कैथोलिक समाज ने 2 नवंबर को सभी मृत विश्वासियों का स्मरणोत्सव भक्तिमय भाव से मनाया
कैथोलिक विश्वासियों ने सभी मृत विश्वासियों की कब्रों को हार फूल से सजाकर, एवं उन पर मोमबत्तियाँ जलाकर उन्हें भक्तिमय भाव से याद किया।
सम्पूर्ण विश्व कैथोलिक कलीसिया के साथ साथ इंदौर के कैथोलिक समाज ने दिनांक 2 नवम्बर सोमवार को सभी मृतक विश्वासियों का स्मरणोत्सव मनाया। जूनी इंदौर कब्रिस्तान और कंचन बाग़ कब्रिस्तान में दफनाए गए सभी मृत विश्वासियों की आत्म शांति के लिए विशेष रूप से प्रार्थना की गयीं। प्रातः 06:30 बजे सभी कैथोलिक गिरजाघरों में इस उद्देश्य हेतु पवित्र मिस्सा अर्पित की गयीं।
कंचन बाग़ कब्रिस्तान में इंदौर धर्मप्रांत के बिशप थॉमस मैथ्यू ने अपने प्रवचन में कहा कि "मृतकों के स्मरण दिवस को हम न केवल अपने स्वर्ग सिधारे बन्धुजनों का स्मरण करते हैं, बल्कि हम उनसे बताना चाहते हैं कि हम उन से अभी भी जुड़े हुए हैं, वे अभी भी हमारे कलीसियाई परिवार के अंग हैं, और उनके पास आने की तैयारी में हैं।"
जूनी इंदौर कब्रिस्तान में पवित्र मिस्सा एसवीडी प्रोविंशियल फादर संजय कुजूर द्वारा अर्पित की गई। अपने प्रवचन में फादर राजू डोडियार SVD ने कहा कि- "आज सारी कलीसिया में मृतकों का पर्व मनाया जा रहा है। आज हम उन सभी दिवंगत आत्माओं की याद करते हैं जो हमसे पहले स्वर्ग सिधार चुके हैं। हम आज उनके लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं। आज के पवित्र वचन हमें सिखाते हैं कि धर्मी व्यक्ति का सर्वनाश नहीं होता है। हम मनुष्य को लगता है कि जब व्यक्ति मर जाता है तो उसका सर्वनाश हो जाता है। परंतु बाइबिल हमें सिखाती है कि मृत्यु जीवन का अंत नहीं, बल्कि स्वर्ग जाने का एक रास्ता है। आज के पर्व का दूसरा पहलू यह है कि हमें हमारे जीवन में आशावान बने रहना चाहिए। मृत्यु के साथ ही सबकुछ नष्ट नहीं हो जाता है, मृत्यु के बाद भी हमारे लिए अनंत जीवन है। इसका अर्थ यह भी है कि ये संसार ही ठिकाना नहीं है, जैसा हम में से बहुत लोग सोचते हुए जीते हैं। हमारा अंतिम पड़ाव स्वर्ग है। इसलिए आज क्या संदेश हम सभी के लिए यह है कि हम यहां पर दुनिया में अपना ठिकाना ना बनाएं यह हमारे लिए स्वर्ग में जाने के लिए एक रास्ता है।"
कब्रिस्तान में पवित्र मिस्सा अर्पित करने के बाद पवित्र जल के छिड़काव द्वारा कब्रों की आशीष की गई। मृत विश्वासियों के परिजनों ने कब्रों को हार फूल से सजाकर उन पर मोमबत्ती जलाकर उन्हें याद किया।
