राँची में त्रिदिवसीय आध्यात्मिक साधना, शांति के लिए प्रार्थना
चालीसा काल की तैयारी के रूप में राँची महाधर्मप्रांत के लोयोला मैदान में 13, 14 और 15 मार्च को, तीन दिवसीय आध्यात्मिक साधना का आयोजन किया गया है। जिसके मुख्य उपदेशक हैं मातृधाम के माननीय फादर अनिल देव आई. एम. एस.।
अमरीका और इस्राएल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमले के बाद पूरी दुनिया की बिगड़ती हालात के बीच पोप लियो 14वें के साथ भारतीय कलीसिया के चरवाहों ने एक स्वर में सभी विश्वासियों का आह्वान किया है कि वे युद्धविराम एवं शांति की पुनःस्थापना के लिए प्रार्थना और उपवास करें। संयोगवश, ऐसे ही समय में राँची महाधर्मप्रांत में तीन दिवसीय आध्यात्मिक साधना का आयोजन किया गया है जिसमें विश्वासी भारी संख्या में भाग लेकर अपने ख्रीस्तीय विश्वास को मजबूत कर रहे हैं और साथ ही विश्व शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।
राँची के महाधर्माध्यक्ष विंसेन्ट आईंद ने शुक्रवार को आध्यात्मिक साधना का उद्घाटन करते हुए विश्वासियों का स्वागत किया एवं याद दिलाया कि हम सभी ने बपतिस्मा संस्कार लिया है जिसके द्वारा हम बराबरी के हिस्सेदार हैं लेकिन पाप के कारण इस कृपा को खो देते हैं। उन्होंने आत्मिक साधना को ख्रीस्तीय जीवन में नई शक्ति, नया मोड़ और नई मजबूती पाने का साधन बतलाया।
उन्होंने आध्यात्मिक साधना के शुरू में कहा, “आज से तीन दिनों तक हम अपने आपको उस रूप में ईश्वर के लिए प्रस्तुत करेंगे जिसमें पवित्र आत्मा हम पर हावी हो, पवित्र आत्मा हमें फिर से अपना बना ले, पवित्र आत्मा हमें फिर से अभियांजित करे, पवित्र आत्मा हमारे ख्रीस्तीय स्वभाव को बल दे, मजबूती दे और हमें हमारे गलत राहों से फिर से वापस सही मार्ग पर ले आये।”
आध्यात्मिक साधना का मूल विषय है, “अपने प्रभु ईश्वर की सेवा करो और वह तुम्हें आशीर्वाद देगा।” (निर्गमन 23:25)
पहले दिन की शुरूआत क्रूस रास्ता, दीप प्रज्वालन और पवित्र जल के छिड़काव के साथ किया गया।
पवित्र मिस्सा का अनुष्ठान क्रमशः, प्रथम दिन गुमला के धर्माध्यक्ष माननीय लिनुस पिंगल एक्का, दूसरे दिन हजारीबाग के धर्माध्यक्ष माननीय आनन्द जोजो और तीसरे एवं अंतिम दिन राँची के महाधर्माध्यक्ष महामहीम विंसेट आईंद कर रहे हैं।
भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष महाधर्माध्यक्ष फिलीप नेरी कार्डिनल फेराओ और राँची महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विसेंट आईंद द्वारा 5 मार्च को जारी विज्ञप्ति में कहा गया था कि मध्य पूर्व में बढ़ती अशांति और हिंसा के इन दिनों में, विशेषकर ईरान और पड़ोसी देशों के बीच हालिया शत्रुता के संदर्भ में, भारत की पूरी लैटिन कलीसिया को शांति के लिए प्रार्थना में एकजुट होने के लिए ईमानदारी से आमंत्रित किया जाता है।
जिसके तहत 8 मार्च से 14 मार्च तक प्रत्येक दिन शांति के लिए पवित्र रोजरी माला विन्ती करने और 13 मार्च को उपवास एवं प्रार्थना का दिन मनाने की सलाह दी गई थी।
फादर अनिल देव आईएमएस, जिन्हें एक लोकप्रिय उपदेशक के रूप में जाना जाता है अपने उपदेश में कहा, “पूरी बाईबिल हमें सिखाती है कि हमारा ईश्वर हमें प्यार करनेवाला ईश्वर है। हमारी सारी दुर्बलताओं के बावजूद हमारी सारी कमियों के बावजूद, हमें प्रेम करनेवाला ईश्वर है...उसी परमेश्वर के सामने अपना हृदय खोलें...अपने प्रभु पर भरोसा रखें वह तुम्हारी रक्षा करेगा। ईश्वर के लिए कुछ भी असंभव नहीं है ईश्वर बहते पानी को रोक सकता है ईश्वर गरजते समुद्र को दो भागों में बांट सकता है, ईश्वर आकाश के शून्यता से क्या क्या नहीं दे सकता है। इसलिए अपना हृदय खोलिये। चिंता मत कीजिए और अपने जीवन को समर्पित कीजिए।”
अमरीका और इस्राएल की ईरान के साथ युद्ध जारी है जैसे जैसे युद्ध आगे बढ़ रहा है इसका असर दुनिया में दिखाई पड़ रहा है।
मध्यपूर्व में लड़ाई के करीब 10 दिन से ज्यादा हो गए हैं, और इस इलाके के लाखों बच्चों के लिए हालात बहुत खराब होते जा रहे हैं। 5 मार्च को इस्राएली सेना के खाली करने के आदेश जारी करने के बाद से बेरूत के दक्षिणी इलाकों के लोग हजारों की संख्या में भाग रहे हैं। इस्राएल के वित्तमंत्री बेजलेल स्मोट्रिच ने चेतावनी दी है कि ये इलाके जल्द ही गज़ा पट्टी के तबाह हुए शहर "खान यूनिस" जैसे दिखेंगे।
धर्माध्यक्षों ने चिंता जतायी है कि भारत के हमारे कई भाई-बहन मध्यपूर्व के विभिन्न देशों में रह रहे हैं और काम कर रहे हैं। उनमें से कई दूर रहकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं और कलीसिया के जीवन तथा हमारे राष्ट्र के लिए उदारतापूर्वक योगदान देते हैं।