लूर्द में पोप : मानव गरिमा का गलत फायदा नहीं उठाया जा सकता

पोप लियो 14वें ने लूर्द में एक्यूइल नोट्रे-डेम तीर्थयात्री केंद्र का दौरा किया, जहाँ वे बीमार तीर्थयात्रियों और मरियम तीर्थस्थल में उनकी सेवा करनेवाले संगठनों के प्रतिनिधियों से मिले।

पोप लियो 14वें ने फ्राँस की प्रेरितिक यात्रा के तीसरे दिन लूर्द के एक्यूइल नोट्रे-डेम केंद्र में स्टाफ, तथा बीमार और कमजोर तीर्थयात्रियों एवं विकलांग तीर्थयात्रियों से मुलाकात की।

एक्यूइल नोत्र दाम एक स्वास्थ्य देखभाल केंद्र है, जिसको एक बड़े परिवार के रूप में परिकल्पित किया गया है। ग्रोटो के सामने नदी के तट पर स्थित, और लगभग 50 कर्मचारियों, तथा सैकड़ों स्वयंसेवकों द्वारा संचालित, यह केंद्र, इस पवित्र स्थान की यात्रा पर आनेवाले बीमार और बुजुर्ग लोगों को रहने की जगह और सहायता प्रदान करता है।

स्वागत भाषण एवं दो कर्मचारियों के साक्ष्य सुनने के बाद संत पापा ने उपस्थित लोगों को सम्बोधित कर कहा, “लूर्द में आपके साथ होना मेरे लिए खुशी की बात है, जहाँ डेढ़ सौ से भी अधिक सालों से, दुनिया के कोने-कोने से तीर्थयात्री माता मरियम के माध्यम से येसु को अपनी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक तकलीफें चढ़ाने आते हैं। सचमुच, यहाँ दुर्बलता छिपी नहीं है; बल्कि एक पवित्र मुलाकात की जगह बन जाती है।

प्रणाम, मरियम कृपा से पूर्ण, प्रभु तेरे साथ है
इस साल, तीर्थस्थल की प्रेरितिक विषयवस्तु है “प्रणाम, मरियम कृपा से पूर्ण, प्रभु तेरे साथ है” (लूका 1:28)। यह प्रभु के दूत और मरियम की नजरों के बीच के अनोखे आदान-प्रदान को दिखाता है। इस मुलाकात में, एक युवा महिला की विनम्रता और उदारता ने ईश्वर को अपने मुक्ति कार्य को पूरा करने दिया। मरियम ने प्रभु को अपने लिए नहीं रखा, बल्कि उन्हें दुनिया को दिया, और हममें से हरेक से कहा, “प्रभु तुम्हारे साथ है।” संत पापा ने कहा, “यह सच्चाई मानव के रूप में हमारी गरिमा की नींव है। और यहाँ, मरियम हममें से हरेक को एक खास व्यक्ति के रूप में देखती हैं, जैसा कि संत बर्नादेत ने गुफा में दिव्यदर्शन के दौरान गवाही दी थी। यह ममतामय नजर हमें फिर से याद दिलाती है कि ईश्वर की नजर में कोई भी अदृश्य नहीं है।

मानव व्यक्ति की गरिमा
पोप ने इसके विपरीत भावना पर खेद प्रकट करते हुए कहा, “ऐसे समय में जब समाज के कुछ हिस्से मानव जीवन की गरिमा को नजरअंदाज करने या आँखें मूंदने की कोशिश कर रहे हैं, हमें सबसे पहले “अपने अंदर और दूसरों में एक सोचने-समझने वाला नजरिया बढ़ाना होगा… यह उन लोगों का नजरिया है जो जीवन को उसके गहरे अर्थ में देखते हैं, जो उसके मुफ्त होने, उसकी खूबसूरती और स्वतंत्रता एवं जिम्मेदारी के उसके बुलावे को समझते हैं। यह उन लोगों का नजरिया है जो असलियत पर कब्जा करने का दावा नहीं करते बल्कि उसे एक उपहार के रूप में स्वीकार करते हैं, हर चीज में सृष्टिकर्ता का प्रतिबिम्ब देखते हैं और हर इंसान में उसकी जीती-जागती तस्वीर (उत्पति 1:27; स्तोत्र 8:5)। यह नजरिया… हर इंसान के चेहरे पर मिलने, बातचीत और एकता के बुलावे को देखने के लिए खुला है” (संत जॉन पॉल द्वितीय, विश्वपत्र इवांजेलियुम वीते, 83), ताकि दुनिया में जीवन हो सके।

