स्लोवेनिया के धर्माध्यक्षों से पोप ने की एकता की अपील

स्लोवेनिया से अपनी पंचवर्षीय मुलाकात हेतु रोम आये काथलिक धर्माध्यक्षों से शुक्रवार को पोप लियो 14 वें ने मुलाकात कर उनसे कहा कि हालांकि स्लोवेनिया एक छोटा सा राष्ट्र है तथापि इसके इतिहास पर भिन्न-भिन्न सांस्कृतिक प्रभावों परिणामस्वरूप तथा ख्रीस्तीय परम्परा के लिये यह एक धनी देश है।

नई प्रेरणा का स्रोत
धर्माध्यक्षों को पोप ने स्मरण दिलाया कि उनकी पंचवर्षीय पारम्परिक मुलाकात सन्त पेत्रुस के उत्तराधिकारी के साथ मेलमिलाप तथा ज़िम्मेदारी के साथ प्रभु ईश्वर के प्रति हमारे जुड़ाव को नवीकृत करने का एक स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा कि प्रभु हमारे साथ-साथ चलते, मुश्किलों में हमारा साथ देते हैं और हमें अपनी शांति और प्रेम के साक्षियों के तौर पर प्रेषित करते हैं। सन्त पापा ने कहा कि इस प्रकार यह मुलाकात एक जीता-जागता ज़रिया भी बन जाता है, जिससे नई प्रेरणा और नवीन साहस मिलता है, ताकि सुसमाचार की उदघोषणा में पूरे भरोसे के साथ फिर से आगे बढ़ा जा सके।

धन्यवाद ज्ञापन
सुसमाचार प्रचार क्षेत्र में धर्माध्यक्षों के पूर्ण और उदार समर्पण के लिये पोप ने उनके प्रति धन्यावद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि यह समर्पण खास तौर पर परिवारों, युवाओं, शिक्षा तथा बीमारी से परेशान लोगों के लिए आपकी प्रेरिताई एवं देखभाल में परिलक्षित हुआ है।

पोप ने स्मरण दिलाया कि प्रभु येसु मसीह ने प्रेम के कारण ही मानवीय स्वभाव ग्रहण किया और हमें जीवन देने वाली रोशनी की ओर वापस ले जाने के लिए वे ख़ुद अन्धकार में उतरे और हमें  भरोसा दिलाया कि कोई भी अकेला नहीं है। उन्होंने कहा कि यह आनन्दमयी ख़बर, जो सदियों से चली आ रही है, आपकी ज़मीन से जुड़े कई संतों और धन्य लोगों ने ईमानदारी और साहस के साथ देखी है।

चुनौतियाँ
पोप ने कहा कि हमारे युग में कई चुनौतियाँ और खतरे हैं: युद्ध जो इस महाद्वीप को घायल कर रहा है, डर जो दिलों को पंगु बना सकता है, और कई तरह के ऐसे रूप जो सीधे तौर पर मानव जीवन के सम्मान को खतरा पहुँचाते हैं। प्रेरिताई की संरचनाएँ और आदर्श जिनके हम आदी थे,  आज लगातार बदलते हुए दिख रहे हैं, उनका लगातार कमज़ोर होना भी अनिश्चितता उत्पन्न कर सकता है। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों का सामना करने का एकमात्र और ठोस रास्ता है प्रभु पर पूर्ण भरोसा और हमारे बीच एकता।

एकता है जीवन्त मेल-जोल
पोप ने कहा कि पुरोहितों के बीच, समुदायों के बीच और प्रेरितिक कार्यकर्त्ताओं के बीच एकता भय, बिखराव और उन बदलावों का पहला इलाज है जो उम्मीद को खत्म करने का खतरा पैदा करते हैं। जैसा कि मेरे आदरणीय पूर्व परमाध्यक्ष सन्त पापा फ्रांसिस ने अपने प्रेरितिक उदबोधन इवान्जेली गाऊदियुम में स्मरण दिलाया है, "पूरा हिस्सा हिस्सों से बड़ा होता है, और वह हिस्सों के जोड़ से भी बड़ा होता है" (नं. 235)। एकता मतभेदों को मिटाती नहीं है, बल्कि उनमें तालमेल बिठाती है; यह कमज़ोर नहीं करती, बल्कि समृद्ध करती है।"

पोप ने कहा यही वह जीवंत मेल-जोल है जो कलीसिया के साक्ष्य को भरोसेमंद और सुसंगत बनाता है। उन्होंने कहा कि जहाँ एकता होती है, वहाँ सुसमाचार अधिकाधिक शक्ति से चमकता है, कलीसिया एक स्वागत करने वाला और आकर्षक घर बन जाता है, और इस वातावरण में, प्रभु की बुलाहट के प्रति एक उदार प्रतिक्रिया के रूप में, नए काम भी उत्पन्न और परिपक्व हो सकते हैं।