पोप लियो ने जिम्बाब्वे नाव हादसे के पीड़ितों के लिए दुःख जताया

पोप लियो 14वें ने कहा है कि वे जिम्बाब्वे के करीबा झील में नौका हादसा के शिकार लोगों के लिए गहरा दुःख व्यक्त करते हैं और पीड़ितों की मदद करनेवालों के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

जिम्बाब्वे की राष्ट्रीय पुलिस सेवा ने रविवार को एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि 11 अगस्त को करीबा झील में हुए नाव हादसे में मरनेवालों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है, जब आठ और लाशें मिलीं।

जिम्बाब्वे की करीबा झील में ओवरलोडेड नौका के पलटने से एक बड़ा हादसा हुआ। हादसे में 18 बच्चे भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि नौका की क्षमता 90 यात्रियों की थी, लेकिन इसमें करीब 153 लोग सवार थे।

वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पीयेत्रो परोलिन द्वारा हस्ताक्षरित एक तार संदेश में पोप लियो 14वें हादसा के शिकार लोगों के लिए दुःख व्यक्त करते एवं मृतकों की आत्मा अनन्त शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।  

कार्डिनल परोलिन ने लिखा, "पोप लियो 14वें को करीबा झील में हुए जानलेवा नाव हादसा के बारे जानकर बहुत दुःख हुआ।”

“वे मरनेवालों की आत्माओं को सर्वशक्तिमान ईश्वर की दया पर सौंपते हुए, उन लोगों के प्रति दिल से संवेदना व्यक्त करते हैं जो उनकी मृत्यु पर शोक मना रहे हैं।”

साथ ही, कार्डिनल ने लिखा है कि इस दुखद घटना पर लगातार काम कर रहे सिविल अधिकारियों और आपातकालीन कर्मचारियों के लिए भी पोप प्रार्थना करते हैं तथा इस हादसा से प्रभावित सभी लोगों पर सांत्वना, चंगाई और बल के ईश्वरीय आशीर्वाद की याचना करते हैं।

खोज जारी
इस बीच, हादसे के सही कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है। कुछ प्रेस रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाव 41 साल पुरानी थी और झील को तेज हवाओं के बीच पार किया गया। जहाज देश के उत्तर-पश्चिम में कई ग्रामीण और मछली पकड़नेवाले समुदायों की ओर जा रहा था, यह एक ऐसा इलाका है जहाँ सड़कें खराब हालत में हैं और अवागमन के साधन कम हैं।

हादसे के बाद, जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति एमर्सन मनांगाग्वा ने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की है, और प्रभावित परिवारों को मेडिकल एवं मनोवैज्ञानिक मदद देने का वादा किया है, जिन्होंने 13 अगस्त को करीबा स्टेडियम में अपने प्रियजनों को श्रद्धांजलि दी।

दुनिया के सबसे बड़े कृत्रिम जलाशयों में से एक, करीबा झील, जाम्बिया की सीमा पर है और इस इलाके के ग्रामीण समुदायों और मछुआरों के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रांसपोर्ट रास्ता है। 1950 के दशक के अंतिम और 1960 के दशक की शुरुआत के बीच जाम्बेजी नदी पर एक डैम बनाकर बनाई गई यह झील 200 किलोमीटर से ज़्यादा तक फैली हुई है।

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