पोप लियोः नव वर्ष खोज की एक नई यात्रा बने
पोप लियो ने पहली जनवरी को माता मरियम ईश्वर की अति पवित्र माता का महोत्सव मनाते हुए नये वर्ष को नये खोज हेतु एक मार्ग बनाने की शुभकामनाएं दी।
पोप लियो ने 01 जनवरी को माता मरियम ईश्वर की अति पवित्र माता का महोत्सव मनाते हुए वाटिकन के संत पेत्रुस महागिरजाघर में ख्रीस्तीयाग अर्पित किया।
पोप अपने प्रवचन में कहा कि आज मरियम ईश्वर की पवित्र माता के महोत्सव, साल की शुरूआती धर्मविधि हमें एक अति सुन्दर आशीर्वाद से पोषित करती है- “ईश्वर तुम लोगों को आशीष दे और सुरक्षित रखें। प्रभु तुम लोगों पर प्रसन्न हो और तुम पर दया करे। प्रभु तुम लोगों पर दयादृष्टि करे और तुम्हें शांति प्रदान करे।” (गण.6.24-26)।
गणना ग्रंथ की पुस्तिका में, यह आशीर्वाद नाज़ीरों को पवित्र करने के निर्देशों के बाद आता है, जो ईश्वर और इस्राएल में लोगों के बीच संबंध स्वरुप उपहार देने के पवित्र और फायदेमंद आयाम को दिखाता है। मानव अपने सृष्टिकर्ता को वह सब कुछ देता है जो उसे मिला है, और बदले में वह, उस पर अपनी कृपादृष्टि फेरते हुए जवाब देते हैं, ठीक वैसे ही जैसे उन्होंने दुनिया की सृष्टि के शुरुआत में किया था। (उत्प.1.31)।
इस्रराएलियों का इतिहास
इससे भी बढ़कर, इस्रराएली प्रजा जिनके लिए यह आशीर्वाद घोषित किया गया था, वे मुक्त किये गये लोग थे- नर-नारियाँ जिनका नया जन्म एक लम्बे समय की गुलामी के उपरांत हुआ था, हम इसमें ईश्वर के हस्तक्षेप और उनके सेवक मूसा की उदारता भरी प्रत्युत्तर के लिए धन्यवाद देते हैं। मिस्र में उन्होंने कुछ निश्चित आराम का आनंद लिया था- उनके लिए भोजन की सुविधा थी, उन्हें सुरक्षा और स्थायित्व की एक निश्चितता थी। यद्यपि ये सारी चीजें उन्हें गुलामी, दासता की कीमत पर उपलब्ध थीं, उन्हें एक तानाशाह द्वारा सताया जाता था, जो उनसे अधिक मांग करता और जबकि उन्हें कम देता है। अब, मरूभूमि में, बहुत से सुविधाओं को उन्होंने खो दिया था। लेकिन इसके बदले उन्हें स्वतंत्रता प्राप्त थी जो उनके लिए भविष्य को संवारने हेतु एक खुले मार्ग की भांति था, जो उनके लिए प्रज्ञा की पुस्तिका और प्रतिज्ञता देश में अंकित था जहाँ वे बिना किसी जंजीर के जीते हुए विकास कर सकते थे। संक्षेप में यह उनके लिए एक पुनर्जन्म था।
नया साल नई शुरुआत हो
अतः, नये वर्ष के प्रभात में, धर्मविधि हमें इस बात की याद दिलाती है कि हर दिन हमारे लिए जीवन की एक नई शुरूआत हो सकती है, इसके लिए हम ईश्वर के उदारतापूर्ण प्रेम,करूणा और हमारी स्वतंत्रतापूर्ण प्रत्युत्तर के लिए कृतज्ञता प्रकट करते हैं। आनेवाले वर्ष को इस रुप में देखना कितना सुन्दर है- खोज के लिए एक खुली यात्रा। वास्तव में, कृपा के द्वारा हम विश्वास के संग इस यात्रा में आगे बढ़ सकते हैं- स्वतंत्र और स्वतंत्रता के धारक, क्षमा प्राप्त और क्षमा के वाहक, निकटता और ईश्वरीय अच्छाई में विश्वास करने वाले जिनके संग ईश्वर सदैव चलते हैं।
हाँ में ईश्वर का चेहरा
