पोप लियोः पुरोहिताई पवित्रता ख्रीस्त की खुशबू बिखेरने हेतु
पुण्य बृहस्पतिवार को पोप लियो ने क्रिज्म मिस्सा बलिदान अर्पित करते हुए येसु की प्रेरिताई पर चिंतन करते हुए पुरोहितों को ख्रीस्त की खुशबू बिखेरने का आहृवान संदेश दिया।
पोप लियो 14वें ने पुण्य बृहस्पतिवार को संत पेत्रुस के महागिरजाघर में क्रिज्म मिस्सा अर्पित किया।
पोप ने अपने प्रवचन में कहा कि हम अपने पास्का त्रिदिवसीय समारोह की दहलीज पर हैं। एक बार और, येसु हमें अपनी प्रेरिताई की चरमसीमा तक ले चलेंगे, जहाँ उनका दुःखभोग, मृत्यु और पुनरूत्थान हमारी प्रेरिताई का केन्द्रविन्दु बनेगा। हम जिन बातों को पुनः जीने वाले हैं, उनमें हमें बदले की शक्ति है, हमारी पहचान और दुनिया में हमारा स्थान जो मानवीय घमंड के कारण सधारणतः कठोर बन जाता है। येसु की स्वतंत्रता हमारे हृदयों को परिवर्तित करती है, हमारे घावों को चंगाई प्रदान करती, चेहरों को नया और चमकदार बनती, हमें जमा करती और हमारा मेल करती है तथा हमें क्षमा प्रदान करते हुए हमें ऊपर उठाती है।
हमारी प्रेरिताई ख्रीस्त की प्रेरिताई
रोम के धर्माध्यक्ष स्वरुप अपने प्रथम क्रिज्म ख्रीस्तयाग में, मैं आप के संग ईश्वर की प्रेरिताई के बारे में चिंतन करना चाहूँगा जिसमें वे अपने लोगों को निमंत्रण देते हैं। यह कोई दूसरी नहीं बल्कि हमारे लिए ख्रीस्त की ही प्रेरिताई है। हम से हर कोई अपनी बुलाहट के अनुरूप पवित्र आत्मा की आवाज को सुनते हुए एक गहरी आज्ञाकारिता में इसमें सहभागी होते हैं, यद्यपि यह कभी भी दूसरों के बिना नहीं होती है, यहाँ हम दूसरे के संग अपनी एकता की अवहेलना या परित्याग नहीं करते हैं। धर्माध्यक्षों और पुरोहितों के रुप में जब हम अपनी प्रतिज्ञाओं को नवीन करते तो हम प्रेरितिक प्रजा की सेवा में अपने को समर्पित करते हैं। बपतिस्मा प्राप्त सभी लोगों के संग, हम येसु के शरीर हैं, जो पवित्र आत्मा के द्वारा स्वतंत्रता और सांत्वना से भरे, एकता और सुसमाचार की घोषणा हेतु अभियंजित किये गये हैं।
हमारी पवित्रता-भेजे जाने हेतु
येसु ख्रीस्त ने अपनी प्रेरिताई की चरमसीमा में जिन बातों का अनुभव किया उसे हम नबी इसायस के ग्रंथ में झलकता पाते हैं, जिसे उन्होंने नजारेत के प्रार्थनालय में यह कहते हुए घोषित किया, “आज” यह पूरा हुआ। (लूका. 4.21)। वास्तव में, पास्का के समय, यह हमारे लिए निश्चित रूप से स्पष्ट होता है कि ईश्वर भेजने के लिए पवित्र करते हैं। “उसे ने मुझे भेजा है” येसु कहते हैं, उस क्षण का जिक्र करते हुए जहाँ वे अपने शरीर को गरीबों, कैदियों, अंधकार में टटोल रहे लोगों और दुःख से बोझिलों के संग अपने को सम्मिलित करते हैं। हम, उनके शरीर के अंग स्वरुप, कलीसिया जो “प्रेरितिक” हैं उसे घोषित करते को भेजे जाते हैं, जो ईश्वर में प्राणियों की सेवा हेतु पवित्र की गई है। “जैसे पिता ने मुझे भेजा हैं, मैं तुम्हें भेजता हूँ” (यो. 20.21)।
