पापुआ न्यू गिनी में शनिवार को पोप फ्राँसिस ने दशकों से जारी जनजातीय संघर्षों को समाप्त करने का आह्वान किया तथा इसके प्राकृतिक संसाधनों के धारणीय दोहन एवं समतापूर्ण विकास की अपील की। इस यात्रा के दौरान उन्होंने महिलाओं के खिलाफ हिंसा की समस्या पर भी चिन्ता व्यक्त की।
पापुआ न्यू गिनी के लोग बड़ी उत्सुकता से पोप फ्राँसिस के दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो पोप फ्राँसिस की एशिया और ओशिनिया की दो सप्ताह की प्रेरितिक यात्रा का दूसरा चरण है।
पोप फ्राँसिस की पापुआ न्यू गिनी की प्रेरितिक यात्रा का प्रसारण करने वाले स्थानीय प्रसारकों में रेडियो मरिया भी शामिल है, जिसके निदेशक, एक विन्सेनसियन मिशनरी है। उनका मानना है कि यह यात्रा एकता और लोगों के दिलों में शांति लाने में मदद करेगी।
इंडोनेशिया के जकार्ता स्थित राष्ट्रीय स्टेडियम में पोप फ्राँसिस के साथ ख्रीस्तयाग के उपरांत दो युवा काथलिकों ने पोप की इंडोनेशिया यात्रा के बारे कहा कि उन्होंने दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले मुस्लिम बहुल देश में काथलिकों की उपस्थिति की ओर ध्यान आकर्षित किया।
पापुआ न्यू गिनी में पोप फ्राँसिस के आगमन से पहले, रबौल महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष रोचस जोसेफ तातमई, एमएससी ने कहा कि यह देश भले ही "दूर और हाशिये पर" हो, लेकिन यहां की कलीसिया जीवंत और सक्रिय है, जहां युवा लोग बड़ी संख्या में आते हैं।
4 सितंबर को, पोप फ्रांसिस ने जकार्ता के कैथेड्रल ऑफ आवर लेडी ऑफ द असम्पशन में पादरी और धार्मिक नेताओं को संबोधित किया, और उनसे आस्था, भाईचारा और करुणा के गुणों को अपनाने का आग्रह किया।
पोप फ्रांसिस ने इंडोनेशिया की अपनी धर्मप्रचार यात्रा के तीसरे दिन मानवीय गरिमा की रक्षा, गरीबी के चक्र को समाप्त करने और शांति को बढ़ावा देने के लिए धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देने के महत्व को रेखांकित किया।