पोप लियोः हम हथियारों का परित्याग करें
पोप लियो14वें ने प्रभु येसु ख्रीस्त के पुनरूत्थान महापर्व के शुभ अवसर पर रोम और विश्व ने नाम पास्का शांति संदेश प्रेषित करते हुए हथियार छोड़ने का आहृवान किया।
पोप ने वाटिकन संत पेत्रुस महागिरजाघर के झरोखे से सबों का अभिवादन करते हुए कहा प्रिय भाइयो एवं बहनों, “ख्रीस्त जी उठे हैं, सबों को खुश पास्का पर्व”।
सदियों से, कलीसिया ने आनंद में इस घटना का भजन गया है जो हमारे विश्वास का स्रोत और मूलभूत आधार है। “हाँ, ख्रीस्त मेरी आशा पुनर्जीवित हैं, ख्रीस्त सचमुच मृतकों में से जी उठे हैं, कृपा कर, विजयी राजा, तू हमेशा राज करता है।”
पास्का एक जीत
पोप ने कहा, “पास्का मृत्यु पर जीवन की जीत है, अंधेरे में ज्योति की जीत, घृणा के ऊपर प्रेम की जीत।” यह एक वह जीत है जो हमारे लिए एक बृहृद कीमत से आती है, ख्रीस्त, ईश्वर के जीवित पुत्र, (मत्ती.16.6) को इसके लिए मरना पड़ा, उन्हें एक क्रूस पर मरना पड़ा- एक अन्यायपूर्ण दोषारोपण के कारण भारी दुःख सहते हुए, उनकी खिल्ली उड़ाई गई और उन्हें प्रताड़ित किया गया, उन्हें अपना सारा लोहू बहाना पड़ा। एक सच्चे बलि चढ़ाये गये मेमने की भांति, उन्होंने दुनिया के पापों को अपने ऊपर ले लिया (यो.1.29, 1 पेत्रु. 1.18-19) और इस भांति उन्होंने हम सभों को और हमारे संग सारी सृष्टि को, बुराई के बंधन से मुक्त किया है।
लेकिन येसु कैसे अपने में विजय प्राप्त करते हैंॽ वह कौन-सी शक्ति है जिसके द्वारा वे पुराने शत्रु को एक बार और सदा के लिए हराते हैं, जिसका राज इस दुनिया का हैॽ(यो.12.31) वह कौन-सी शक्ति है जिसके द्वारा वे मृतकों में से जी उठते हैं, जहाँ वे अपने पुराने जीवन में नहीं, बल्कि अनंत जीवन में प्रवेश करते और अपने शरीर में इस दुनिया से पिता के पास जाने का मार्ग हमारे लिए प्रशस्त करते हैंॽ
शक्ति और साहस
शक्ति उनके लिए स्वयं ईश्वर से आती है क्योंकि वे प्रेम हैं जो सृजन और निर्माण करते हैं, प्रेम जो अपने में अंत तक निष्ठामय है और वह प्रेम क्षमा करता और मुक्ति प्रदान करता है।
ख्रीस्त, हमारे “विजयी राजा”, ने पिता की मुक्ति योजना के अनुरूप, अपने को उनके विश्वास में समर्पित किया, वे उनकी इच्छा में बनें रहते हुए अपनी लड़ाई लड़ी और विजय हुए (मत्ती.26.42)। इस भांति उन्होंने अंत तक वार्ता के मार्ग का अनुसरण किया, अपने शब्दों से नहीं बल्कि अपने कार्यों के माध्यम से- जिससे वे हमें पा सकें जहाँ हम खो गये थे, वे हमारी तरह शरीरधारण करते हैं जिससे वे हमें गुलामी से मुक्त कर सकें, वे स्वयं सेवक बनते हैं जिससे वे हम नश्वर प्राणी को जीवन प्रदान कर सकें, इसके लिए वे अपने को क्रूस पर मौत के हवाले करते हैं।
ख्रीस्त की अहिंसा
पोप ने कहा कि ख्रीस्त की शक्ति अहिंसा है जिसके द्वारा वे जी उठते हैं। यह हमारे लिए उस गेहूँ के दाने की भांति है जो भूमि पर गिरकर मरता, विकसित होता, ढ़ोलों को तोड़ता, प्रस्फूटित होता और गेहूँ की सुनहरी बालियाँ बनता है। उससे भी बढ़कर यह एक मानव के उस हृदय की भांति है जो हिंसा के कारण घायल है, लेकिन वह अपने में स्वतः उत्पन्न होनेवाली प्रतिशोध की भावना का परित्याग करता है, वह करूणा से ओत-प्रोत, उनके लिए प्रार्थना करता है जिन्होंने उसके विरूद्ध हिंसा किया।
प्रिय भाइयो एवं बहनों, पोप ने कहा कि यह वह सच्ची शक्ति है जो मानवता के लिए शांति लाती है क्योंकि यह हर परिस्थिति में सम्मानजनक संबंधों को पोषित करती है- व्यक्तिगत स्तर पर, परिवारों, सामाजिक दलों और राष्ट्रों में। यह अपने स्वार्थ की खोज नहीं करता है लेकिन यह जनसामान्य के हित की चाह रखता है, यह अपनी योजनाओं को दूसरों पर नहीं थोपता है, बल्कि दूसरों के साथ मिलकर एक योजना तैयार करने में मदद करता और उसे मिलकर पूरा करता है।