भेजे जाने में स्वतंत्रता की माँग
पोप ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि भेजा जाना हमारे लिए सर्वप्रथम अपने को अलग करना है अर्थात उन चीजों को पीछे छोड़ना जो परिचत और निश्चित हैं, जिससे हम नवीनता में प्रवेश कर सकें। “पवित्र आत्मा की शक्ति में” यह हमारे लिए महत्वपूर्ण होता है, जो यर्दन के बपतिस्मा में उनके ऊपर उतरते हैं, येसु गलीलिया लौटते और नाजरते आते हैं जहाँ उनका पालन-पोषण हुआ था। (लूका.4.16) यह वह स्थान है जिसे उन्हें छोड़ना है। वे प्रथा के अनुसार आगे बढ़ते हैं, बल्कि वे एक नये युग में प्रवेश करते हैं। उन्हें उस गाँव को हमेशा के लिए छोड़ने की जरुरत है जिससे जो बातें वहाँ, प्रभु के दिन में, ईश वचनों के श्रवण में पूरी हुई हैं, फलहित हो सके। उसी भांति वे दूसरों को भी निमंत्रण देते हैं, अपने संग चलने, जोखिम लेने के लिए, जिससे कोई भी स्थान कैदखाने की भांति न रहे, जो किसी की पहचान छुपने की एक जगह न बनती हो।
नयेपन हेतु खालीपन जरूरी
पोप ने कहा प्रिय मित्रों, हम येसु का अनुसरण करते हैं जिन्होंने ईश्वर की बराबरी नहीं कि जिससे वे किसी चीज का दुरूपयोग कर सकें बल्कि उन्होंने अपने को खाली कर दिया।(फिलि.2.6-7) हर प्रेरिताई की शुरूआत वैसे ही खाली करने से होती है जहाँ हमारे लिए नयी चीजों का जन्म होता है। ईश्वरीय संतान के रूप में हमारी पहचान को हमसे कोई छीन नहीं सकता है, न ही हम उसे खोते हैं, और न ही हमारे जीवन के शुरूआती प्रेम, स्थान और अनुभव मिटाये जा सकते हैं। हम बहुत सारी अच्छाइयों के वारिस हैं और साथ ही, एक ऐसे इतिहास की सीमाओं के भी, जहाँ हमें सुसमाचार की ज्योति और मुक्ति, क्षमा और चंगाई को लाने की जरुरत है। इस भांति, अतीत से मेल-मिलाप के बिना हम कोई प्रेरिताई को नहीं पाते हैं, अपने आप से बाहर जाने के बिना हममें कोई शांति नहीं है, परित्याग के बिना कोई चेतना नहीं, बिना जोखिम कोई खुशी नहीं। यदि हम आगे बढ़ते तो हम येसु ख्रीस्त का शरीर बनाते हैं, हम बिना कैद हुए अपने अतीत से बाहर निकलते हैं, हमारे लिए सारी चीजें मिलती और उनमें बृद्धि होती है, बिना भयभीत हुए, जब हम पहले उन्हें अपने से मुक्त करते हैं। यह हमारे लिए प्रेरिताई का एक मूलभूत सार है। हम इसका अनुभव एक बार में नहीं कहते बल्कि हर नई शुरूआत में, हर नये भेजे जाने में हमें इसकी अनुभूति होती है।
मुक्ति और मिलन का नियम
पोप ने कहा कि येसु की यात्रा हमारे लिए उनके स्वेच्छा से परित्याग को प्रकट करता है, अपने को खाली करने, जो अपने में खत्म होना नहीं है बल्कि एक स्थिति जहाँ हम मिलन और संबंध की गहराई को पाते हैं। प्रेम अपने में सच्चा तब होता है जब वह अपनी सुरक्षा नहीं करता है, इसमें बहुत कम बंतगड़, कोई दिखावा नहीं होता है, और यह कोमलता में खामियों और कमज़ोरी को सहन करता हो।