सृष्टि के लिए प्रार्थना दिवस पर मिस्सा, ईश्वर की कृति पर चिंतन करने का निमंत्रण

पोप लियो 14वें ने 1 सितम्बर 2026 को सृष्टि की देखरेख हेतु विश्व प्रार्थना दिवस के अवसर पर रोम के कस्तेल गन्दोल्फो में यूखारीस्तीय बलिदान अर्पित किया।

पोप ने अपने प्रवचन में कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, सृष्टि की देख-रेख हेतु विश्व प्रार्थना दिवस के अवसर पर, आज की धर्मविधि के लिए लिये गये पाठ, हमें ईश्वर की कृति पर चिंतन करने का निमंत्रण देते हैं- एक कार्य जो इस सुन्दर वाटिका के संदर्भ में हमारे लिए निश्चिय ही कठिन नहीं लगता है।

प्रज्ञा ग्रंथ हमें सृष्टि की सुन्दरता और उसकी शक्ति पर चिंतन करने को प्रोत्साहित करती है, जिससे हम सृष्टिकर्ता की प्रशंसा कर सकें। अपनी निगाहों को सृष्टिकर्ता के आश्चर्य की ओर उन्मुख किये हमारे लिए अग्नि, वायु और कल-कल करते झरने या आकाश के तारों के प्रति विस्मय व्यक्त करना व्यर्थ होगा।

पोप लियो ने कहा कि स्तोत्र 18 हमें अपनी आंखों के स्वर्ग की ओर उठाते हुए चिंतन करने का आहृवान करता है, जो ईश्वर की महिमा घोषित करते हैं, और नभ जो ईश्वर के हाथों से किये गये कार्यों को घोषित करते हैं। सारी सृष्टि हमारे लिए सृजनहार की महानता का बखान करती है, यह केवल तब होता है जब हम अपनी आँखों और हृदयों को इस एक महान रहस्य के लिए खुला रखते हैं।

उसी भांति संत मत्ती का सुसमाचार हमें सृष्टि पर चिंतन करने हेतु निमंत्रण देता है जहाँ हम ईश्वर के विशेष प्रेम को मानव के लिए व्यक्त पाते हैं। हम आकाश के पक्षियों और खेतों के लीली फूलों की ओर आश्चर्य से देखते हैं- जो सृष्टिकर्ता की निगाहों में मूल्यवान हैं- यह हमारे लिए ईश्वर के महान प्रेम को समझने हेतु मदद करता है। यदि ईश्वर अपने सुन्दरता को पौधों और पशु-पक्षियों के ऊपर प्रकट करने में असफल नहीं होते, तो वे अपने प्रेमी पुत्र-पुत्रियों की आवश्यकताओं हेतु कितनी चिंता करते हैं।

पोप ने कहा कि आज की शाम, जब हम ईश्वर के कार्यों के सामने उनके ऊपर चिंतन करने हेतु उनके निमंत्रण को स्वीकरते हैं, हम “सृष्टि के मौसम” की शुरूआत करते हैं- पांच सप्ताह का एक समय जो हमारे लिए निष्ठा में “आमघर” की देख-रेख हेतु प्रार्थना करने को समर्पित है। इस दिन, और आनेवाले सप्ताहों में, इसलिए आइए हम अपने को कुछ क्षणों के लिए दैनिक जीवन के कार्यो से अलग करें जिससे हम उस गहरी एकता का रसास्वादन कर सकें जिसके हम सभी अंग है। हम अपने को उस “शांति में स्थापित” करें जहाँ कितनी ही शोर मानवीय कार्यो द्वारा उत्पन्न किये जाते हैं, जिससे हम सृष्टि की मधुर आवाज को सुन सकें, जिसके माध्यम से ईश्वर, सारी चीजों के निर्माता हमसे बातें करते हैं।

पोप ने कहा कि यह चिंतन का कार्य, जो हमें ईश्वर से मिलन हेतु तैयार करता है, “हमारे लिए सच्ची पारिस्थितिकी परिवर्तन की ओर पहला कदम है, जहाँ ईश्वर से हमारे मिलन की प्रभावकारी दुनिया से हमारे संबंध में प्रमाणित होती है।”

सृष्टि पर चिंतन करते हुए और इसके सृष्टिकर्ता से मिलन में,  हम अपने सचेतना में ईश्वर के आश्चर्यजनक योजना में अपने को पाते हैं, और उसे हम व्यक्तिगत और समुदायिक उत्तरदायित्व स्वरुप असल शांति में बनाये रखते हैं। इस भांति, अपनी गलतियों और कमजोरियों के प्रति चेतना में हम अपनी निष्ठा की नवीनता में ईश्वर की योजना अनुसार सारी सृष्ट प्राणियों के संग संबंध स्थापित करते है।

इसी कारण से, आज के इस विश्व दिवस की गूंज, “नबूवत पुकार, वे अपने तलवारों को फार के रुप में बदलेंगे...” क्षति को जीवन के रूप में परिवर्तित करेंगे।” अबतक देर नहीं हुई है, और सृष्टि हेतु अवधि हमारे एक बृहृद परिवर्तन की मांग करती है- “जो विध्वंस के लिए उपयोग किया गया है अपने में जीवन के लिए उपयोग किया जाये, गरीबों की देख-रेख हेतु, भूखों के पोषण में और सृष्टि की सुरक्षा हेतु।”

इस अवधि की शुरू जिसे हम आज कर रहे हैं, 04 अक्टूबर को समाप्त होगी, जब हम अस्सीसी के संत फ्रांसिस  की 800वीं सालगिरह मनायेंगे। संत पापा फ्रांसिस ने विश्व पत्र लौदातो सी प्रकाशित करते हुए उनसे एक विशेष प्रेरणा लीं और जो बोर्गो को जीवन देती है जो हमारा स्वागत करता है।

अतः आइए हम अपने को दरिद्र असीसी (संत फ्राँसिस) की आध्यात्मिकता से संयुक्त करें और सृष्टि के उनके महिमागान का आलिंगन करें।

तेरी स्तुति हो मेरे प्रभु, तेरी सृष्ट सारी प्राणियों में विशेषकर भाई सूर्य में... तेरी स्तुति हो मेरे प्रभु, बहन चन्द्रमा और तारों में.. तेरी स्तुति हो मेरे प्रभु, भाई वायु में... तेरी स्तुति हो, मेरे  प्रभु बहन जल में... तेरी स्तुति हो मेरे प्रभु  भाई अग्नि में... तेरी स्तुति हो मेरे प्रभु बहन माता पृथ्वी में, जो हमें पोषित करती और संचालित करती है”

संत फ्रांसिस में, आइए हम संत फ्रांसिस के साथ, उस वैश्विक भाईचारे को जीने और बढ़ावा देने के अपनी निष्ठा को फिर से दोहराएं, जो दुनिया की देखभाल के कार्य से पूरी तरह जुड़ी हुई है। 

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