पोप : ईश्वर से मिलन हेतु अपना हृदय खुला रखें
पोप लियो ने सीक26 सम्मेलन में अमेरीकी युवाओं को अपना संदेश प्रेषित करते हुए उन्हें येसु के मिलन हेतु अपना हृदय खुला रखने का आहृवान किया।
पोप लियो 14वें ने ओहियो, टेक्सास और कोलोरोडो में एक साथ चल रहे सीक26 सम्मेलन के युवाओं को अपना संदेश प्रेषित किया।
युवाओं को अपने दिये गये संदेश में पोप लियो ने कहा कि हमारे जीवन में प्रेरितिक उत्साह येसु के संग असल मुलाकात से होती है, यह एक ऐसी खुशी है जिसे हम अपने शब्दों में साक्षा नहीं कर सकते हैं।
पोप ने येसु के प्रथम शिष्यों का येसु के संग मुलाकात की बातों पर, जो संत योहन के सुसमाचार के प्रथम अध्याय में वर्णित है, जहाँ योहन बपतिस्ता के शिष्य “देखो ईश्वर का मेमना” कहे जाने पर येसु का अनुसरण अति शीघ्रता में करते हैं, कहा, “प्रिय युवाओं, आप क्या खोजते हैंॽ आप इस सम्मेलन में क्यों आये हैंॽ”
अपने इन सवालों के द्वारा पोप ने युवाओं का ध्यान येसु की ओर आकर्षित कराया जो हमारे अशांत हृदय को जानते हैं। उन्होंने कहा, “ये वो शब्द हैं जिसे येसु ने अपने पीछे आने वाले शिष्यों से पूछा था।” उनके ये सावल आज भी हमें अपने हृदय में झांककर देखने और अपनी चाहतों की परख करने की चुनौती देते हैं।” ऐसे सवाल हमें सोचने में मजबूर करते, और हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
येसु में जवाब
पोप ने युवाओं को कहा कि इसका जवाब हमें एक व्यक्ति में मिलता है। वे हमारे लिए येसु ख्रीस्त हैं जिनमें हम सच्ची शांति और खुशी अपने हृदय की पूर्ण चाहत को पूरा होते पाते हैं। “इस सम्मेलन में आप को भी येसु से मिलने का अवसर प्राप्त होगा, कुछ लोगों को प्रथम शिष्य अंद्रेयस की भांति पहली बार येसु से मिलने का अवसर होगा। “आप इस भेंट हेतु अपने को खुला रखें।”
अपने संदेश में पोप ने युवाओं से आगे कहा कि दो शिष्य येसु के पास थोड़े समय के लिए रहे लेकिन उस मिलन में उन्हें बदल दिया। अंद्रेयस अपने भाई सिमोन से कहता है कि उन्होंने मसीह को पा लिया है दूसरे शब्दों में हमें जिस व्यक्ति को खोज रहे थे वह हमें मिल गये हैं। संत पापा ने कहा, “यह पद हमें प्रेरिताई के अर्थ को व्यक्त करता है। प्रेरितिक उत्साह ईश्वर से मिलन में हो शुरू होती है, जहाँ हम उस मिलन की सच्ची खुशी को दूसरों के संग साझा करने में पीछे नहीं रहते हैं।
येसु से मिलें
पोप ने युवाओं से कहा कि येसु धर्मविधियों, संस्कारों, आराधना और एक साथ रहने में हम से मिलने आते हैं। “आप उनसे यह पूछने से न डरें कि वे किस लिए आपको बुलाते हैं।” उन्होंने युवाओं पर बुलाहटीय बीज को पनपने की ओर इंगित कराते हुए कहा कि आप भी अंद्रेयस और सिमोन पेत्रुस की भांति उनके कार्यों को आगे बढ़ने, ईश प्रजा के संग चलने के लिए बुलाये जायेंगे। यदि आप ईश्वर के द्वारा बुलाये जाने का अनुभव करते हैं तो आप भयभीत न हों। संत पापा ने पुनः इस बात को जोर देते हुए कहा, “सिर्फ ईश्वर आप के हृदय की गहरी भावनाओं, इच्छाओं को जानते हैं, वह मार्ग आप को सच्ची पूर्णतः की ओर ले चलेगा, आप उनके द्वारा अपने को संचालित होने दें।
मरियम के पर्व दिवस को शुरू हुई सम्मेलन की याद दिलाते हुए पोप ने कहा कि आइए हम उन्हें अपने को अपने बेटे, येसु मसीह तक ले जाने दें, ताकि हम उन्हें सच में जान सकें, उन्हें प्रेम कर सकें और हमारे लिए उनकी योजना को अनुभव कर सकें। इस तरह, हमारे दिलों को सचमुच उसमें आराम मिलेगा जिसे हम ढूंढ रहे हैं।
फेलोशिप ऑफ़ कैथोलिक यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स (FOCUS) द्वारा स्पॉन्सर किया जाने वाला वार्षिक सम्मेलन सीक26 युवाओं के लिए पाँच दिवसीय एक कार्यक्रम है जहाँ हज़ारों काथलिक युवा प्रार्थना, आराधना, संस्कारों और प्रेरणा देने वाले वक्ताओं के ज़रिए ख्रीस्त से अपने मिलन का अनुभव करने हेतु एक साथ आते हैं।
26वें सीक सम्मेलन में 25,000 से ज़्यादा युवा हिस्सा ले रहे हैं, जो इस सप्ताह, 1-5 जनवरी तक अमेरीका के कोलोंबस, ओहियो, टेक्सास और कोलोरोडो तथा फोर्ट वर्थ शहरों में हो रहा है।