अन्तरराष्ट्रीय काथलिक आप्रवास आयोग की 75वीं वर्षगांठ

रोम में 10 से 12 नवम्बर तक सम्पूर्ण विश्व के धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों एवं स्थानीय कलीसियाई समुदायों का प्रतिनिधित्व करनेवाले अन्तरराष्ट्रीय काथलिक आप्रवास आयोग (ICMC) के सदस्य अपनी 75 वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में बैठक के लिये एकत्र होंगे।

(ICMC) की स्थापना
सन् 1951 में, अन्तरराष्ट्रीय काथलिक आप्रवास आयोग (ICMC) की स्थापना सन्त पापा पियुस 12 वें, तत्कालीन महाधर्माध्यक्ष जोवानी बतिस्ता मोनटीनी (सन्त पापा पौल षष्टम) तथा अमरीका के लोकधर्मी विश्वासी जेम्स नॉरिस के प्रयासों का परिणाम था।  

75 वर्षों से, ICMC ने, धर्म, नस्ल, जाति और राष्ट्रीयता का भेदभाव किये बिना बेघर हुए लोगों - शरणार्थियों, शरण चाहने वालों, अपने ही देश में विस्थापित लोगों, मानव तस्करी के पीड़ितों और आप्रवासियों की रक्षा और सेवा की है।  

75 वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में प्रकाशित अन्तरराष्ट्रीय काथलिक आप्रवास आयोग के घोषणा पत्र में सन्त पापा लियो 14 वें प्रेरितिक उदबोधन दिलेक्सी दे के इन शब्दों को उद्धृत किया गयाः

दिलेक्सी दे
“एक माता के सदृश कलीसिया, राह चलते लोगों के साथ है। जहाँ दुनिया को ख़तरे दिखाई देते हैं, वहाँ कलीसिया को बच्चे नज़र आते हैं; जहाँ दीवारें खड़ी की जाती हैं, वहाँ वह पुलों का निर्माण करती है। वह इस बात से भलीभाँति परिचित है कि सुसमाचार का संदेश तब विश्वसनीय होता है, जब वह निकटता और आतिथेय के कार्यों में झलकता है। और वह यह भी जानती है कि ठुकराये गये हर आप्रवासी में, स्वयं येसु मसीह ही हैं जो समुदाय के दरवाज़े पर दस्तक दे रहे होते हैं।”  

कार्यक्रम
अन्तरराष्ट्रीय काथलिक आप्रवास आयोग की दो दिवसीय बैठक का उदघाटन अखण्ड मानव विकास सम्बन्धी परमधर्मपीठीय विभाग के अध्यक्ष कार्डिनल फाबियो ब्याज्यो तथा शरणार्थी सम्बन्धी संयुक्त राष्ट्र संघीय आयोग के प्रमुख फिलिप्पो ग्रान्दे के प्रभाषणों के साथ होगा।

अन्तरराष्ट्रीय काथलिक आप्रवास आयोग की विज्ञप्ति में बताया गया कि 10-11 नवंबर को, ICMC आयोग मानव आवागमन से जुड़ी वैश्विक स्थिति और हर महाद्वीप में कलीसिया के सामने आ रही विशिष्ट चुनौतियों पर विचार-विमर्श करेगा। इसी दौरान ICMC के अध्यक्ष का चुनाव निर्धारित है, साथ ही आगामी चार वर्षों के लिए एक नई संगठनात्मक रणनीति को मंजूरी देना भी कार्यक्रम का में शामिल है।

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