सीबीसीआई अध्यक्ष कार्डिनल पूला ने स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और न्याय की रक्षा का आह्वान किया

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन (सीबीसीआई) के अध्यक्ष कार्डिनल एंथनी पूला ने अपने स्वतंत्रता दिवस के संदेश में भारत के नागरिकों से अपील की है कि वे आजादी, न्याय, समानता, मानव प्रतिष्ठा और देश के संवैधानिक मूल्यों की सुरक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता को पुनः प्रकट करें।

स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करते हुए, कार्डिनल पूला ने कहा कि भारत की बड़ी मुश्किल से मिली आजादी को सिर्फ याद ही नहीं रखना चाहिए, बल्कि “हर नागरिक के लिए उसका सम्मान, सुरक्षा और बचाव किया जाना चाहिए।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश की ताकत यह तय करने में नहीं है कि कौन सा धर्म बड़ा है, बल्कि हर इंसान की इज्जत बनाए रखने और ऐसा समाज बनाने में है जहाँ कोई पीछे न छूटे।

सीबीसीआई अध्यक्ष ने 15 अगस्त को जोर दिया कि सच्ची आजादी का मतलब मानवता, न्याय, समानता और गरीबों, पिछड़ों एवं दबे-कुचले लोगों का विकास होना चाहिए। उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में ईसाई समुदाय के लोगों के साथ हो रही हिंसा, जुल्म, धमकी और मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर भी गहरी चिंता जताई।

कार्डिनल पूला ने कहा, “हर नागरिक को बिना डर जीने, पूजा और सेवा करने का अधिकार है।” उन्होंने सरकार एवं सभी अधिकारियों से अपील की कि वे इस संवैधानिक आजादी की रक्षा करें और जहाँ भी इसका उल्लंघन हो, वहाँ न्याय सुनिश्चित करें।

देश के लिए ईसाई समुदाय के योगदान पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा कि ख्रीस्तीय ने पीढ़ियों से शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, समाज सेवा और मानवीय मदद के माध्यम से भारत की सेवा की है, खासकर, गरीबों और कमजोर लोगों के बीच।

इस संदर्भ में, कार्डिनल पूला ने सरकार से आदरपूर्वक प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक को रद्द करने की अपील की, और चिंता जताई कि इस के नियम असली चैरिटेबल संस्थाओं को भारत के लोगों के लिए अपनी मानवीय सेवा जारी रखने से गंभीर रूप से रोक सकते हैं।

संदेश के अंत में सीबीसीआई अध्यक्ष ने सभी नागरिकों का आह्वान किया कि वे देश के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट करें, जहाँ स्वतंत्रता का सम्मान हो, विविधता को स्वीकार किया जाए, न्याय को बढ़ावा मिले और हरेक व्यक्ति के साथ सम्मान से वर्ताव किया जा सके।  

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