महाधर्माध्यक्ष रिचर्ड अलार्कोन का निधन- पोप की संवेदना
पोप लियो 14वें ने कुस्को के महाधर्माध्यक्ष रिचर्ड दनियल अलार्कोन उरुतिया के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उनकी मृत्यु एक लंबी बीमारी के उपरांत हो गई। यह घटना पेरू के इस शहर में पोप की प्रेरितिक यात्रा के कुछ ही दिन पहले हुई।
पोप लियो ने पेरू कुस्को के महाधर्माध्यक्ष रिचर्ड दनियल अलार्कोन की मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हुए स्थानीय कलीसिया के नाम धर्माध्यक्ष लिजार्दो एस्ताद हेरेरा को अपना शोक संदेश प्रेषित किया।
पोप ने अपने शोक संदेश में कुस्को के महाधर्माध्यक्ष को एक “निस्वार्थ प्रेरित” घोषित किया। उन्होंने दिवांगत आत्मा के लिए अपनी प्रार्थना अर्पित करते हुए उनकी आत्मा की अनंत शांति हेतु “मामाचा बेलेन” बेतलेहम की कुंमारी मरियम से विचवई की।
15 नवंबर को कुस्को की अपनी यात्रा के संबंध में पोप कहा कि वे स्थानीय कलीसिया के संग मिलकर महाधर्माध्यक्ष के लिए प्रार्थना करने की चाह रखते हैं। उन्होंने महाधर्माध्य के निधन से शोकित लोकधर्मियों और कुस्को की कलीसिया को अपनी सांत्वना प्रदान करते हुए आशा में बने रहने हेतु अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रेषित किया।
कुस्को के सोशल मीडिया पर एक बयान जारी करके उनके निधन की घोषणा की गई जिसमें “गहरा दुख” व्यक्त करते हुए लिखा गया कि लंबी बीमारी के बाद, शुक्रवार 30 अक्टूबर को 74 वर्ष की आयु में महाधर्माध्यक्ष रिचर्ड दनियल अलार्कोन उरुतिया का निधन हो गया।
उनका निधन 15 नवंबर को पेरू के इस शहर में पोप लियो 14वें की प्रेरितिक यात्रा के कुछ दिन पहले हुई जिसकी तैयारियां धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष गर्मजोशी से कर रहे थे।
कुस्को के नए महधर्माध्यक्ष की संवेदना
कुस्को के नए महाधर्माध्यक्ष लिजार्दो एस्ताद हेरेरा जो पोप लियो 14वें द्वारा 29 अगस्त को कुस्को के सहायक महाधर्माध्यक्ष नियुक्त किये गये थे, इस “दुखद निधन” पर अपना गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने महाधर्माध्य अलार्कोन उरुतिया की मृत्यु को “कभी न भरी जाने वाली एक क्षति” बतलाई। उन्होंने प्रार्थना की कि “ईश्वर अपनी असीम दया से उन्हें अपने राज्य में स्थान दें और उन्हें अनंत शांति प्रदान करें।”
महाधर्मप्रांत के बयान के अनुसार, उनके पार्थिव शरीर कुस्को महागिरजाघर में रखा गया है, जहाँ सैकड़ों श्रद्धालु उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए इकट्ठा हो रहे हैं।
महाधर्माध्यक्ष अलार्कोन उरुतिया का जन्म 10 अप्रैल 1952 को लीमा में हुआ था। वे 1969 में फ्रांसिस्कन धर्मसंघ में शामिल हुए, 1976 में उनका पुरोहिताभिषेक हुआ, और 2001 में उन्हें धर्माध्यक्ष नियुक्त किया गया। 27 अक्टूबर 2014 को, पोप फ्रांसिस ने उन्हें कुस्को का महाधर्माध्यक्ष नियुक्त किया, और 3 जनवरी 2015 को उन्होंने चरवाहे का कार्यभार संभाला था।
