जुबली वर्ष में करीब 33 मिलियन तीर्थयात्री रोम आये

सुसमाचार प्रचार विभाग के प्रो-प्रीफेक्ट एवं जुबली वर्ष के लिए नियुक्त अधिकारी महाधर्माध्यक्ष रिनो फिसिकेल्ला ने सोमवार, 5 जनवरी को वाटिकन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पवित्र वर्ष पर एक अवलोकन प्रस्तुत किया। उन्होंने 5 जनवरी को बतलाया कि पवित्र वर्ष में 185 देशों से करीब 33.5 मिलियन तीर्थयात्री रोम आये।

महाधर्माध्यक्ष ने एक प्रेस सम्मेलन के दौरान पिछले साल का आंकड़ा साझा किया जब 6 जनवरी को संत पेत्रुस महागिरजाघर का जुबली पवित्र द्वार बंद किया गया।

उन्होंने कहा, पवित्र वर्ष के दौरान “पूरी दुनिया रोम आई” और बताया कि कैसे रोम त्रे यूनिवर्सिटी के शुरुआती अनुमान - लगभग 31 मिलियन तीर्थयात्रियों – से ज्यादा हो गए।

स्थानीय सरकारी अधिकारी जिन्होंने कलीसिया के साथ करीबी से सहयोग किया, सभी कार्यक्रमों को पूरा करने और आधारभूत संरचनाओं को लागू करने के लिए, प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी शामिल हुए।

पूरी दुनिया, लेकिन खासकर यूरोप रोम आई: 62% तीर्थयात्री यूरोपीय महादेश से आए, जिसमें हिस्सा लेनेवालों की संख्या के मामले में इटली पहले नंबर पर है। उत्तरी अमेरिका दूसरा महादेश है जहाँ से सबसे ज्यादा 17% तीर्थयात्री आए। इटली के बाद क्रमशः अमरीका, स्पेन, ब्राजील और पोलैंड से तीर्थयात्री अधिक संख्या में रोम आए।

आध्यात्मिकता की जुबली जो भविष्य की ओर देखती है
न तो तीर्थयात्रियों की संख्या और न ही 35 'बड़े कार्यक्रम' इस साल के असल महत्व को पूरी तरह व्यक्त कर सकते हैं जो मुख्य रूप से लोगों के जीवन को छूने और उन्हें गहराई में उतरने में मदद कर सकते हैं। महाधर्माध्यक्ष फिसिकेला ने कहा, "जुबली का आधार आध्यात्मिक पहलू है जो लोगों को प्रार्थना और मन-परिवर्तन की बड़ी इच्छा के साथ आगे बढ़ते हुए देखना संभव बनाया।"

उन्होंने आगे कहा, “पोप के महागिरजाघरों और प्रार्थना के दूसरे स्थलों—जैसे पवित्र सीढ़ी—में पहले कभी नहीं देखे गए स्तर पर लोग आए। अधिक लोगों ने पापस्वीकार संस्कार में भाग लिया, और पूर्ण क्षमादान प्राप्त की, यानी जुबली का दण्डमोचन सभी तक पहुँच गया है।”

प्रो-प्रिफेक्ट ने समझाया, “जुबली समाप्त हो रही है, लेकिन आशा के जो संकेत दिए गए थे, वे अब भी हैं, और शांति और सुकून से भरे भविष्य के लिए उम्मीदें बढ़ रही हैं, जैसा हर कोई चाहता है। एक शब्द में, इस पवित्र साल ने जुबली के आदेशपत्र (बुल ऑफ इंडिक्शन) स्पेस नॉन कोनफुंदित में बताए गए लक्ष्य को हासिल किया: सभी के लिए आशा को फिर से जगाने का मौका बना।”

7000 स्वयंसेवकों की उदारता
महाधर्माध्यक्ष फिसिकेल्ला ने गौर किया कि कुछ संख्या सचमुच मायने रखते हैं क्योंकि "व्यक्तिवाद की ओर सहज झुकाव के समय में", अनेक स्वयंसेवकों के अथक कार्य बहुत महत्वपूर्ण रहे।

उन्होंने बतलाया कि पूरे जुबली साल में कुल 5000 लोगों ने सेवा की और ऑर्डर ऑफ माल्टा के अन्य 2000 सदस्यों ने चार महागिरजाघरों में फर्स्ट-एड सेवा प्रदान की।

बातचीत और सहयोग: “जुबली प्रणाली”
इटली के काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स के सेक्रेटरी अल्फ्रेडो मंतोवानो ने बताया कि “जुबली मेथड” में क्या शामिल था: “एक शीर्ष प्रबंधन को, दूसरे प्रबंधन को निर्देश देना नहीं, बल्कि सहयोग करना था। समन्वय की बैठकें समस्या पैदा करने के बजाय हल कीं। इसमें शामिल किसी भी पक्ष ने परिणाम का श्रेय अपने ऊपर नहीं लिया जो हर किसी के काम का नतीजा रहा। इन सबने रफ्तार बदलना मुमकिन बनाया।” इसका मतलब है एक ऐसी प्रबंधन प्रणाली जिसे आध्यात्मिकता की सेवा में लगायी गयी थी।

अनन्त शहर ने स्वागत किया
रोम के मेयर और जुबली के लिए असाधारण गवर्नमेंट कमिश्नर, रोबेर्तो ग्वालतिएरी ने देखा कि उनका शहर और उसके लोग राजधानी में आए भक्तों का धैर्य से स्वागत कर रहे थे, ताकि वे पूरी सुविधाएँ पा सकें।

मेयर ने कहा, “तीर्थयात्रियों ने रोम के आगंतुकों का स्वागत करने और अपने नागरिकों को सेवा देने की क्षमता को कम नहीं किया। इसके विपरीत, जुबली एक प्रेरक शक्ति थी।”

ग्वालतीएरी ने अगस्त में युवाओं की जयन्ती की याद कर कहा कि “तीर्थयात्रियों के आनन्द, विश्वास और आशा ने रोमवासियों के दिल को छू लिया जिन्होंने बदले में उनके प्रति स्वागत का मनोभाव व्यक्त किया, तब भी जब लोगों की संख्या असाधारण रूप से अधिक थी। उदाहरण के लिए तोर वेरगाता, जो हमारे शहर और कलीसिया के इतिहास का हिस्सा हमेशा बना रहेगा।”

स्वास्थ्य देखभाल कर्मचारियों और सुरक्षाबल का योगदान
लात्सियो प्रांत के अध्यक्ष फ्रांचेस्को रोक्का ने बताया, “जुबली मेथड ने सहयोग दल को प्रतिस्प्रधा के बजाय शांति से काम करने के लिए प्रेरित किया—यह शांति की भावना सभी वर्कर्स के साथ शेयर की गई। आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं ने 580,000 हस्ताक्षेप किए, जो पिछले साल से 40,000 ज्यादा है। इमरजेंसी रूम विज़िट 1,600,000 तक पहुँच गईं, जो 2024 के मुकाबले 100,000 ज्यादा है।”

अंत में, रोम के अध्यक्ष लम्बेर्तो जान्नी ने राजधानी के सुरक्षा बल के निर्देश सिद्धांत के बारे बताया: “हमें सुरक्षा और शांति की जरूरत थी, इसलिए हमने मिलिट्री लगाकर नहीं, बल्कि समस्याओं को रोककर सुरक्षा देने की कोशिश की। मैं चिरको मासिमो में बनाए गए युवाओं की जयन्ती से बहुत प्रभावित हुआ। यह सचमुच अनोखा था जो सभी की यादगारी बनी रहेगा।”