पोप ने की धन असमानता, तानाशाही, युद्ध की निंदा
पोप लियो 14 वें अफ्रीका के चार देशों में अपनी 11 दिवसीय प्रेरितिक यात्रा इक्वेटोरियल गिनी में सम्पन्न कर गुरुवार को पुनः रोम लौट आये हैं। इस यात्रा के दौरान उन्होंने वैश्विक नेतृत्व की हवस धन के असमान वितरण, तानाशाही एवं युद्ध की कड़ी निन्दा की ।
सार्वभौमिक काथलिक कलीसिया के परमधर्मगुरु पोप लियो 14 वें अफ्रीका के चार देशों में अपनी 11 दिवसीय प्रेरितिक यात्रा इक्वेटोरियल गिनी में सम्पन्न कर गुरुवार को पुनः रोम लौट आये हैं। उन्होंने कहा है कि अफ्रीका में उनकी यात्रा सन्त पेत्रुस के उत्तराधिकारी रूप में उनकी प्रेरिताई और जीवन को समृद्ध करेगी।
अल्जीरिया, कैमरून, अंगोला एवं इक्वेटोरियल गिनी की यात्रा के दौरान पोप लियो ने लगभग 18,000 किलो मीटर का सफ़र तय किया। इस यात्रा के दौरान उन्होंने वैश्विक नेतृत्व की हवस धन के असमान वितरण, तानाशाही एवं युद्ध की कड़ी निन्दा की जिसके लिये उन्हें अमरीका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प की नाराज़गी का भी सामना करना पड़ा।
ख्रीस्तीय सन्देश का सार
गुरुवार को रोम की वापसी यात्रा से पूर्व पोप लियो ने इक्वेटोरियल गिनी के स्टेडियम में ख्रीस्तयाग अर्पित किया जहाँ हज़ारों श्रद्धालुओं से कहा कि ख्रीस्तीय सन्देश का सार यही है कि "हर व्यक्ति बुराई की दासता से स्वतंत्र हो गया है"। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को आनन्दपूर्वक जीवन यापन का अधिकार है।
अपनी अफ्रीकी यात्रा के दौरान दमदार प्रभाषणों में पोप लियो ने चेतावनी दी है कि दुनिया के सर्वाधिक अमीर लोगों की मनमानी शांति के लिए खतरा है, उन्होंने "नियोकोलोनियल" वैश्विक शक्तियों द्वारा अन्तरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की निंदा की और कहा कि विश्व "कुछ तानाशाहों द्वारा तबाह किया जा रहा है"।
युद्ध के पक्षधर नहीं
पोप लियो की अफ्रीकी प्रेरितिक यात्रा से एक दिन पहले 12 अप्रैल को, ईरान पर अमरीकी-इस्राएली युद्ध की आलोचनाओं के जवाब में, अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पोप लियो को दुर्बल कहते हुए उनपर हमला किया था। 13 अप्रैल को संवाददाताओं से बातचीत में पोप लियो ने कहा था कि ट्रंप की आलोचना के बावजूद वे सत्य और शांति हेतु अपनी आवाज उठाते रहेंगे। बाद में उन्होंने यह स्पष्ट किया था कि उनकी अफ्रीकी यात्रा उनके प्रभाषण हफ्तों पहले लिखे गए थे जिसमें उन्होंने किसी विशेष व्यक्ति पर निशाना नहीं साधा था।
गुरुवार को रोम की वापसी यात्रा के दौरान पत्रकारों से पोप लियो 14 वें ने कहा कि एक ख्रीस्तीय पुरोहित और मेषपाल होने के नाते वे युद्ध के पक्षधर नहीं हो सकते क्योंकि अनेक निर्दोष लोग मारे गये हैं।