मणिपुर में ख्रीस्तीयों की हत्या की निन्दा

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षों ने संघर्ष प्रभावित उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर में तीन आदिवासी ईसाई नेताओं की बेरहमी से हत्या की कड़ी निन्दा की है, जहाँ नित्य बढ़ते बंधक संकट ने तनाव को और गहरा कर दिया है।

धर्माध्यक्षों का वकतव्य
बुधवार 13 मई को भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने एक वकतव्य प्रकाशित कर इन हत्याओं की निन्दा करते हुए कहाः “हम धार्मिक नेताओं के खिलाफ किए गए इस घृणित कृत्य की कड़ी निंदा करते हैं, जो सामाजिक अशांति के इस मुश्किल समय में आशा और शक्ति का एक अहम ज़रिया बने हुए हैं।”   

धर्माध्यक्षों ने कहा कि वे 13 मई को एक हमले में थादो बैपटिस्ट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट, कुकी लोगों में सबसे वरिष्ठ पादरी वुमथांग सितल्हो और एक पादरी सहित कुकी चर्च के दो वरिष्ठ धार्मिक नेताओं की हत्या से “बहुत दुखी” हैं।

बंदूकधारियों ने पादरियों पर तब हमला किया जब वे चुराचांदपुर जिले में एक धार्मिक सभा में शामिल होने के बाद कांगपोकपी शहर लौट रहे थे। इस हमले में पांच अन्य लोग भी घायल हुए हैं।

मणिपुर में लड़ रहे समूहों के बीच शांति की अपील करते हुए धर्माध्यक्षों ने कहा, “हिंसा सिर्फ़ ज़ख्मों को गहरा करती है, दुख को बढ़ाती है, और हमारे समुदायों को जोड़ने वाले रिश्तों को कमज़ोर करती है।”

मणिपुर में ईसाई एकता पर ख़तरा
म्यांमार की सीमा से लगे मणिपुर में मई 2023 से मुख्य रूप से आदिवासी ईसाई कुकी समुदायों और मुख्य रूप से हिंदू मेइतेई समुदाय के बीच जातीय हिंसा फैली हुई है। इस हिंसा में 260 से अधिक लोग मारे गए हैं, सैकड़ों घायल हुए हैं और 60,000 से अधिक लोग बेघर हो गए हैं। अब दो बड़े आदिवासी ईसाई समुदायों – कुकी और नागा – के बीच नई हिंसा भड़क गई है, जिससे राज्य में ईसाई एकता टूटने का ख़तरा उत्पन्न हो गया है।

इम्फाल के महाधर्माध्यक्ष लीनस नेल्ली ने सभी संघर्षरत दलों से वार्ता और शांति की अपील की है। उन्होंने आग्रह किया कि वे “हर तरह की हिंसा और बदले की कार्रवाई से बचें” तथा वार्ता, क्षमा, सुलह, संयम और शांतिपूर्ण तरीकों से झगड़ों को समाप्त करें।

महाधर्माध्यक्ष नेल्ली ने सरकार से “समझदारी, निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ काम करने” का भी आग्रह किया ताकि न्याय के साथ शांति बनी रहे और समुदायों के बीच भरोसा वापस आ सके।