यूएआरडब्ल्यूए प्रमुख ने गज़ा और नजरें फेर लेने पर बात की

संयुक्त राष्ट्र के राहत एवं कार्य एजेंसी के महासचिव, फिलिप लाजारिनी ने वाटिकन न्यूज से बात करते हुए पोप लियो 14वें के साथ अपनी मुलाकात एवं फिलीस्तीन में मानवीय संकट गहराने पर बात की।

फिलिस्तीन शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र के राहत एवं कार्य एजेंसी (यूएआरडब्ल्यूए) के कमिश्नर-जनरल फिलिप लाजारिनी ने सोमवार सुबह पोप लियो 14वें से मुलाकात की। उसके बाद उन्होंने बतलाया, “हमने इस पर चर्चा की कि संयुक्त राष्ट्र की राहत एवं कार्य एजेंसी क्या करती है, बल्कि इस पर भी बात हुई कि अगर उसे ऐसा करने से रोका गया तो क्या होगा।”

उन्होंने वाटिकन न्यूज़ से मुलाकात, साथ ही फिलिस्तीन में मानवीय संकट और दुनिया की नैतिक जिम्मेदारी के बारे बात की, जो इसे नजरअंदाज कर रही है।

पोप लियो 14वें से मुलाकात
लाजारिनी ने बतलाया कि पोप लियो के साथ मुलाकात के दौरान बातचीत में गज़ा, वेस्ट बैंक एवं पूर्वी येरूसालेम की तेजी से बिगड़ती स्थिति पर ध्यान केंद्रित किया गया। साथ ही, एक ऐसे झगड़े के बड़े क्षेत्रीय नतीजे पर भी बात हुई जिसके हल का कोई संकेत नहीं दिख रहा है। उन्होंने आगे कहा कि बातचीत के केंद्र में जमीनी स्तर पर यूएआरडब्ल्यूए की भूमिका थी।

उन्होंने कहा, “हमने इसपर बात की कि गज़ा और वेस्ट बैंक की मदद करनेवाली एजेंसियाँ अचानक रोक दी जाएँ और अगर इसका कोई सही विकल्प न मिलें, तो इसका क्या मतलब होगा," उन्होंने समझाया कि ऐसा विकल्प सिर्फ "काबिल और मजबूत" फिलिस्तीनी संस्थाएँ ही हो सकती हैं।

‘अस्थायी’ और ‘अस्थायित्व’ का असर
संयुक्त राष्ट्र के राहत एवं कार्य एजेंसी को सत्तर साल पहले एक अस्थायी उपाय के तौर पर बनाया गया था, एक मानवीय पुल के रूप में जिसे सिर्फ तब तक बना रहना था जब तक कोई राजनीतिक समाधान नहीं मिल जाता। लाजारिनी कहते हैं कि इसका लगातार बने रहना, संस्थाओं की नाकामी का नहीं, बल्कि राजनीतिक गैर-मौजूदगी का सबूत है।

वे बताते हैं, “सदस्य देशों में यह सोच थी कि इस झगड़े को सुलझाने में उन्हें बस कुछ ही साल लगेंगे।” “अगर यूएआरडब्ल्यूए आज भी एक अस्थायी लेकिन लंबे समय तक चलनेवाले संगठन के तौर पर मौजूद है, तो ऐसा इसलिए है क्योंकि सात दशकों से ज्यादा समय से, अंतरराष्ट्रीय समुदाय फिलिस्तीनी लोगों की बुरी हालत और इज्राइल-फिलिस्तीन झगड़े का कोई पक्का राजनीतिक हल नहीं ढूंढ पाई है।”

समय के साथ, एजेंसी का काम बदला है। लाजारिनी बताते हैं, “पिछले कुछ दशकों से, संयुक्त राष्ट्र की राहत एवं कार्य एजेंसी मुख्य रूप से एक मानव विकास संगठन रहा है, जो ऐसी चीजें उपलब्ध कराता है जो एक देश आम तौर पर अपने लोगों को देता है: शिक्षा और आरम्भिक स्वास्थ्य देखभाल।”

