पोप लियोः आध्यात्मिक और भौतिक दोनों जरुरतों की देख-रेख करें

पोप लियो 14वें ने संत जोवान्ना अंतिदा थौरेट, करूणा की धर्मबहनों, से भेंट की और उन्हें अपने संदेश में लोकधर्मियों की आध्यात्मिक और भौतिक जरुरतों की देख-रेख करने का आहृवान किया।

पोप लियो 14वें ने धर्मसंघ की नवनियुक्त परमाधिकारी मदर जेनरल और उनके सलाहकारणियों का स्वागत करते हुए उन्हें अपने उत्तरदायित्व के निर्वाहन हेतु शुभकामनाएं दी।

पोप ने कहा “धर्मसंघ की सामान्य आमसभा पवित्र आत्मा का कार्य स्थल होता है जिससे ईशप्रजा की भलाई हो सके। इन दिनों पवित्र आत्मा के प्रति विनम्रता के भाव में बनने रहते हुए आपने सामुदायिक आत्मापरीक्षण किया है।” ईश्वर को सुनने के साथ-साथ एक दूसरे को सुनना एक महान कृपा है जिसके फलों को आपने यहाँ, मानो टोकरी में भरे फलों की भांति लाया है जिन्हें आप एक साथ मिलकर ईश्वर को अर्पित करने की चाह रखते हैं।

सामूहिक समर्पण
संत जोवान्ना-अंतिदा थौरेट ने अपने सम्पूर्ण जीवन में, कलीसिया के अंदर इस “सामूहिक समर्पण” की महत्वपूर्णतः को भली-भांति समझा। उन्होंने संत पेत्रुस के उत्तराधिकारी पोप के प्रति इस महान प्रेम और सम्मान के रुप में अभिव्यक्त किया-यहाँ तक कि उन परिस्थितियों में भी जहाँ उन्हें अपनी धर्मबहनों की देख-रेख और एकता में बनाये रखने हेतु अपने उत्तरदायित्वों के संबंध में, दुःखदायी नसमझी और व्यक्तिगत त्याग का सामना करना पड़ा।

ख्रीस्त में केन्द्रित, विश्व में प्रेरिताई
धर्मसंघ द्वारा प्रेरिताई हेतु चुने गये आदर्श वाक्य, “ख्रीस्त में केन्द्रित, विश्व में प्रेरिताई”  की ओर धर्मबहनों का ध्यान आकर्षित करते हुए पोप ने कहा कि यह सचमुच में अति सुंदर है। यह आप के समर्पण और प्रेरिताई के सार को व्यक्त करता है। ख्रीस्त में केन्द्रित होने का अर्थ है, “संस्थापिका संत जोवान्ना अंतिदे के उदाहरणों का अनुसरण करना, ख्रीस्त को अपने जीवन के केन्द्र में और विचारों में स्थान देना, उनकी उपस्थिति को हर क्षण और हर परिस्थिति में देखना।” पोप ने आगे कहा कि यह हमें इस बात पर विश्वास करने को अग्रसर करता है कि ख्रीस्त के संग हमारी निकटता हमें दूसरों के निकट आने में मदद करता है, जहाँ हम उनकी योजनाओं के अनुसार दूसरों के लिए कार्य करते हैं।

इसके संदर्भ में पोप ने धर्मसंघ की धर्मबहनों का ध्यान एक अन्य महत्वपूर्ण विन्दु- अपने पड़ोसी के सम्पूर्ण हित- आध्यात्मिक और भौतिक हित, की ओर कराया जो स्थापिका का आदर्श रहा। उन्होंने कहा “यह आयाम हमें करूणा के भाव को स्थापित करने, उसमें बृद्धि लाने और सच्चे रूप में हर किसी का सम्मान करने को मदद करता है विशेष कर उनका जो अत्यंत दरिद्र और जरूरंतमद हैं।”

करूणाा के आदर्श
यह धर्मसंघ तैतीस देशों में विभिन्न प्रेरितिक कार्यों- धर्मबहनों, लोकधर्मियों, युवाओं स्वयंसेवियों, और हर वर्ग और पृष्ठभूमि से आने वालों सहयोगियों के संग अपनी प्रेरिताई के कार्य को संचालित करता है जहाँ “करूणा के आदर्श” विभिन्न रुपों में प्रसारित किये जाते हैं।

पोप ने धर्मबहनों के समर्पित कार्यों हेतु कृतज्ञता के भाव प्रकट किये और प्रशंसा के भाव में कहा कि आप उदारता में अपनी प्रेरिताई जारी रखें। “यह ईश्वर और कलीसिया की निगाहों में मूल्यवान है।”

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