पोप की प्रेरितिक यात्रा पर अफ्रीका एवं यूरोप की प्रतिक्रिया
मोनाको, अल्जीरिया, कैमरून, अंगोला, इक्वेटोरियल गिनी और स्पेन में पोप लियो 14वें की आगामी प्रेरितिक यात्रा की घोषणा पर, विभिन्न देशों के नागरिक और कलीसियाई अधिकारियों ने कृतज्ञता एवं उत्साह के रूप में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
पोप लियो 14वें आनेवाले महीनों में जिन अलग-अलग देशों का दौरा करेंगे, वहाँ से उत्साह भरी प्रतिक्रयाएँ आ रहे हैं। वाटिकन प्रेस कार्यालय ने बुधवार, 25 फरवरी को इन यात्राओं की आधिकारिक घोषणा की।
पोप लियो की पहली एक दिवसीय प्रेरितिक यात्रा 28 मार्च को मोनाको में होगी; फिर वे 13 से 23 अप्रैल तक दस दिनों के लिए अल्जीरिया, कैमरून, अंगोला और इक्वेटोरियल गिनी की यात्रा करेंगे। इसके बाद वे 6 से 12 जून तक स्पेन की एक हफ्ते की यात्रा करेंगे, जिसमें मड्रिड, बार्सिलोना, कैनरी द्वीप, टेनेरिफ और ग्रैन कैनरिया शामिल हैं।
अल्जीरिया में, धर्माध्यक्षों का कहना है कि वे “बहुत खुश” हैं, वहीं कैमरून में पोप के दौरे को राजनीतिक और सामाजिक मुश्किलों के बीच “उम्मीद की निशानी” बताया जा रहा है, और सुरक्षित एवं आसान दौरे की गारंटी के लिए तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं।
स्पेन से “खुशी” और “धन्यवाद” की लहर आ रही है, साथ ही “गर्मजोशी से” स्वागत का भरोसा भी दिया जा रहा है। मोनाको में भी यही सच है, जहाँ शाही परिवार और स्थानीय कलीसिया दोनों इस “ऐतिहासिक पल” के “सम्मान” पर जोर दे रहे हैं: जो वर्तमान पोप की पहली यात्रा होगी।
मोनाको महाधर्माध्यक्ष और राजकुमार पैलेस
यात्राओं की घोषणा के तुरंत बाद कई बयान जारी किए गए, जिनमें मोनाको महाधर्मप्रांत और राजकुमार पैलेस के बयान शामिल थे।
महाधर्मप्रांत के बान में उन्होंने 2027 में मनाए जानेवाले दो यादगार पलों को याद किया है: मोनाको की चट्टान पर पहली पल्ली की 780वीं सालगिरह, जिसे पोप इनोसेंट चौथे के बुल प्रो प्यूरिताते (6 दिसंबर, 1247) ने बनाया था, और पोप लियो 13वें के बुल क्वेमादमोदुम सोलिसितुस पास्टर की 140वीं सालगिरह, जिसने मोनाको धर्मप्रांत की स्थापना की, जो सीधे परमधर्मपीठ के अधीन है।
बयान में लिखा है, "एक नया धर्मप्रांत है, लेकिन इतिहास से भरी एक स्थानीय कलीसिया है। मोनाको की कलीसिया, मोनाको के लोगों के जीवन में एक केंद्रीय संस्था बनी हुई है और कई तरह से जीवंत है, जिसके बारे में अक्सर आम जनता को पता नहीं है।"
बयान में शाही परिवार और संत पेत्रुस के उत्तराधिकारियों के बीच सदियों पुराने रिश्ते को भी दोहराया गया है, साथ ही इस बात को भी कि मोनाको "उन बहुत कम देशों में से एक है जहाँ काथलिक धर्म राज धर्म है," जैसा कि इसके संविधान में लिखा है।
इसके अलावा, कई साझा प्रतिबद्धताएँ हैं, जैसे कि मानव जीवन का उसके "शुरु से अंत तक" सम्मान, समग्र पर्यावरण की चिंता और हमारे "आमघर" की सुरक्षा, और खेलों के लिए जुनून।
महाधर्माध्यक्ष दोमनिक-मेरी डेविड कहते हैं कि ये रिश्ते, "पहले भी एक दिशासूचक रहे हैं और हमारे फैसलों का मार्गदर्शन करते रहे हैं... आज, दुनिया को प्रभावित करनेवाली चुनौतियों का सामना करते हुए - और हमें भी उतना ही जितना दूसरों को - प्रिंस अल्बर्ट द्वितीय हर किसी की अंतरात्मा को अपील करने और हर व्यक्ति की जिम्मेदारी की भावना को जिंदा रखने में कोई कसर नहीं छोड़ते।"
पैलेस की तरफ से जारी बयान में इस बात पर जोर दिया गया कि यह “दोहरी अहमियत वाला अवसर है, संस्थागत और प्रेरितिक दोनों तरह से,” और यह “बातचीत, शांति और साझा ज़िम्मेदारी की भावना से उम्मीद का एक मजबूत संकेत होगा।”
अल्जीरिया के धर्माध्यक्ष: पोप लियो, “शांति के दूत”
अल्जीरिया के धर्माध्यक्ष ने पोप के अल्जीरिया और अन्नाबा यात्रा के बारे में उम्मीद, बातचीत और शांति जैसे खास विषयों पर जोर दिया है।
उनका कहना है कि यह यात्रा संत अगुस्टीन के पदचिन्हों पर है, जो उस धर्मसंघ के आध्यात्मिक पिता हैं जिससे पोप जुड़े हैं। उन्होंने दिसंबर में लेबनान के अपने दौरे से लौटते समय विमान में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस यात्रा का अनुमान लगाया था, जब उन्होंने कहा था कि उन्हें “अल्जीरिया जाकर संत अगुस्टीन की जगहों पर जाने की उम्मीद है, लेकिन साथ ही ख्रीस्तीय जगत और मुस्लिम जगत के बीच बातचीत और पुल बनाने का काम भी जारी रखना है।”