पोप : एकता और विविधता में सुसमाचार के आनन्द का साक्ष्य दें
मैड्रिड के सांतियागो बर्नब्यू स्टेडियम में महाधर्मप्रांतीय समुदाय के साथ एक मुलाकात में, पोप लियो 14वें ने बपतिस्मा, सिनॉडालिटी और सुसमाचार प्रचार पर बात की।
पोप लियो 14वें ने 8 जून को सांतियागो बर्नब्यू स्टेडियम में मैड्रिड के महाधर्मप्रांतीय समुदाय से मुलाकात की। समुदाय के विभिन्न लोगों का साक्ष्य सुनने के बाद पोप ने उन्हें अपना संदेश दिया।
विश्वास का गीत
यह शाम विश्वास का एक बड़ा गीत बन गई है, और मुझे खुशी है कि मैं आपकी आवाज में ईश्वर की प्रशंसा कर रहा हूँ और ऐसे खूबसूरत कलीसियाई परिवार के रिश्तों को मजबूत कर रहा हूँ, जो बहुध्वनि की कला सीख रहा है, यानी अलग-अलग लय में समरूपता लाने की।”
पोप ने कहा, “हमारे दिलों को गाना चाहिए — यानी, हमें दूसरों के साथ उनके अर्थ को समझते हुए घटनाओं और परिस्थितियों का मतलब निकालना चाहिए। कलीसिया के लिए, यह अवसर धर्मविधि के माध्यम से आता है, उन घटनाओं की बड़ी यादगारी में जिन्होंने हमें बचाया।”
पोप ने गाने को जीवन में आवश्यक बतलाया जो हमें दूसरों के साथ शामिल करता है। संस्कृति को चुनौती देता और उसे खुला एवं लगातार बदलते रहने के लिए कहता है। उन्होंने उपस्थित विश्वासियों से कहा, “आप एक धर्मप्रांतीय कलीसिया हैं जो ऐसे लोगों के बीच है जिन्हें संगीत, नृत्य और साथ रहना पसंद है, लेकिन जो झगड़े, हार मानने और कभी-कभी निराशा का भी सामना करते हैं। इन परिस्थितियों में, सुसमाचार उम्मीद का रास्ता खोल सकता है। आप एक महान यूरोपियन देश की राजधानी में सुसमाचार की गवाही देते हैं, जो संस्थान और संगठन की जगह है जहाँ वर्तमान और भविष्य के लिए जरूरी फैसले लिए जाते हैं। यह जगह लाखों पर्यटकों और उन भाई-बहनों के लिए भी है जो नए मौकों की तलाश में आते हैं।”
पोप ने कहा, “आपकी खुशी फैलनेवाली बन जाएगी अगर आप इसे पलभर की भावना से एक स्थिर जीवन में बदल दें, एक गहरी भावना में जो लोगों, दलों और धर्मप्रांतीय समुदाय को नया कर दे। यह कोई संयोग नहीं है कि प्रेरितों ने कलीसियाओं को अपने पत्रों में आनंदित होने के लिए आमंत्रित किया, मानो कि यह कोई आदेश हो। यह इवेंजेली गौदियुम (सुसमाचार का आनंद) है, एक प्रत्युत्तर जिसे हम येसु ख्रीस्त में ईश्वर के कार्यों के लिए एक साथ गा सकते हैं। उनके जीवन, मृत्यु और पुनरूत्थान ने उन लोगों के लिए इतिहास को देखने का नजरिया हमेशा के लिए बदल दिया है जो उनसे मिले और उनका अनुसरण किया, भले ही अलग-अलग तरीकों से और अलग-अलग रास्तों पर। आज भी, ख्रीस्त का प्यार हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है (2 कोर. 5:14)। हमें जिम्मेदार कार्य करने के लिए आमंत्रित करता है।
बपतिस्मा की परिवर्तनकारी शक्ति