काम करनेवाली प्रणाली पर गर्व
वे बताते हैं कि यूएआरडब्ल्यूए ने सामान्य माहौल बनाने की कोशिश की है, यहाँ तक कि जहाँ अधिकार और अवसर सीमित हैं। वे कहते हैं, “फिलिस्तीनी शरणार्थी जहाँ रहते हैं, उसके आधार पर उन्हें रोजो-रोटी तक पहुँचने से रोका गया होगा,” उन्होंने लेबनान में लंबे समय से चली आ रही पाबंदियों और गाजा पर लगाए गए बंद का जिक्र किया।

लाजारिनी कहते हैं कि इससे निर्भरता बढ़ी है, खासकर, जब मानवीय संकट सामने आया है, और यह निर्भरता किसी की इज्जत पर असर डालती है। लेकिन साथ ही, वे कहते हैं कि कई फिलिस्तीनी शरणार्थियों को यूएआरडब्ल्यूए के एजुकेशन सिस्टम पर बहुत गर्व है।

लाजारिनी जोर देकर कहते हैं कि शिक्षा को छुआ तक नहीं गया है। "जमीन छीन ली गई है। घर छीन लिए गए हैं। लेकिन शिक्षा कभी भी नहीं छीनी गई है।" "यह हमेशा गर्व और बेहतर भविष्य की उम्मीद रही है।"

'सामान्य होने' सिखाना
उस उम्मीद की अब पहले से कहीं अधिक परख हो रही है, और वे मानते हैं कि बमबारी, विस्थापन और नुकसान के बीच बड़ी हो रही पीढ़ियों को सामान्य होना और उम्मीद सिखाना एक बहुत बड़ी चुनौती साबित हो रही है।

लाजारिनी कहते हैं कि गज़ा में बच्चे लगभग दो साल से रोजाना, बहुत ज्यादा तबाही झेल रहे हैं। “उन सभी ने अपने रिश्तेदार खो दिए हैं। कई खुद घायल हो गए हैं। उन्होंने दोस्त खो दिए हैं।” वे हमें याद दिलाते हैं कि ये वे बच्चे हैं जिन्हें दशकों तक “मानवाधिकारों की विश्वव्यापी अहमियत” सिखाई गई - सिर्फ यह देखने के लिए कि जब उनके लिए अधिकार की बात आयी तो “उनकी खुलेआम अनदेखी की गई।”

वे कहते हैं, “मुझे कहना होगा, यह बहुत मुश्किल है।” और फिर भी, वे आगे कहते हैं, “हम हार नहीं मान सकते।” “अभी, हमारे पास लाखों लड़के और लड़कियाँ मलबे में रह रहे हैं, बहुत ज्यादा सदमे में हैं, जिन्हें सीखने के माहौल में वापस जाने की जरूरत है।”

वे चेतावनी देते हैं कि पुनःनिर्माण का इंतजार करना बहुत बुरा होगा। वे समझाते हैं, “हमें अभी से सीखने की पुनः शुरूआत करने के तरीके खोजने होंगे, नहीं तो, हमारी एक खोई हुई पीढ़ी होगी”, और इसके नतीजे गज़ा से कहीं आगे तक फैल सकता है। लाजारिनी कहते हैं, “अगर हम इस पीढ़ी को खो देते हैं, तो हम भविष्य में और ज्यादा अतिवाद के बीज बोएंगे।”

यूएन राहत एवं कार्य एजेंसी के लिए फंड
लेकिन, यह एजेंसी कुछ दानदाता देशों के फैसलों से असहज महसूस करती है। कुछ लोग आम लोगों की जान के लिए गहरी चिंता जताते हैं, जबकि उसी समय एजेंसी के लिए अनुदान रोक देते हैं या उसकी शर्तें तय कर देते हैं। लाजारिनी पूछते हैं, "आप इंसानों की तकलीफ कम करने के अपने वादे को इस बात के साथ कैसे जोड़ते हैं कि आप यूएन राहत एवं कार्य एजेंसी जैसे संगठन के जरिए पैसे भेजने से मना कर रहे हैं - जिसकी गज़ा में सबसे बड़ी पहुँच है और जो शिक्षा एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य का मुख्य प्रदाता है?"