याजकवर्ग और विश्वासी आशा के साक्षी बनें, कार्डिनल पारोलीन

कुवैत में गुरुवार को वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पियेत्रो पारोलीन ने उत्तरी अराबिया में सेवारत काथलिक पुरोहितों, धर्मसमाजियों एवं धर्मसंघियों से मुलाकात की तथा उन्हें आमंत्रित किया कि वे कुवैती समाज में आशा साक्षी बनें।

अहमदी का मरियम गिरजाघर   
15 और 16 जनवरी को वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पारोलीन ने कुवैत की प्रेरितिक एवं कूटनैतिक यात्रा की जिसके दौरान उन्होंने अहमदी में आर लेड़ी ऑफ अराबिया मरियम गिरजाघर का अनुष्ठान कर उसे माइनर बेसिलिका का दर्जा प्रदान किया तथा ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

कुवैत में प्रेरितिक सेवा कर रहे याजकवर्ग को सम्बोधित शब्दों में कार्डिनल पारोलीन ने सन्त पापा लियो की ओर से उनका अभिवादन किया तथा स्वदेश से दूर एवं मुश्किल हालत में उनकी सेवाओं के धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने उन्हें स्मरण दिलाया की पौरोहित्य एवं समर्पित जीवन प्रभु ख्रीस्त के साथ उनके सम्बन्ध में मूलबद्ध रहा करता है।

प्रभु विनम्र हृदयों को खोजते
पुरोहितों का हौसला बढ़ाते हुए कार्डिनल ने कहा, “प्रभु सिद्ध पुरोहितों को नहीं, बल्कि विनम्र हृदयों को खोजते हैं। ऐसे पुरोहित जो “प्रेम के पुरोहित होते हैं, पूर्णता के नहीं; पुरोहित जो खुश हैं क्योंकि हम जानते हैं कि प्रभु ने हमें चुना है और हमसे प्रेम किया है।”

सन्त पापा के निमंत्रण को दुहराते हुए कार्डिनल पारोलीन ने कहा, आप अपने समर्पित जीवन को सुसमाचार के नज़रिये से जियें जो सिखाता है कि हम मांगें, खोजें और खटखटायें।  

शांति के पैगम्बर बनें
सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता वाले कुवैत जैसे देश में, उन्होंने वहां मौजूद सभी लोगों से “शांति और एकता के पैगंबर” बनने की अपील की, और कहा, “आपका मिशन येसु मसीह में सच्चा भ्रातृत्व भाव और एकता दिखाना है।”

ख्रीस्तयाग प्रवचन में कार्डिनल महोदय ने कुवैत के काथलिक समुदाय तथा वहाँ व्याप्त समस्त ख्रीस्तीयों के प्रति सन्त पापा लियो 14 वें की समीपता व्यक्त की। मरियम महागिरजाघर को माईनर बेसिलिका का दर्ज़ा प्रदान किये जाने के सन्दर्भ में उन्होंने कहा कि यह “उत्तरी अराबियाई देशों में रहने वाले ख्रीस्तीयों की प्रभु की माता पवित्र कुँवारी मरियम के प्रति गहरी भक्ति” को मान्यता देता है।

प्रामाणिक मिलन स्थल
रेगिस्तान और समुद्र के बीच स्थित कुवैत का विचार कर कार्डिनल पारोलीन ने इसे बाइबिल के मुक्ति इतिहास का हिस्सा और आज भी अर्थगर्भित संकेत के रूप में याद किया। माईनर बेसिलिका को उन्होंने “विश्वव्यापी और अंतरधार्मिक संवाद का एक प्रामाणिक मिलन स्थल, एक सुरक्षित आश्रय,  तथा शांति और सद्भाव का स्थान” निरूपित किया।

उन्होंने भक्त समुदाय को याद दिलाया कि ईश्वर का सच्चा मंदिर सबसे पहले भक्तों के जीवन में  पाया जाता है। उन्होंने कहा, “इस मंदिर का यथार्थ मतलब इसकी पत्थर की दीवारों में नहीं, बल्कि इसके ज़िंदा पत्थरों में है, जो यहाँ एकत्र भक्तों में प्रदर्शित होता है।”

ख्रीस्तयाग समारोह के बाद ख्रीस्तीय एकता सप्ताह को दृष्टिगत रखकर कार्डिनल पारोलिन ने खाड़ी में मौजूद अलग-अलग ईसाई समुदायों के प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिस तरह ईसाई “एक-दूसरे का स्वागत और सम्मान करते हुए” एक साथ रहते हैं, वे सम्पूर्ण समाज के लिए एक मिसाल बना रहेंगे।