डिजिटल जगत से उत्पन्न नवीन चुनौतियों से संलग्न चिन्ता
“मानवीय आवाज़ों और चेहरों का संरक्षण” शीर्षक से आयोजित अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन के प्रतिभागियों से पोप लियो 14 वें ने कहा कि डिजिटल संचार माध्यम जगत से उत्पन्न नवीन चुनौतियों के समक्ष भविष्य के लिये उनकी चिन्ताएँ तर्कसंगत हैं।
पोप लियो 14 वें ने शुक्रवार को “मानवीय आवाज़ों और चेहरों का संरक्षण” शीर्षक से आयोजित अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन के प्रतिभागियों को सम्बोधित कर कहा कि डिजिटल संचार माध्यम जगत से उत्पन्न नवीन चुनौतियों के समक्ष भविष्य के लिये उनकी चिन्ताएँ तर्कसंगत हैं।
मीडिया और डिजिटल साक्षरता
पोप लियो ने कहा कि सम्प्रेषण एवं संचार दिवस के 60 वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में आयोजित उक्त अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन के प्रतिभागियों का वाटिकन में स्वागत करते वे अत्यन्त हर्षित थे। उन्होंने कहाः "डिजिटल कम्युनिकेशन में माहिर विशेषज्ञ होने के नाते मानवजाति के भविष्य के लिए आपकी चिंता आपको मीडिया और डिजिटल साक्षरता पर सोच-विचार हेतु रोम ले आई है। इस पहल में हिस्सा लेकर आप सभी टेक्नोलॉजी के तेज़ी से विकास के इस समय में मानवता के भविष्य की दिशा में योगदान देने हेतु अपनी-अपनी प्रवीणता को लाये हैं, जो कलीसिया के मिशन के लिए भी खास तौर पर एक ज़रूरी सवाल है।"
कलीसिया का प्राथमिक मिशन
पोप ने स्मरण दिलाया कि कलीसिया का प्राथमिक मिशन प्रत्येक मनुष्य की मुक्ति और इसके लिये सुसमाचार प्रचार है, ताकि, जैसा कि सन्त योहन रचित सुसमाचार में लिखा हैः "वे तुझे सच्चे ईश्वर को और येसु मसीह को, जिसे तूने भेजा है, जानें।”
पोप ने कहा कि इसीलिये हर किसी की यह इच्छा कि वह “मुक्ति पाये और सत्य को जाने” (1तिमोथी 2:4) न सिर्फ़ हमारे फ़ैसलों और कामों को प्रभावित करे, बल्कि मीडिया, डिजिटल टेक्नोलॉजी और एआई यानि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल और दिशा को भी प्रभावित करे, ताकि यह सुनिश्चित किय़आ जा सके कि ये अस्त्र मानवता की सच्ची सेवा में लगाए जाएं।
पोप ने कहा कि यह दुख की बात है कि टेक्नोलॉजी को बिना रोक-टोक बढ़ावा दिया जा रहा है और मानव सम्मान की कीमत पर इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब टेक्नोलॉजी मानवीय रिश्तों की हमारी ज़रूरत का फ़ायदा उठाती हैं तो इससे यह पता चलता है कि हम सच में इंसान होने के मतलब को भूल रहे हैं। सन्त पापा ने कहा कि इसीलिये यह और भी ज़रूरी है कि हम इंसानियत के असली मतलब और उसकी महानता को समझें जैसा कि ईश्वर ने चाहा था।
मानवविज्ञान सम्बन्धी चुनौती
इसी मायने में, सन्त पापा ने कहा, "अभी हम जिस चुनौती का सामना कर रहे हैं, वह टेक्नोलॉजिकल नहीं, बल्कि मानवविज्ञान सम्बन्धी चुनौती है और मुझे उम्मीद है कि कुछ ही दिनों में प्रकाशित होने वाला मेरा विश्व पत्र इस चुनौती का जवाब देने में मदद करेगा।"
पोप ने कहा कि इस पृष्ठभूमि में कलीसिया अपने शैक्षणिक निकाय में मीडिया, सूचना और प्रसारण तथा एआई साक्षरता, उसके लागू किये जाने और उसके सदुपयोग के प्रति चेतना जागृत करने को नितान्त आवश्यक मानती है ताकि समाज को रचनात्मक योगदान दिया जा सके।
बच्चों और युवाओं का ध्यान
पोप ने कहा कि आज हम सब डिजिटल टेक्नोलॉजी और एआई के इस्तेमाल के संभावित नतीजों को लेकर खास तौर पर चिंतित हैं, न सिर्फ बच्चों और युवाओं के शारीरिक और दिमागी विकास पर, बल्कि उनकी आध्यात्मिक भलाई को लेकर भी। इस संबंध में सभी लोगों को, विशेष रूप से युवाओं को, माता-पिता और शिक्षकों के मार्गदर्शन द्वारा समर्थित, ऐसी तकनीक के "उपयोग में संयम और अनुशासन सीखना चाहिए।"
इसके अलावा, सन्त पापा ने कहा कि कलीसिया के मिशन और ईश्वर एवं मानव के बारे में मौजूदा गलतफहमियों को देखते हुए, डिजिटल साक्षरता में ईश्वर और मनुष्य के बारे में सच्चाई की शिक्षा भी शामिल होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि युवा व्यक्ति खास तौर पर सत्य को ग्रहण करने के लिये उदार रहते हैं इसलिये उचित मार्गदर्शन द्वारा येसु के साक्षात्कार हेतु उनकी मदद की जानी चाहिये ताकि वे ख्रीस्तीय जीवन शैली में टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को एकीकृत करना सीख सकें। ।