भारत का 80वाँ स्वतंत्रता दिवस रोम में एकता व सद्भाव संदेश के साथ
भारत का 80वाँ स्वतंत्रता दिवस रोम स्थित भारतीय दूतावास में देशभक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
15 अगस्त के इस ऐतिहासिक दिवस को मनाने के लिए भारतीय समुदाय के सदस्य, दूतावास के अधिकारी और खास मेहमान, रोम स्थित भारतीय राजदूतावास में एकत्रित हुए। इस दिवस पर बड़ी संख्या में पुरोहित, धर्मसंघी, दूतावास के अधिकारी और रोम में भारतीय समुदाय के सदस्य शामिल हुए, जो इस खास राष्ट्रीय मौके पर एकजुटता और कृतज्ञता की भावना को दर्शाता है।
इटली और सन मरिनो में भारत की राजदूत सुश्री वाणी राव के सुबह 8.00 बजे राष्ट्रीय ध्वज फहराया। राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद राष्ट्र गान गाया गया, जिसने माहौल देश की आजादी और तरक्की के लिए गर्व और आभार से भर दिया। इसके तुरंत बाद भारतीय समुदाय ने एक स्वर में “वंदे मातरम” गाया। “वंदे मातरम” गीत भारत को मातृभूमि (भारत माता) के रूप में प्रस्तुत करता है, जो इसकी कुदरती खूबसूरती, ताकत और इसके लोगों के साथ गहरे आध्यात्मिक रिश्ते को प्रकट करता है।
ध्वजारोहण के बाद, राजदूत सुश्री वाणी राव ने भारत की माननीय राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का संदेश पढ़ा। राष्ट्रपति के संदेश में 1947 में आजादी के बाद से भारत के शानदार सफर को दिखाया गया और समाज कल्याण, स्वास्थ्य देखभाल, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, महिला सशक्तिकरण और युवाओं की तरक्की में देश की कामयाबियों पर जोर दिया गया। इस भाषण में 2047 तक, जो भारत की आजादी का सौवां साल है, एक विकसित भारत बनाने के सामूहिक दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला गया और हर नागरिक से एक मजबूत, अधिक खुशहाल और सबको साथ लेकर चलनेवाले देश के लिए योगदान देने की अपील की गई।
अपने भाषण में, राजदूत राव ने इटली में रहनेवाले भारतीय समुदाय की सेवा और समर्थन के लिए दूतावास के चल रहे प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए भारत और इटली के बीच मजबूत और बढ़ते संबंधों के बारे चर्चा की। उन्होंने दोनों देशों और उनके नागरिकों के बीच निरंतर सहयोग और जुड़ाव को प्रोत्साहित किया।
इसके बाद देशभक्ति पर एक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया जिसमें भारत की समृद्ध विरासत और विविधता को दिखाया गया। अंत में, सभी ने प्रतिभोज का आनन्द दिया।
इस तरह, यह कार्यक्रम राष्ट्र गौरव, एकता, और आजादी, विकास और देश की सेवा के आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धता की एक आनन्दमय अभिव्यक्ति थी।
