पोप : गंभीर अपराध करने के बाद भी मानव गरिमा खत्म नहीं होती

पोप लियो 14वें ने अमेरिका और दुनिया भर में मौत की सज़ा को खत्म करने की वकालत करने वालों को अपना समर्थन दिया और मानव इज्ज़त की रक्षा करने की अहमियत पर ज़ोर दिया।

कलीसिया इस बात को मानती है कि “बहुत गंभीर अपराध होने के बाद भी इंसान की मरिमा नहीं जाती,” पोप लियो 14वें ने शुक्रवार, 24 अप्रैल को अमेरिका की डीपॉल यूनिवर्सिटी में इलिनोइस राज्य में मौत की सज़ा खत्म होने की 15वीं सालगिरह मनाने के लिए एकत्रित हुए लोगों के लिए एक वीडियो मैसेज में कहा।

उन्होंने बताया कि कैसे वे 2011 में लिए गए इस अहम फैसले की खुशी मनाने के लिए वहां उपस्थित लोगों के साथ शामिल हुए और “अमेरिका तथा दुनिया भर में मौत की सज़ा को खत्म करने की वकालत करने वालों को अपना सपोर्ट दिया।”

उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “मैं प्रार्थना करता हूँ कि आपकी कोशिशों से हर इंसान की गरिमा को ज़्यादा पहचाना जाएगा और दूसरों को भी इसी सही मकसद के लिए काम करने की प्रेरणा मिलेगी।”

मौत की सज़ा के बिना भी न्याय मिल सकती है

पोप ने ज़ोर देकर कहा, “हिरासत में असरदार व्यवस्था बनाए जा सकते हैं और बनाए भी गए हैं जो नागरिकों की रक्षा करते हैं और साथ ही दोषियों को मुक्ति की संभावना से पूरी तरह वंचित नहीं करते।”

उन्होंने आगे कहा, “इसीलिए संत पापा फ्राँसिस और मेरे पूर्ववर्ती परमाध्यक्षों ने बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया कि आम लोगों की भलाई की रक्षा की जा सकती है और मौत की सज़ा का सहारा लिए बिना न्याय की ज़रूरतें पूरी की जा सकती हैं।”

उन्होंने काथलिक कलीसिया की धर्मशिक्षा का भी ज़िक्र किया, जिसमें इस बात पर ज़ोर दिया गया कि कलीसिया सिखाती है कि “मौत की सज़ा अस्वीकार्य है क्योंकि यह व्यक्ति की पवित्रता और गरिमा पर हमला है।”

पोप ने गर्भधारण से लेकर प्राकृतिक मृत्यु तक जीवन की रक्षा के महत्व पर कलीसिया की शिक्षा को भी दोहराया।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “जीवन का अधिकार हर दूसरे मानवाधिकार की नींव है। इसी वजह से, जब कोई समाज मानव जीवन की पवित्रता की रक्षा करेगा, तभी वह फलेगा-फूलेगा और समृद्ध होगा।”