जी हाँ, प्यारे भाइयो और बहनो, जैसा कि आप में से कुछ ने आज शाम गवाही दी, बपतिस्मा सच में जीवन बदल देता है। हमारी समझ, पृष्टभूमि और प्राथमिकताएँ मसीह में एक साथ आती हैं और उनसे जीवन पाती हैं, जैसे दाखलता से डालियाँ। इसका मतलब है कि जो कुछ पहले से हमारे अंदर था, वह बदल जाता है और एक व्यक्तिगत उपहार नहीं रह जाता।
यह अब सबकी भलाई की सेवा की ओर उन्मुख हो जाता है। हमें इस बात से नहीं डरना चाहिए कि इससे एकरूपता आयेगी। इस मामले में, नया व्यवस्थान, अपनी अलग-अलग आवाजों से, अलग-अलग तरह के लोगों में मेल-जोल का सबूत देता है — यह समझ बबेल में खो गई थी। बाइबिल के अनुसार, वहाँ हर कोई एक अधिनायकवादी, पूरी तरह से मानवीय परियोजना के लिए मजबूर था और अंत में अपने पड़ोसी को समझने में नाकाम रहा।
विविधता में एकता
अपने प्रेरितिक विश्व पत्र मनिफिका उमानितास में पोप ने भ्रम के विकल्प के रूप में नहेमियाह की छवि को प्रस्तुत किया है। नहेमियाह ने येरूसालेम की दीवारों को फिर से बनाने में पूरे समुदाय को शामिल किया था। पोप ने कहा, “आज पुनः निर्माण का मतलब है यह पहचानना कि आवाजों और नजरियों की बहुलता, एवं बोली जानेवाली भाषाओं की विविधता भले ही भ्रम की याद दिलाते हैं, लेकिन एक अच्छी संभावना उभरती है। असल में, एक साथ बनाने, विविधता को एक संसाधन में बदलने और सुनने एवं बातचीत की आम भूमि, पर न्याय और भाईचारा उत्पन्न किया जा सके। इस साझा काम के अंदर, ख्रीस्तीय विश्वासी ईश्वर की ओर कामों को निर्देशित करने की अपनी खास भूमिका खोजते हैं ताकि, बहुलता अव्यवस्था में न बदल जाए, और सिनॉडालिटी के अभ्यास द्वारा, यह एक ऐसी जगह बने जहाँ मानव अपनी मजबूत नींव और अपने आखिरी लक्ष्य को फिर खोज सकें।” (नंबर 10)
पोप ने गौर किया कि कलीसिया और एक शहर के बीच एक खास रिश्ता होता है, और हमारे बदलते समय में यह और भी अधिक जरूरी है। निश्चय ही, यह रिश्ता सामाजिक हस्ताक्षेप के माध्यम से एवं काम के सिलसिले में असली लोगों के बीच आकार लेता है, लेकिन अलग-अलग समुदायों, संघों और आस-पड़ोस के संगठनों के माध्यम से भी बनता है।” इस संदर्भ में पोप ने चिंता व्यक्त की कि “बड़े शहरी इलाकों में ख्रीस्तीय मिशन के एक खास नजरिए की जरूरत है, जहाँ एक “नई संस्कृति उत्पन्न हुई और बढ़ रही है” (पोप फ्राँसिस, इवेंजेली गौदियुम, 73), जो तेजी से स्पष्ट होती जा रही है। इस विचार को सिनॉडल यात्रा के दौरान स्पष्ट और गहरा किया गया, ताकि हम एक-दूसरे को जान सकें और उन परिस्थितियों में एक-दूसरे को और गहराई से सुन सकें जहाँ धर्मप्रांतीय समुदाय मौजूद हैं। सबसे जरूरी सवाल है: क्या हम ख्रीस्तीयों के रूप में कौन हैं और क्या करते हैं, वह उन स्थानों में “जहाँ नई कहानियाँ और मिसालें बन रही हैं,” पहुँच रही है? क्या हम “हमारे शहरों की सबसे गहरी आत्मा” (नंबर 74) तक पहुँचते हैं? जवाब देना मुश्किल हो सकता है, लेकिन अगर हम मिलकर सच की तलाश करें तो यह संभव है।