राखबुध में पोप ने प्रायश्चित, समुदाय और मृत्यु पर चिंतन किया

राखबुध के साथ चालीसा काल की शुरूआत करते हुए पोप लियो 14वें ने कहा कि राख हमें उस दुनिया के भार की याद दिलाती है जो जल रही है, जिसके सारे शहर युद्ध से नष्ट हो चुके हैं।

पोप लियो 14वें ने रोम के संत सबीना महागिरजाघर में राखबुध की धर्मविधि सम्पन्न की जहाँ उन्होंने प्रायश्चित, समुदाय और मृत्यु पर चिंतन किया।

उन्होंने कहा कि जो राख हम ग्रहण करनेवाले हैं, वह हमें “एक जलती हुई दुनिया के भार, युद्ध से तबाह हुए सभी शहरों” की याद दिलाती है।

पोप लियो ने जोर देकर कहा कि दुनिया की हालत इस राखबुध पर हमसे कहती है कि “हम मौत को उसके असली रूप में स्वीकार करें, और उसके चिन्ह अपने अंदर रखें।”

पाप, सार्वजनिक और व्यक्तिगत
राखबुध चालीसा का पहला दिन है, जो पास्का से पहले 40 दिनों का उपवास और प्रार्थना का समय है।

पोप ने कहा, यह “समुदाय के लिए एक प्रभावशाली समय है।” उन्होंने कहा कि आज, समुदाय घटती जा रही है – लेकिन चालीसा साक्ष्य देनेवालों के एक समुदाय के रूप में लोगों को एक साथ लाता है, जो अपने पापों को पहचानता है।”

पोप लियो ने जोर देकर कहा कि ये पाप व्यक्तिगत और सामुदायिक दोनों होते हैं। पाप “हमारे दिल को दुःख पहुंचाते हैं, और हमारे अंदर रहते हैं।” लेकिन ये बृहद स्तर पर भी होते हैं जो “आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और यहां तक ​​कि धार्मिक” भी हो सकते हैं।

पोप ने रेखांकित किया कि चालीसा काल का अर्थ है पछतावा और मन-परिवर्तन के द्वारा, इन सबसे “मुक्त होने की हिम्मत” करना।

पोप ने कहा कि आज के सांसारिक युग में, यह संदेश युवाओं के लिए खास रूप से आकर्षक है।

उन्होंने सुझाव दिया कि युवा इस बात को अच्छी तरह समझें कि “कलीसिया और दुनिया में गलत कामों के लिए जवाबदेही होनी चाहिए।”

इसलिए, पोप ने कहा कि चालीसा काल को एक निजी भक्ति के तौर पर देखने के बजाय, ख्रीस्तियों को चाहिए कि वे इसे उन बेचैन लोगों से भी परिचित कराने के तरीके खोजें जो “अपने जीवन को नया करने के असली तरीके” ढूंढ रहे हैं।