पोप ने यमन में शत्रुता अंत की अपील की, जॉर्डन हमले के पीड़ितों के लिए प्रार्थना की

रविवार को देवदूत प्रार्थना के उपरांत पोप लियो 14वें ने यमन में मानवीय संकट की ओर ध्यान आकृष्ट किया, जॉर्डन के पीड़ितों की याद की और असीसी में शांति के लिए प्रथम विश्व युवा दिवस की 40वीं सालगिराह मनाने का स्मरण दिलाया।

देवदूत प्रार्थना के उपरांत पोप ने विश्व की विभिन्न घटनाओं की याद की। उन्होंने सबसे पहले यमन में मानवीय संकट की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा, “मैं यमन में, खासकर ताइज शहर में, मानवीय हालात की गंभीर स्थिति पर चिंता के साथ नजर रख रहा हूँ, जहाँ लोग खाने, पानी और चिकित्सा देखभाल की कमी से परेशान हैं। मैं दिल से अपील करता हूँ कि दुश्मनी समाप्त हो और यमन के लोगों एवं इस इलाके के सभी लोगों को शांतिमय जीवन की गारंटी मिले।”

उसके बाद पोप ने जॉर्डन में आतंकी हमले के शिकार लोगों की याद की। 23 अक्टूबर को जॉर्डन के करक स्थित गिरजाघर में एक अंतिम संस्कार के दौरान बंदूकधारियों ने गोलीबारी की, जिसमें नौ लोग मारे गए और लगभग चालीस घायल हो गए। अधिकारी हमलावरों की तलाश कर रहे हैं, और किसी भी दल ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली।

पोप ने पीड़ितों के लिए अपनी प्रार्थना का आश्वासन देते हुए कहा, “मैं पिछले शुक्रवार को जॉर्डन के हम्मूद में संत जॉर्ज ऑर्थोडॉक्स कलीसिया के विश्वासियों पर हुए आतंकवादी हमले में मारे गए और घायल हुए लोगों के लिए प्रार्थना करता हूँ। मैं उस समुदाय और पूरे देश के करीब हूँ, जो अलग-अलग धर्मों के बीच शांतिपूर्ण सहअस्तित्व और सम्मान के लिए जाना जाता है।”

फिर, शांति के लिए प्रार्थना जारी रखने का आह्वान करते हुए कहा, “आइए हम शांति के लिए मिलकर प्रार्थना करते रहें। 27 अक्टूबर को, हम उन कलीसियाओं के प्रमुखों और धार्मिक नेताओं के साथ आध्यात्मिक रूप से जुड़ें जो पोप जॉन पॉल द्वितीय द्वारा 1986 में बुलाई गई सभा की 40वीं सालगिरह मनाने के लिए असीसी में एकत्रित होंगे। आज स्पष्ट है कि युद्ध, मौत और तबाही लाने के अलावा, दुनिया को गरीब बनाते और नुकसान पहुँचाते हैं। संत पापा ने प्रार्थना की कि प्रभु बातचीत और शांति के विकल्पों को प्रेरित करें!

तत्पश्चात् पोप ने रोम तथा विश्व के विभिन्न हिस्सों से आये तीर्थयात्रियों का अभिवादन किया, और अंत में, उन्होंने सभी को शुभ रविवार की मंगलकामनाएँ अर्पित की।

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