ईराक के युवाओं से पोप : एक घायल दुनिया में मसीह की रोशनी और आशा बनें

पोप लियो 14वें ने अंकावा में एकत्रित ईराकी युवा ख्रीस्तीयों को विश्वास, प्यार और उम्मीद के मिशनरी बनने का प्रोत्साहन दिया, और उनसे कहा कि वे संघर्ष और अस्थिरता से भरी इस भूमि पर मसीह की रोशनी और शांति लानेवाले बनें।

ईराक के युवा 8 से 11 जुलाई तक अपनी वार्षिक युवा सम्मेलन के लिए एरबिल महाधर्मप्रांत के अंकावा में एकत्रित हैं, इस अवसर पर पोप लियो 14वें ने उन्हें आशा के मिशनरी के रूप में अपने काम को अपनाने का प्रोत्साहन दिया, और उनसे ऐसे देश में "ख्रीस्त की रोशनी" बनने की प्रेरणा दी जो अभी भी युद्ध और अस्थिरता के नतीजों का सामना कर रहा है।

मिशन विषयवस्तु पर सभा में भाग लेनेवाले युवाओं को एक वीडियो संदेश में पोप ने याद दिलाया कि आज कलीसिया के जीवन में उनकी एक महत्वपूर्ण भूमिका है।

पोप ने कहा, "कलीसिया का एक महत्वपूर्ण मिशन है ख्रीस्त की रोशनी बांटकर दुनिया की सेवा करना," और उन्होंने युवाओं को "आनेवाले सालों में कलीसिया — और दुनिया — को आकार देने" में मदद करने के लिए प्रोत्साहन दिया।

पहले कही गई अपनी बात को याद करते हुए, पोप लियो ने इस बात पर जोर दिया कि "युवा न सिर्फ कलीसिया के भविष्य हैं, बल्कि वर्तमान भी हैं।" और उस मुश्किल सच्चाई को पहचानते हुए जिसका सामना कई इराकी ख्रीस्तीय अभी भी कर रहे हैं, पोप मानते हैं कि सुसमाचार का साक्ष्य देना अक्सर मुश्किल होता है।

वे कहते हैं, "दुनिया में रोशनी बनना हमेशा आसान नहीं होता।" "आपको ऐसी परिस्थिति में यह रोशनी फैलाने के लिए बुलाया गया है जो अक्सर युद्ध और अस्थिरता से भरी है।"

डरो मत

फिर भी, वे उनसे हिम्मत न हारने का प्रोत्साहन देते हैं।
पोप लियो कहते हैं, "डरो मत! और यह मत सोचो कि तुम इस काम में अकेले हो। मैं तुम्हारे साथ हूँ; कलीसिया तुम्हारे साथ है। येसु पर भरोसा रखो।"

रोशनी की छवि को अपने विचारों के मार्गदर्शक धागे के रूप में इस्तेमाल करते हुए, वे तीन गुणों पर जोर देते हैं जो हर ख्रीस्तीय शिष्य को बनाना चाहिए: विश्वास, प्रेम और आशा।

सबसे पहले, वे बताते हैं कि प्रकाश हमें देखने में सक्षम बनाता है। इसलिए, विश्वास केवल जीवन की कठिनाइयों का जवाब नहीं है, बल्कि "वास्तविकता की पहचान और सच्चाई में जीना" है, जो विश्वासियों को दुनिया, दूसरों और खुद को ईश्वर की आंखों के माध्यम से देखने की अनुमति देता है। वे युवाओं को अपने जीवन जीने के तरीके के माध्यम से गवाही देने के लिए प्रोत्साहित करते हैं ताकि अन्य लोग भी उस सत्य और अर्थ की खोज कर सकें जो वे खोज रहे हैं।

पोप तब प्रकाश को गर्मजोशी के रूप में दर्शाते हैं, जो ईश्वर के प्रेम का प्रतीक है। उनका कहना है कि सच्चा मिशन, गतिविधि से नहीं बल्कि दैनिक प्रार्थना और संस्कारों, विशेषकर मेल-मिलाप संस्कार और पवित्र यूखरिस्त के माध्यम से पोषित, ख्रीस्त के साथ एक व्यक्तिगत मुलाकात से शुरू होता है।

अपनी जड़ें ईश्वर के प्रेम में स्थापित करें
पोप युवाओं से आग्रह करते हैं, "अपने हृदयों को अपने प्रति ईश्वर के प्रेम की ठोस नींव पर स्थापित करें।" "मसीह के हृदय को खोजें, और उनपर अपना जीवन बनाने से नहीं डरें।"

वे समझाते हैं कि केवल उस प्रेम से जुड़े रहकर ही वे अपने आस-पास के लोगों के साथ ईश्वर के प्रेम की गर्माहट और उनके मेलमिलाप की शक्ति की कृपा को साझा करने में सक्षम होंगे।

अंत में, पोप लियो 14वें प्रकाश को विकास और आशा के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करते हैं। वे कहते हैं, मेल-मिलाप के लिए तरस रहे क्षेत्र में, युवा ख्रीस्तीयों को शांति के निर्माता बनने के लिए बुलाया जाता है।

उन्होंने कहा, "आपको विशेष रूप से शांतिदूत बनने, अपने आस-पास के लोगों को एकजुट करने और दूसरों में स्थायी शांति द्वारा चिह्नित भविष्य की आशा पैदा करने के लिए बुलाया गया है।"

हालांकि वे हमेशा उन परिस्थितियों को कंट्रोल नहीं कर सकते जिनमें वे रहते हैं, फिर भी वे उन्हें याद दिलाते हैं, कि हमेशा अपने दिलों में "ख्रीस्त की शांति को राज करने देने" का विकल्प चुनें, जिससे वे पुनर्जीवित प्रभु से मिलनेवाली आशा के चिन्ह बन सकते हैं।

अपना संदेश समाप्त करते हुए, पोप लियो ने युवाओं को कलीसिया की माँ, मरियम के संरक्षण में सौंप दिया, और उन्हें अपने जीवन के लिए ईश्वर की प्रेम भरी योजना पर भरोसा करने का प्रोत्साहन दिया।

उन्होंने कहा, "ईश्वर की अच्छाई पर कभी शक न करें।" "ईश्वर ने आप प्रत्येक के जीवन के लिए जो योजना बनायी हैं, उससे नहीं डरें," फिर नबी येरेमियाह के वादे की याद दिलाते हुए कहा कि ईश्वर "आपको आशा भरा भविष्य देना चाहते हैं।"