मानव प्रतिष्ठा एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमारे युग के महाप्रश्न

अंतर्राष्ट्रीय काथलिक विधायक नेटवर्क के 17 वें वार्षिक सम्मेलन के प्रतिभागियों का अभिवादन कर पोप लियो 14 वें ने कहा कि मानव प्रतिष्ठा एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमारे युग के महाप्रश्न हैं जिन्हें परिभाषित किया जाना तथा समझा जाना नितान्त आवश्यक है।

वाटिकन में शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय काथलिक विधायक नेटवर्क के 17 वें वार्षिक सम्मेलन के प्रतिभागियों का अभिवादन करते हुए पोप लियो 14 वें ने कहा कि मानव प्रतिष्ठा एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमारे युग के महाप्रश्न हैं जिन्हें परिभाषित किया जाना तथा समझा जाना नितान्त आवश्यक है।

महान चुनौती
अंतर्राष्ट्रीय काथलिक विधायक नेटवर्क के संरक्षक कार्डिनल क्रिस्टोफ शोनबॉर्न, कार्डिनल बेखरा बुत्रोस राय तथा कार्डिनल चार्ल्स माओंग बो के नेतृत्व में सन्त पापा लियो 14 वें से साक्षात्कार हेतु रोम आये विधायकों का सन्त पापा ने भावपूर्ण स्वागत किया और कहा कि हालांकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता नवीन अवसर प्रदान करती है तथापि इस युग के लिये यह एक महान चुनौती है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रौद्योगिक प्रगति एक नैतिक प्रश्न से मानवता का सामना करवाती है और वह सिर्फ यह नहीं कि हम क्या कर सकते हैं? बल्कि यह कि हमें क्या करना चाहिये? वास्तव में, आज मानव परिवार एक निर्णायक चुनाव का सामना कर रहा है। अपने विश्व पत्र मानिफिका ऊमानितास का उल्लेख कर सन्त पापा ने कहा कि इस पत्र में मैंने लिखा है कि हम एक नई बाबुल की मीनार बनाने के प्रलोभन में पड़ सकते हैं, जहाँ शक्ति, प्रभावकारिता और नियंत्रण  मनुष्य के चेहरे को छिपा दें; या फिर हम एक ऐसी सभ्यता का निर्माण कर सकते हैं जिसमें प्रौद्योगिकी प्रत्येक मानव के अखण्ड विकास में मदद प्रदान करे।    

विकास का लक्ष्य   
पोप ने कहा कि प्रौद्योगिक प्रगति और तकनीकी विकास का लक्ष्य प्रत्येक व्यक्ति की अलंघनीय गरिमा, सामान्य भलाई, वस्तुओं की सार्वभौमिक नियति, सहायकता और एकजुटता के लिए काम करते हुए विवेक हेतु सुनिश्चित मानदंड प्रदान करना होना चाहिये।

पोप ने कहा कि जनकल्याण के लिये ज़िम्मेदार विधायकों का कार्य तकनीकी के प्रशासन हेतु उपयुक्त नीतियाँ तैयार करना तथा नवीनता में रुकावटें उत्पन्न करने के बजाय इसे समझदारी से मार्गदर्शन प्रदान करना होना चाहिये। उन्होंने कहा कि सुदृढ़ विधान को वैज्ञानिक एवं तकनीकी रचनात्मकता को प्रोत्साहन देना चाहिये और साथ ही मूलभूत मानवाधिकारों एवं स्वतंत्रता की रक्षा करनी चाहिए। इसे उपभोगकर्त्ताओं को शोषण से बचाना चाहिए, व्यक्तिगत गोपनीयता और पारदर्शिता को सुनिश्चित्त करना चाहिए तथा यह गारंटी देनी चाहिए कि यह लोकतांत्रिक संस्थाओं को मज़बूत करे। उन्होंने कहा कि इसके लिए ज़रूरी है, “सुदृढ़ कानूनी संरचना, स्वतंत्र निगरानी, ​​जानकार उपभोगकर्त्ता और एक ऐसा राजनैतिक निकाय जो अपनी ज़िम्मेदारी से पीछे न हटे” (मानिफिका ऊमानितास, अँक 106)

नवीनीकरण नकारात्मक न बनें
इस बात की ओर पोप ने ध्यान आकर्षित कराया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थात् आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के द्रुत विकास से तकनीकी पर निर्भरता के नए रूप पैदा होने का ख़तरा है, जिसमें निर्धन देश अमीर देशों पर निर्भर होते जा रहे हैं। इस सन्दर्भ में, उन्होंने कहा कि हमें सावधान रहना होगा कि नवीनीकरण वैचारिक या आर्थिक उपनिवेशवाद का एक और ज़रिया न बन जाए।  

कलीसिया का प्रस्ताव     
पोप ने कहा, दुर्भाग्यवश, जब एल्गोरिदम यह तय करते हैं कि कौन दिखेगा और कौन गायब रहेगा, जब डिजिटल प्लेटफॉर्म बिना किसी जवाबदेही के जन-सम्वाद को आकार देते हैं और जब श्रमिकों के सम्मान को प्रणालियों के अनुकूलन के समक्ष दबा दिया जाता है, तो हमें प्रभुत्व का एक सूक्ष्म रूप देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि सत्ता की इस संस्कृति के विरुद्ध कलीसिया प्रेम की संस्कृति का प्रस्ताव रखती है, ऐसी संस्कृति जो, विवेकपूर्ण ढंग से, कृत्रिम बुद्धिमत्ता को प्रशासित कर उदारता, दया और ज़िम्मेदारी के काबिल दिलों को परिपोषित करे। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रेमपूर्ण समाज में मानवता की पहली पाठशाला परिवार है, जिसे किसी भी परिस्थिति में कमज़ोर नहीं किया जाना चाहिये।  

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