सचमुच, पूरी दुनिया में शांति बहुत जरूरी है: श्री नखता राम

भारत के मूल निवासियों ने पोप लियो की “निरस्त्र और निहत्थे” शांति की मजबूत अपील को किस तरह से लिया है, इस पर राजस्थान के मूल निवासी एवं सामाजिक कार्यकर्ता श्री नख्ता राम भील विचार करते हैं।

पोप लियो 14वें के 1 जनवरी, विश्व शांति दिवस के लिए प्रकाशित संदेश पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए राजस्थान के श्री नख्ता राम भील ने कहा कि पोप का संदेश पढ़कर उन्हें बहुत खुशी हुई। वे मानते हैं कि पूरी दुनिया में शांति की जरुरत है। विश्व के बहुत सारे देशों में लोग युद्ध में फंसे हुए हैं। बहुत से लोग देश के अंदर और समीपवर्ती देशों में पनाह लिये हुए हैं।

वाटिकन न्यूज हिन्दी की पत्रकार उषा मनोरमा तिर्की को वाट्सएप के जरिए भेजे अपने संदेश में श्री नखता राम ने लिखा कि अगर पोप लियो 14वें की तरह सभी धार्मिक प्रतिनिधि और उपदेशक ऐसे संदेश को एक विनम्र अनुरोध के साथ फैलाएंगे, तो पूरी दुनिया में शांति लाना आसान हो सकता है।

श्री नखताराम राजस्थान के मूल निवासी ने लिखा, “हम भारत के मूल निवासी आपके और शांति के आपके इस संदेश के बहुत शुक्रगुजार हैं।”

निश्चय ही इसके नतीजे जल्द ही आएंगे। सभी को आपके संदेश का मतलब समझना होगा और वे सभी इसे दिल से मानेंगे।

श्री नखता राम पोप के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं, “एक बार फिर, ऐसी शांतिपूर्ण अपील के लिए दिल की गहराइयों से बहुत-बहुत धन्यवाद और सभी लोगों से अनुरोध है कि शांतिपूर्ण जीवन के लिए बिना हथियारों के रहें।”

हिंदू धर्म को मानेवाले नखता राम भील गागरिया स्टेशन, राजस्थान के सरकारी  सीनियर सेकेंडरी स्कूल, में  इंग्लिश लेक्चरर हैं साथ ही राजस्थान आदिवासी समन्वय मंच के अध्यक्ष हैं।

1 जनवरी को विश्व शांति दिवस मनाया जाता है, इस अवसर के लिए अपने संदेश में पोप लियो 14 वें ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बढ़ते युद्ध, हथियार रखने और डर के बारे में बात की है, बिना शांति के लिए हथियार खत्म करने, बातचीत करने एवं दिल बदलने को जरूरी शर्त बतलाया है। उन्होंने इस समय की गंभीरता बतायी है और शांति का एक ऐसा नजरिया पेश किया है जो बिना हथियार के हो, जो हिंसा का विरोध ताकत से नहीं बल्कि नैतिक स्पष्टता, बातचीत और दिलों के बदलाव से करे।

पुनर्जीवित ख्रीस्त का अभिवादन, “तुम्हें शांति मिले!” संदेश का केंद्रविन्दु है। पोप लियो 14वें लिखते हैं कि ये शब्द “सिर्फ शांति की इच्छा नहीं रखते, बल्कि इसे पानेवालों में सच में एक स्थायी बदलाव लाते हैं,” यह निश्चित करते हुए कि ख्रीस्तीय शांति हिंसा से इनकार करने में सक्रिय है और उसे रोकनेवाली है।