हम इस सच्चाई की याद मरियम के दिव्य मातृत्व रहस्य का त्योहार मनाते हुए करते हैं। अपने हाँ” के द्वारा वह येसु ख्रीस्त के मानवीय चेहरे में हमारे लिए करूणा और परोपकार को दुनिया में लाती है। उनकी आंखों के माध्यम- सर्वप्रथम एक बच्चे के रुप में, तब एक युवा और तब व्यस्क के रुप में– पिता का प्रेम हम तक पहुंचता और हमें परिवर्तित करता है।
इसलिए जैसे हम एक नये और अद्वितीय दिनों की ओर आगे बढ़ते हैं जो हमारा इंतजार करते हैं, आइए हम ईश्वर से प्रार्थना करें कि वे हमें हर क्षण को अनुभव करने में मदद करें, वे हमारे संग और हमारे बीच में रहें, उनका पिता तुल्य आलिंगन और उनकी हितकारी निगाहों की ज्योति हम सभों पर बनी रही। इस भांति, हम सदैव अपने में इस बात को याद रख सकें कि हम कौन हैं और किस विस्मयकारी लक्ष्य की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इसके साथ ही, हम अपनी प्रार्थना, पवित्र जीवन और उनकी अच्छाई को एक-दूसरे के लिए साक्ष्य स्वरूप प्रस्तुत करते हुए ईश्वर की महिमा करें।
ईश्वर निहत्थे और हथियारहीन
पोप ने कहा कि संत अगुस्टीन हमें अपनी शिक्षा में कहते हैं, मरियम में, “मानव के सृष्टिकर्ता मानव बनें, जिससे यद्यपि वे तारों को सुसज्जित करते हैं, नारी के स्तन का पान कर सकें, यद्यपि वे रोटी हैं, वे भूख का अनुभव करें, हमें मुक्ति देने हेतु जो भी की हम अपने में अयोग्य हैं। इस भांति, संत अगुस्टीन ईश्वर के एक अति महत्वपूर्ण चेहरे को याद करते हैं- जो ईश्वर का पूर्ण मुफ्त प्रेम है। अपने शांति संदेश की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए संत पापा ने कहा कि ईश्वर अपने को निहत्था और हथियारविहीन प्रस्तुत करते हैं, हम उन्हें नंगा और सुरक्षाहीन एक नवजात स्वरुप चरनी में लेटा पाते हैं। ऐसा करने के द्वारा वे हमें इस बात की शिक्षा देते हैं कि दुनिया को हम धारदार तलवार से नहीं बचा सकते हैं, न ही न्याय के द्वारा, दबाव या अपने भाई-बहनों को खत्म करते हुए। बल्कि,यह अथक समझे जाने, क्षमा, स्वतंत्र करने और बिना किसी हिसाब और भय से हरएक का स्वागत करने में होता है।
मरियम का त्याग
यह ईश्वर का वह चेहरा है जिसे मरियम ने अपने गर्भ में धारण करते हुए बढ़ने दिया, जो उनके जीवन को पूर्णरूपेण बदल देता है। यह वह चेहरा है जिसे उन्होंने खुशीपूर्वक घोषित करती है, यद्यपि अपनी कोमल निगाहों में, उस चेहरे की सुन्दरता को वह प्रति दिन अपने में चिंतन किया करती जब येसु एक बालक, युवा और जवान व्यक्ति के रुप में बड़े हुए, उन्होंने उस चेहरे का अनुसरण एक नम्र शिष्या की भांति किया, जैसे कि वे अपनी प्रेरिताई के मार्ग में आगे बढ़े, क्रूस से लेकर पुनरूत्थान तक। ऐसा करने के लिए उन्होंने अपनी हर सुरक्षा को अलग रखा, इच्छाओं, मांगों और आराम का परित्याग किया- जैसे कि माताएँ बहुधा करती हैं- वह अपने को पुत्र के लिए समर्पित करती है जिसे उन्होंने कृपा के रुप में प्राप्त किया जिससे वह उन्हें दुनिया के लिए दे सकें।