पोप लियोः ईश्वर की मेज सभों के लिए है
पोप लियो ने कस्तेल गंदोल्फो के प्रांगण में विश्वासियों और तीर्थयात्रियों के संग 20वीं रविवार को देवदूत प्रार्थना का पाठ करने के पूर्व कनानी नारी के जीवन पर चिंतन करते हुए नम्रता और दृढ़ता के गुणों को पोषित करने का संदेश दिया।
पोप लियो 14वें कस्तेल गंदोल्फो के प्रांगण में वर्ष के 20वें रविवार को विश्वासियों और तीर्थयात्रियों के संग देवदूत प्रार्थना का पाठ किया।
पोप ने सभों का अभिवादन करते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों सुप्रभात।
कल हमने कुंवारी मरियम का अपने बेटे येसु ख्रीस्त के संग अटूट संबंध पर चिंतन किया। यहाँ तक की मृत्यु भी व्यक्तियों के शरीर और आत्मा की एकता को तोड़ नहीं पाई जो अनंत जीवन है। हर रविवार येसु का अनुसरण करने वालों के लिए इसी परिपूर्णत की याद दिलाती है। उनका पुनरूत्थान हमारे लिए अतीत एक घटना नहीं है लेकिन यह हमें नये जीवन से पोषित करता है।
कनानी नारी की चाह
पोप लियो ने कहा कि हम आज इसके कनानी नारी में पाते हैं, जो सुसमाचार की नायिका है जिसे हमने मिस्सा बलिदान में सुना। यद्यपि वह चुनी हुई प्रजा से संबंधित नहीं थी और एक परदेशी भूमि में रहती थी, वह निरंतर येसु से बातें करने की चाह रखती है, एक शिष्या की भांति वह उनका अनुसरण करती है मानो उसका पहले से उनके संग एक संबंध बना हो। शायद उनकी मुलाकात पहले कभी नहीं हुई थी, फिर भी एक आश्चर्यजनक रूप में, विश्वास उसके हृदय में जड़ जमा चुका था। वह अपने लिए किसी भी चीज की कामना नहीं करती है, लेकिन वह अपनी प्रताड़ित बेटी के लिए शांति की चाह रखती है। वह अपना विश्वास येसु पर समर्पित करती है, वह उनमें मुक्तिदाता को पहचानती है, जो दाऊद के उत्तराधिकारी हैं।
जीवन की कठिनाइयों में विश्वास का प्रभाव
पोप लियो ने कहा कि सुसमाचार लेखक नारी के द्वारा सामना किये जाने वाले मुश्किलों को नहीं छुपाते हैं। शिष्यगण उसे एक मुसीबत की जड़ स्वरुप देखते हैं, और येसु स्वयं उसके निवेदनों की अनदेखी करते हैं। स्वामी वास्तव में उस प्रांत में जाते हैं, और हम इस बात के बारे में विचार कर सकते हैं, जैसे कि दूसरे समय में, वे प्रार्थना करने के लिए एक एकांत स्थान की खोज करते हैं और इसके लिए अपने शिष्यों को निर्देश देते हैं। उस क्षण, यद्यपि, आशा के परे कुछ होता है। इस पर चिंतन करते हुए, हम येसु की आज्ञाकारिता को समझ सकते हैं जिसे वे अपनी प्रेरिताई में पूरा करते हैं, जहाँ वे अपने को उन बातों से प्रभावित होता पाते जिन्हें वे सुनते और देखते हैं। अंततः वे उस नारी से कहते हैं, “नारी, तुम्हारा विश्वास महान है।” तुम्हारी इच्छा पूरी हो।”
पोप ने कहा कि यहाँ तक कि आज भी, कलीसिया अपने को ईश्वर के कार्यों से आश्चर्यचकित होता पाती है, और ख्रीस्त शांति को सीमांतों तक ले जाती है। हम उसकी प्रेरिताई में दिव्य कृपा के पूर्वभाव को पाते हैं, जो हमारे अंतःकरण की गरहाई में कार्य करती है, जिससे हर मिलन में- यहाँ तक कि वे भी जो हमारी योजनाओं में दखल उत्पन्न करते- हम अपनी आँखों और हृदयों को सतर्कता में खोलते हुए ईश्वर की आवाज को सुनते हैं जिसे वे हमें बतलाना चाहते हैं।
कनानी नारी से शिक्षा
हम कनानी नारी से नम्रता और सुदृढ़ रहने की बातों को सीखते हैं। हम उसके विश्वास के लिए के लिए धन्यावाद अदा करते हैं, जब हम सीखते हैं कि ईश्वर की मेज सभों के लिए बिछाई गई है और कोई भी केवल चूर्ण पर नहीं छोड़ा जाता है, क्योंकि पिता के पास हर किसी का अपना स्थान होता है। विश्वास की ज्योति में, असामानता, अन्याय और रोड़े जो ईश्वर के बहुत से पुत्र और पुत्रियों के सम्मान को कुचलते हैं अपने में असहनीय होता है।
