फ्रातेल्ली तूत्ती का चौथा मिलन रोम में शुरू
लातीनी अमेरिका हेतु गठित परमधर्मपीठ और कैरेबियन धर्मध्यक्षीय सम्मेलन (सीएएलएएम) ने अमेरिका के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के सहयोग से फ्रेतेल्ली तूत्ती के सिनोडल मिलन- उत्तर-दक्षिणी सामाजिक पार्यावरण वार्ता का आयोजन रोम में किया जा रहा है, यह अमेरिकी महाद्वीप के संदर्भ में सामाजिक-पर्यावरण संकट से निपटने के लिए दक्षिण और उत्तर अमेरिका के हितैषियों का एक साथ आना है।
अमेरिका में हो रहे बड़े बदलावों पर बहुपक्षीय प्रतिक्रिया देने के मकसद से, उत्तर-दक्षिण सामाजिक-पर्यावरणीय वार्ता पर “फ्रातेल्ली तूत्ती की सिनोडल बैठक का चौथा सत्र इस हफ़्ते रोम में आयोजित किया जा रहा है।
लातीनी अमेरिका हेतु गठित परमधर्मपीठ और कैरेबियन धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने संयुक्त राज्य अमेरिका के धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के सहयोग से इस तीन दिवासीय बैठक का अयोजन किया है, जो 10-12 सितम्बर तक चलेगा।
इस मिलन में पूरे महाद्वीप के अहम मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित कराया जा रहा है, जिनमें शामिल हैं – कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास, मानवीय सम्मान, सामाजिक-पर्यावरणीय संकट का सामना- सामाजिक भाईचारा; सामुदायिक संगठन; और ऊर्जा परिवर्तन तथा इलाकों की सुरक्षा को एक जनसामान्य भलाई के तौर पर देखना है।
इस मिलन की शुरूआत बृहस्पतिवार को हुई, जिसमें यूएससीसीबी के सचिव अंतोनियो ग्रनादो ने वाटिकन रेडियो से अपनी मुलाकात में कहा कि मिलन का यह चौथा संस्करण विश्वपत्र फ्रतेल्ली तूत्ती के संदर्भ में है, जिसका प्रकाशन संत पापा फ्रांसिस ने 2020 में किया और जिसकी विषयवस्तुओं को संत पापा लियो अपने प्रथम विश्वपत्र मानिफीका ह्यूमानितास में आगे बढ़ा रहे हैं। इस मिलन में कलीसिया “श्रमिकों, सामाजिक अधिकारियों और व्यवासायिकों के दलों को एक सात लाने में समक्ष हुई है जिसमें इस बात पर विचार मंथन किया जा रहा है कि कलीसिया की सामाजिक शिक्षा को जनसामान्य के दैनिक जीवन में किस भांति प्रोत्साहित किया जाये, जहाँ हम एक साथ जीते हैं।”
लोगों का मिलन
ग्रनादो ने कहा कि सिनोडल मिलन के प्रवर्तकों ने मिलकर एक साथ कार्य किया है, “जिससे लोगों को एक साथ लाया जा सके, विशेषकर उन बातों के संबंध में जिन्हें हम वैश्विक रूप में देखते हैं,” खास तौर पर इस बात पर ध्यान देते हुए कि पश्चिमी गोलार्ध के समूह किस तरह मज़दूरी, आप्रवासन, पर्यावरण और “निश्चित रूप में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता” से जुड़े सवालों से निपटा सकते हैं।
जिल राउ, अमेरिकी धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के, न्याय और शांति के कार्यकारी निदेशक ने लोगों को एक साथ लाने के मुद्दे पर जोर दिया। “मैं सोचता हूँ कलीसिया इन मिलनों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। कलीसिया इन अहम वार्ताओं का आयोजन कर रही है। इसमें सिर्फ़ कलीसिया के लिए काम करने वाले लोग शामिल नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों और आम दुनिया के कई महत्वपूर्ण व्यक्तित्व भी हैं। हम एक साथ मिलकर उन साझा मूल्यों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं जिन्हें इन वार्ताओं में शामिल किया जा सके।”
विभाजित समाज में आम सहमति खोज
अमेरिका के संदर्भ में, राउ ने अमेरिकी समाज में बढ़ते विभाजन पर चिंता जताई। उन्होंने वार्ता में शामिल लोगों का ध्यान इस ओर आकर्षित कराया कि वे अनुभवों को सुनने और समझने की कोशिश करें, ताकि यह देखा जा सके कि कैसे साझा अनुभव “किसी ऐसी चीज़ की पहचान कर सकती है जो दोनों में एक जैसा हो।” उन्होंने कहा कि इन्हीं संबंधों के ज़रिए, “हम उन सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर कुछ हद तक उन मतभेदों या विरोधाभाव विचारों को सुलझा सकते हैं, जिससे विचारों की समानता में मिलकर कार्य किया जा सकें।”
ठोस कार्यों और सुझावों के संबंध में ग्रनादो ने अपनी भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि हमें जन सामान्यों के हितों, नियमों और दूसरों पक्षों की प्रभावकारिता हेतु लोगों को एकजुट करने की जरुरत है जिससे जनसामान्य की भलाई और मानवीज जीवन को सम्मान दिया जा सके। उन्होंने सामाजिक न्याय के संबंध में येसु ख्रीस्त की शिक्षा की ओर प्रतिभागियों का ध्यान आकर्षित करते हुए, संत पापा लियो 13वें के विश्वपत्र रेरूम नोभारूम में श्रम,प्रार्यावरण और प्रकृति पर दिये गये महत्व पर प्रकाश डाला।
चौथी “फ्रातेल्ली तूत्ती” सिनोडल मिलन का मकसद “सामाजिक वार्ता के ज़रिए भाईचारे को बढ़ावा देना है, जिसके लिए “अलग-अलग संकायों में सहयोग हेतु उत्तर-दक्षिण साझा ज़िम्मेदारी कार्यक्रम” की शुरूआत की जायेगी।”
शनिवार को, इस कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों को प्रेरितिक निवास में संत पापा लियो 14वें के संग निजी तौर पर भेंट करने का मौका मिलेगा।