देवदूत संदेश के दौरान जब प्रभु ने उनपर दृष्टि डाला, तब मरियम ने महसूस किया कि वे प्रभु द्वारा चुन ली गई हैं। संत पापा ने कहा कि इस मुलाकात में हममें से हरेक जन यह जानता है कि हमें भी ईश्वर के प्यार के लिए बुलाया गया और ईश्वर के प्रेम के लिए गहराई से निर्दिष्ट गया है, जो जीवन के स्रोत हैं। मानव सिर्फ इसलिए "योग्य" है क्योंकि वह अनन्त के लिए बना और निर्दिष्ट है। हमारी गरिमा को मापी या उस पर बहस नहीं की जा सकती।

संत पापा ने रोगी भाईबहनों को सम्बोधित कर कहा, “मुझे मालूम है कि आप में से कुछ लोगों के लिए, खास बीमारियों और कभी-कभी बहुत अधिक दर्द के कारण, आपका भविष्य अंधकारमय, अनिश्चित और बिना उम्मीद के लग सकता है। लेकिन कोई भी मानवीय कानून आपको अपनी गरिमा की निश्चितता कभी खोने नहीं दे सकता। इसके विपरीत, मानव की इसी कभी न खत्म होनेवाली गरिमा के नाम पर हमें झूठी दया की आड़ में मौत का लालच ठुकराना चाहिए। मौत का कारण बनना कोई साधारण बात नहीं है। पोप ने इच्छा मृत्यु के कानून का विरोध करते हुए कहा, “जो कानूनी है, जरूरी नहीं कि वह नैतिक भी हो।”

स्वास्थ्य देखभाल के पूरे समुदाय से अपील
इस अवसर पर संत पापा ने दुनियाभर के स्वास्थ्यकर्मियों से अपील करते हुए कहा, यहाँ लूर्द में, रोगियों और उम्मीद के शहर में, मैं स्वास्थ्य देखभाल के पूरे समुदाय से अपील करता हूँ कि आप अपने काम के गहरे अर्थ को याद रखें, जो कि एक पीड़ित इंसान की देखभाल करना है, न कि उसे खत्म करना। हाँ, प्यारे दोस्तों, जीवन के उत्साही सेवक बनें। किसी को भी यह अधिकार नहीं है कि “प्रयोगशाला एल्गोरिदम के आधार पर, किसी भ्रूण या बुजुर्ग इंसान के जीवन का फैसला करे! मेडिकल कभी भी योजनाबद्ध मौत का सेवक न बने!”

पोप ने प्रशामक देखभाल के लिए संरचनाओं को विकसित करने की अपील की। रोगियों के साथ नरमी से पेश आने की सलाह दी। पोप ने कहा, “जैसे हम यहाँ लूर्द में देखते हैं, जहाँ डॉक्टर, नर्स, स्ट्रेचर उठानेवाले, रोगियों की सेवा करनेवाले स्वयंसेवक टीमें, और बहुत से दूसरे लोग मानव की गरिमा की सेवा में अपना काम करते हैं, ताकि दुनिया को जीवन मिले। शरीरों की देखभाल करते हुए, आप घायल आत्माओं को भी मरहम लगाते हैं। संत पापा ने स्वागत केंद्र के सदस्यों और स्वास्थ्य देखभाल में काम करनेवालों को उनकी सेवाओं के लिए धन्यवाद दिया।

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