलंका में काथलिक कलीसिया ने चक्रवात दितवा की वजह से आई खतरनाक बाढ़ से समुदायों को उबरने में मदद करने के लिए पूरे देश में मानवीय और प्रेरितिक मदद पहुँचायी है। पिछले साल के अंत में चक्रवात दितवा के कारण 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और लाखों लोग प्रभावित हैं।
श्रीलंका में चक्रवात दितवा से मरनेवालों की संख्या 600 से अधिक हो चुकी है और करीब 2.3 मिलियन लोग प्रभावित हुए हैं जिनमें से कम से कम 10 लाख लोगों को मदद की आवश्यकता है।
फिदेस न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट में कोलंबो में पोंटिफिकल मिशन सोसाइटीज (पीएमएस) के राष्ट्रीय निदेशक, फादर बेसिल रोहन फेरनांदो ने कहा कि श्रीलंका में काथलिक कलीसिया "उम्मीद जगाने में एक बड़ा योगदान दे रही है।"
देश का 20 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा उष्णकटिबंधीय तूफान से प्रभावित है, जिससे घरों, व्यापार, सड़कों, पुलों और पावर ग्रिड को नुकसान पहुँचा है।
सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि लगभग 7,20,000 इमारतें ध्वस्त हो गईं, साथ ही 16,000 किलोमीटर सड़कें, 278 किलोमीटर रेलवे लाईन और 480 पुल तबाह हो गए।
फादर ने कहा, “हम अचानक एक नए, गंभीर संकट में फंस गए। लघु कालीन असर के अलावा, इसमें मध्यम से लेकर दीर्घकालीन खर्च भी शामिल होगा, क्योंकि पुनःनिर्माण में समय लगेगा।”
उन्होंने कहा कि श्रीलंका भर में काथलिक समुदाय ने तुरंत जरूरतों और दीर्घकालीन सुधार, दोनों को पूरा करने में लगातार भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा, “इस परिस्थिति में, श्रीलंका का काथलिक समुदाय शामिल है और एक ही लक्ष्य के लिए समर्पित है: नई उम्मीद जगाना। हमने एक खास जिम्मेदारी ली है, यानी उम्मीद को जिंदा रखने की।”
फादर ने आगे कहा, “यह कई लोगों को भौतिक मदद और अनुदान राशि देकर किया जा रहा है, साथ ही आध्यात्मिक, मानसिक और सामाजिक मदद भी दी जा रही है, जैसा कि क्रिसमस काल में और आज भी हो रहा है।”
फादर फर्नांदो ने कहा कि सरकार ने सड़कों, पुलों, रेलवे लाइनों और स्कूलों को फिर से बनाने और सामाजिक मदद देने के काम तेज कर दिए हैं, साथ ही प्रभावित लोगों और परिवारों की मदद भी की है, जिसके कारण समुदाय अब सरकार की ठोस मदद महसूस कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सामाजिक मदद में सबसे कमजोर लोगों पर ध्यान केंद्रित की गई है, जिन परिवारों के घर या रोजी-रोटी चली गई है, उन्हें सरकारी मदद के तौर पर 50 लाख रुपये मिले हैं।
उन्होंने कहा, “सार्वजनिक मदद उन परिवारों तक पहुंची है जिनके बच्चे स्कूल जानेवाले हैं, ताकि वे नए स्कूल की सामग्री खरीद सकें और क्लास फिर से शुरू कर सकें।”
फादर फर्नांदो ने कहा कि अनुरा कुमार दिसानायक की सरकार ने राहत की कोशिशों के लिए मजबूत प्रतिबद्धता दिखायी है और कारितास संगठन से मिली मदद समेत अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मदद के लिए शुक्रिया अदा किया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित समुदाय अकेला महसूस नहीं कर रहे हैं।
सरकारी अनुमान के मुताबिक, पुनःनिर्माण का खर्च लगभग 7 बिलियन डॉलर है, जो श्रीलंका के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 7 प्रतिशत और 2025 में सरकारी आय का लगभग आधा है।
यह आपदा तब आई जब देश 2022 में कर्ज के संकट से जुड़ी आर्थिक गिरावट से उबर रहा था, जबकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की मदद से कर्ज से बाहर आने का काम चल रहा था।