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नारी: सृष्टि की आधारशिला, शक्ति और संवेदना का स्वरूप

नारी इस सृष्टि की सबसे सुंदर, संवेदनशील और शक्तिशाली रचना है। वह केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र की आधारशिला है। नारी जीवन के हर क्षेत्र में अपनी महत्ता सिद्ध करती आई है। वह माँ है, बहन है, बेटी है, पत्नी है, मित्र है और समाज की निर्माता भी है। उसकी करुणा, त्याग, प्रेम, धैर्य और साहस मानव जीवन को दिशा देते हैं। भारतीय संस्कृति में नारी को देवी का स्वरूप माना गया है। उसे शक्ति, लक्ष्मी और सरस्वती के रूप में पूजनीय स्थान दिया गया है। वास्तव में नारी केवल सम्मान की पात्र नहीं, बल्कि समाज की प्रगति का मूल आधार है।
Apr 28, 2026
  • पोप लियोः उदारता और विश्वास ईश्वर का बीज हमारे हृदयों में

    Jul 13, 2026
    येसु स्वयं, हमारे लिए शरीरधारी शब्द हैं, जिन्होंने हमारी मुक्ति के लिए अपना जीवन दिया है, जिन्हें पिता निरंतर दुनिया में बीज के रूप में बोते हैं, जिससे वे अपने मरण के द्वारा अधिक पल उत्पन्न करें (यो.12.24)। यह सच है कि वे कभी-कभी हममें कठोर और अनउत्तरदायी भूमि को पाते हैं, इसके साथ ही भ्रमित भूमि, जैसे कि हम अपने को बंजर, पथरीली या कंटीली झाड़ियों के रूप में पाते हैं। इसके साथ ही, वे ग्रहण करने वाली और ऊपजाऊ भूमि को भी पाते हैं, जहाँ हम प्रेम के चमत्कार को पाते हैं जिसमें सारी चीजों को बदलने की शक्ति होती है- जैसे कि हमने स्वयं उसे अपने जीवन में निसंदेह अनुभव किया है। यही कारण है, पिता सदैव बुनने हेतु कभी नहीं थकते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि उनका प्रेम हमारे लिए हमारी मानवीय कमजोरियों से कहीं अधिक मजबूत है। (2 कुरू 12. 9-10)
  • पुल बनें! पुल बनाएं!

    Jul 10, 2026
    एशिया एक ऐसा महाद्वीप है जहाँ बहुत ज़्यादा विविधता है; यहाँ की कई भाषाएँ, संस्कृतियाँ, रीति-रिवाज़ और परंपराएँ इसे साफ़ तौर पर दिखाती हैं। दुनिया के सभी प्रमुख धर्मों के लाखों मानने वाले यहाँ रहते हैं। लोगों के खान-पान और पहनावे में भी बहुत विविधता है। बौद्धिक क्षमता और व्यवहार के तरीकों में भी काफ़ी अंतर है। ज़्यादातर जगहों पर अनेकता या बहुलवाद एक सच्चाई है और इसका जश्न मनाया जाना चाहिए।
  • कोलकाता के गरीबों को पोषण देता है मिड-डे मील

    Jun 08, 2026
    दोपहर के समय कोलकाता के सियालदह रेलवे स्टेशन के बाहर, 62 साल के फुटपाथ पर रहने वाले रफीक अली ने गर्म चावल और आलू की सब्जी से भरी एल्युमीनियम की प्लेट थाम रखी है। उनकी आँखों में चमक आ जाती है जब वे कहते हैं, "दिन भर में मुझे बस यही एक बार खाना मिलता है। इसके बिना मैं भूखा रह जाता। वे हमारे साथ इंसानों जैसा बर्ताव करते हैं, भिखारियों जैसा नहीं।"

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