रोमन कूरिया के उपदेशक, फादर रॉबर्टो पासोलिनी, ओएफएम कैप, चालीसा काल 2025 के लिए अपना दूसरा मनन-चिंतन प्रस्तुत करते हैं, जिसका विषय है: "आगे बढ़ना: आत्मा में स्वतंत्रता।"
पिछले दिनों मेरे मित्र से मुलाकात के दौरान उसने अपने जीवन की कुछ व्यक्तिगत घटनायें मेरे साथ साझा की। उसने बतलाया की उसे समझ नहीं आ रहा है कि आने वाले समय का सामना कैसे करें। जीवन के प्रति उसकी निरसता को देखते हुए मैंने उसे सुझाव दिया कि इसमें इतनी चिंता करने की कोई बात नहीं है। अगर कुछ समझ में नहीं रहा है तो ईश्वर पर भरोसा रखकर आगे बढ़ो। समय सबकुछ ठीक कर देगा। ख्रीस्तीय मित्र होने के नाते मैंने उसे यह सुझाव भी दे दिया कि चालीसा काल आने वाला है। चालीसे काल स्वयं को पुनर्स्थापित करने का एक अच्छा समय होता है। मगर मेरे इस सुझाव पर उसने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। साथ ही उसने कहा कि चालीसा तो हर साल आता है उसमें नया क्या है? उसका यह जवाब मेरे जेहेन में घूमता रहा। मैं खुद इस सोच में पड़ गया कि चालीसा तो हर साल आता है तो फिर इस चालीसे में नया क्या होगा? खैर उस समय तो मुझे इसका कोई जवाब नहीं मिला। मगर यह प्रश्न बारम्बार मेरे जेहेन में घूम ही रहा था कि इस चालीसे में नया क्या होगा?
जब हम चालीसे के पवित्र काल की शुरुआत करते हैं, तो हमारे माथे पर रखी राख हमें चालीस दिन की यात्रा की याद दिलाती है, एक ऐसा मार्ग जो येसु द्वारा स्वयं चलाए गए मार्ग को दर्शाता है। आज के सुसमाचार में, येसु हमें दो मार्ग प्रस्तुत करते हैं: उनका अपना क्रूस का मार्ग और वह मार्ग जिसे हमें उनका अनुसरण करते हुए अपनाना चाहिए।
पापुआ न्यू गिनी में अपनी प्रेरितिक यात्रा के दूसरे दिन रविवार को पोप फ्राँसिस ने पोट मोरेस्बी के सर जॉन गुईजे स्टेडियम में करीब 35,000 विश्वासियों के साथ ख्रीस्तयाग अर्पित किया।
“जीवन का रहस्य येसु की बात सुनने में है। सुसमाचार लें, उसे पढ़ें और अपने दिल में येसु को सुनें कि वे क्या कह रहे हैं।” यही सलाह प्रभु के रूपांतरण महापर्व के लिए पोप फ्राँसिस ने विश्वासियों को दी है।