पोप लियोः विश्व न्याय और शांति की भूखी है

पोप लियो ने अफ्रीकी देशों की अपनी यात्रा के दसवें दिन इक्वेटोरियल गिनी के मोंगोमो, निष्कलंक गर्भाधारण के महागिरजाघर में यूख्रारीस्तीय बलिदान अर्पित करते हुए विश्वासियों को सुसमाचार की घोषणा करते हुए अपने समृद्ध देश में आशा और मेल-मिलाप के शिल्पकार बनने का आहृवान किया।

पोप लियो ने इक्वेटोरियल गिनी के मोंगोमो, माता मरियम के निष्कलंक महागिरजाघर में ख्रीस्तीय बलिदान अर्पित किया।

पोप ने अपने प्रवचन में कहा कि हम निष्कलंक गर्भाधरण के भव्य महागिरजाघर में, जो शरीरधारण शब्द और इक्वेटोरियल गिनी की माता मरियम को समर्पित है, ईश्वर के वचनों को सुनने और उस यादगारी को मनाने हेतु जमा हुए हैं, जो हमारे लिए कलीसिया के जीवन और प्रेरिताई का स्रोत और चरम है। कलीसिया में ख्रीस्तयाग हमारे लिए सचमुच में हर आध्यात्मिक चीजों को वहन करती है- यह ख्रीस्त, हमारे पास्का हैं जो अपने को हमें देते हैं, वे जीवंत रोटी हैं जो हमारा पोषण करते हैं। यूखरिस्त में उनकी उपस्थिति सारी मानवता के लिए उनके अनंत प्रेम को व्यक्त करता है जहाँ वे हर नर और नारी से आज भी मिलने आते हैं।

कृतज्ञता के भाव
पोप लियो ने इक्वेटोरियल गिनी में सुसमाचार प्रचार के 170 वर्षों के लिए ईश्वर के प्रति कृतज्ञता के भाव प्रकट करते हुए कहा कि एक उचित अवसर है जहाँ हम ईश्वर के महान कार्यों की याद करते हैं, और साथ ही उन्होंने कहा, “उन सभी प्रेरितों, प्रांतीय पुरोहितों, धर्मप्रचारकों और लोकधर्मियों के प्रति कृतज्ञता के भाव प्रकट करता हूँ जिन्हें सुसमाचार की सेवा हेतु अपने जीवन को समर्पित किया है।” उन्होंने लोगों की इच्छाओं, सवालों और घावों को अपने में वहन करते हुए उन्हें ईश वचनों द्वारा आलोकित किया है, जो उन्हें आप के मध्य ईश्वरीय प्रेम की निशानी बनाता है। अपने जीवन के उदाहरणों द्वारा उन्होंने निष्ठा में ख्रीस्त का अनुसरण करते हुए दुःखों से भयविहीन ईश्वर के राज्य का प्रचार किया है।

अफ्रीका की भूमि
पोप लियो ने कहा कि यह एक इतिहास है इसे आपको कभी नहीं भूलना चाहिए। वहीं एक ओर, यह आप को वैश्विक और प्रेरितिक कलीसिया से संयुक्त करता है, तो दूसरी ओर यह नायकों के रूपों में सुसमाचार को अपने विश्वास के साक्ष्यों द्वारा घोषित करने को मदद करता है, जिसे संत पापा पौल 6वें ने अपने शब्दों में अफ्रीका की भूमि के लिए घोषित किया, “अफ्रीका के लोगों, आज से आप स्वयं के लिए प्रेरितों के रुप में हैं। ख्रीस्त की कलीसिया सही रुप में और अच्छी तरह इस भूमि में रोपी गयी है।” (यूंगाडा, काम्पाला 31 जुलाई 1969)

इस बात को ध्यान में रखते हुए, आप प्रेरितों, प्रचारकों और लोकधर्मियों के कदमों का अनुसरण करने हेतु बुलाये जाते हैं, जो आप से पहले गुजर गये हैं। “आप में से हर कोई व्यक्तिगत रूप में अपने को समर्पित करने हेतु बुलाये जाते हैं जो आपके पूरे जीवन को सम्माहित करता है, जिससे जो आनंद में आप के समुदायों और धर्मविधियों में अर्पित किया जाता- आप के करूणामय कार्यों को पोषित करे, जिन्हें आप अपने उत्तरदायी स्वरुप अपने पड़ोसियों के लिए करते हैं जो पूरे समाज की भलाई हेतु होती है।

निष्ठा, धैर्य और त्याग
पोप ने कहा कि ऐसी निष्ठा एक धैर्य, एक प्रयास और कभी-कभी त्याग की माँग करती है। यह हमारे लिए इस बात की निशानी है कि आप सचमुच में ख्रीस्त की कलीसिया हैं। वास्तव में, प्रथम पाठ में हमने निर्भय कलीसिया के बारे में सुना जो आनंद में सुसमाचार का प्रचार करती है, एक वह कलीसिया जो अपने इस कार्य के कारण प्रताड़ित की जाती है। (प्रेरि.8.1-8) इसके बावजूद, प्रेरित चरित हमें बतलाता है कि ख्रीस्तीयों को भागने के लिए मजबूत होना पड़ता है और वे बिखर जाते हैं, बहुत से लोग ईश वचन के निकट आते और स्वयं अपनी आँखों से यह देखते हैं कि कैसे वे जो शारीरिक और आत्मिक रुप में बीमार थे चंगाई प्राप्त करते हैं- ये ईश्वरीय उपस्थिति की चमत्कारिक निशानियाँ हैं, जो पूरे शहर के लिए बृहृद आनंद का कारण बनती है।

ईश्वर सदैव क्रियाशील
प्रिय भाइयो एवं बहनों, संत पापा लियो ने कहा कि जब हम अपने व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों को सदैव अनूकूल नहीं पाते, हमें यह विश्वास करने की जरुरत है कि उन परिस्थितियों में भी ईश्वर कार्यशील हैं, वे अपने राज्य के अच्छे बीजों को गुप्त रुप में विकसित करते हैं, उन परिस्थितियों में भी जब हमें सारी चीजें सूखी लगती हैं, जब हमारा जीवन हमें अंधकार लगता है। ऐसे विश्वास में, जो हमारी शक्ति में नहीं अपितु ईश्वर के प्रेम में आधारित है, हम सुसमाचार के प्रति निष्ठावान बने रहने, उसे घोषित करने, पूर्णरूपेण जीने और आनंद में उसका साक्ष्य देने हेतु बुलाये जाते हैं। ईश्वर हमारे लिए अपनी उपस्थिति को निशानियों में प्रकट करने हेतु असफल नहीं होंगे, और जैसे कि येसु ने हमें सुसमाचार में बतलाता, वे हमारे लिए जीवन की रोटी होंगे जो हमारी भूख मिटाती है। (यो.6.35)