केरल राज्य ने बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए कानून पारित किया
केरल राज्य ने वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और उनके कल्याण को बेहतर बनाने के लिए एक विशेष कानून पारित किया है। इस कानून के तहत बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार, उन्हें बेसहारा छोड़ना, और उनकी संपत्ति पर अवैध कब्जा करना जैसे अपराधों को दंडनीय बनाया गया है।
केरल विधानसभा ने 26 अक्टूबर को 'केरलम वरिष्ठ नागरिक (देखभाल और अधिकारों की सुरक्षा) विधेयक, 2026' को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। इसके साथ ही, केरल बुजुर्गों की सुरक्षा और कल्याण के लिए इतना व्यापक कानून बनाने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है।
अब इस विधेयक को राज्य के राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह आधिकारिक रूप से कानून बन जाएगा।
केरल भारत का ऐसा राज्य है जहाँ बुजुर्गों की आबादी सबसे तेजी से बढ़ रही है। यहाँ की 3.3 करोड़ की आबादी में लगभग 21 प्रतिशत लोग 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत 13 प्रतिशत है।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के अनुमानों के अनुसार, 2036 तक केरल में बुजुर्गों की आबादी बढ़कर 22.8 से 25 प्रतिशत तक पहुँचने की उम्मीद है — यानी यहाँ रहने वाले हर चार लोगों में से लगभग एक व्यक्ति बुजुर्ग होगा — जबकि उस समय राष्ट्रीय औसत 14.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
'वयोजन विधेयक' (Vayojana Bill) के नाम से चर्चित इस कानून में वरिष्ठ नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार, उन्हें बेसहारा छोड़ना और उनकी संपत्ति पर अवैध कब्जा करने जैसे अपराधों के लिए तीन साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
इस कानून के तहत, बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार के मामलों की सूचना 48 घंटों के भीतर पुलिस को देना अनिवार्य है। साथ ही, सभी बुजुर्ग देखभाल केंद्रों (eldercare centers), रिटायरमेंट सुविधाओं और होम-केयर एजेंसियों का सरकार के पास पंजीकरण कराना भी अनिवार्य कर दिया गया है।
देखभाल करने वालों (caregivers) को 'केरलम जेरियाट्रिक केयर सर्टिफिकेशन फ्रेमवर्क' के तहत औपचारिक प्रशिक्षण लेना होगा, पुलिस द्वारा पृष्ठभूमि की अनिवार्य जाँच (background check) से गुजरना होगा, और हर तीन साल में रिफ्रेशर ट्रेनिंग पूरी करनी होगी।
यह कानून 'लिविंग विल' (living will) को भी कानूनी मान्यता देता है। इसके जरिए बुजुर्ग जीवन रक्षक प्रणालियों (life support) और जीवन के अंतिम चरण में मिलने वाली देखभाल के बारे में अपनी पसंद पहले से तय कर सकते हैं, जिससे उनकी स्वायत्तता (autonomy) सुरक्षित रहती है।
राज्य सरकार एक त्रि-स्तरीय (three-tier) व्यवस्था लागू करेगी, जिसमें 'राज्य वरिष्ठ नागरिक सुरक्षा इकाई', 'जिला सुरक्षा इकाइयाँ' और 'जिला वरिष्ठ नागरिक सुरक्षा मंच' शामिल होंगे। ये निकाय शिकायतों का निपटारा करेंगे, निरीक्षण करेंगे और समय रहते आवश्यक कदम उठाना सुनिश्चित करेंगे। इस कानून में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पैलिएटिव केयर (गंभीर बीमारी में दी जाने वाली देखभाल), घर पर दी जाने वाली देखभाल और डिमेंशिया (याददाश्त से जुड़ी बीमारी) से जुड़ी देखभाल सेवाओं का विस्तार करने की भी बात कही गई है।
साइबर पुलिस स्टेशनों को वरिष्ठ नागरिकों को वित्तीय धोखाधड़ी और डिजिटल घोटालों से बचाने के लिए विशेष इकाइयां बनानी होंगी।
इडुक्की डायोसिस (धर्मप्रांत) के मीडिया आयोग के निदेशक फादर जिन्स करक्कट ने 27 अक्टूबर को यूसीए न्यूज़ को बताया, "यह एक बहुत ही प्रगतिशील कानून है, जिसका उद्देश्य राज्य में बुजुर्गों की मुख्य चिंताओं को दूर करना है।"
उन्होंने कहा, "आज हमारे कई घर 'वृद्धाश्रम' जैसे बन गए हैं, क्योंकि युवा रोजगार की तलाश में मध्य-पूर्व और यूरोपीय देशों में चले गए हैं। नतीजतन, बुजुर्गों को वह देखभाल नहीं मिल पाती, जिसकी उन्हें जरूरत होती है।"
करक्कट ने बताया कि कैथोलिक चर्च ने सीमित संसाधनों और कर्मचारियों के बावजूद, देखभाल गृहों (केयर होम्स) और अन्य सुविधाओं के जरिए जरूरतमंद बुजुर्गों की मदद करने की कोशिश की है, लेकिन बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए ये प्रयास नाकाफी हैं।
उन्होंने कहा कि इस नए कानून के तहत, बच्चों के लिए अपने बुजुर्ग माता-पिता और अन्य आश्रितों की देखभाल करना कानूनी रूप से अनिवार्य हो जाएगा।
