पेरिस की अपनी प्रेरितिक यात्रा के दौरान संत पापा का दूसरा पड़ाव संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन यूनेस्को के मुख्यालय था। पोप ने इस दौर की तानाशाही या बर्बरता, साथ ही इंसान के "अमानवीयकरण" और मशीनों के "मानवीयकरण" की निंदा की। उन्होंने कहा कि "गर्भ में पल रहे बच्चों और युद्धग्रस्त इलाकों में रहने वाले बच्चों, शारीरिक और मानसिक रूप से अक्षम लोगों, बुज़ुर्गों और प्रवासियों" का ध्यान रखना ही इंसानी गरिमा के सम्मान से जुड़े कामों और बयानों की असल कसौटी है।