सीसीबीआई ने सिनॉड के कार्यान्वयन को मजबूत करने की अपील की
भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन सीसीबीआई ने अपने सभी सदस्य धर्माध्यक्षों को एक पत्र जारी कर, जून 2025 से दिसंबर 2026 तक सिनॉडालिटी पर सिनॉड के कार्यान्वयन चरण में सक्रिय और समर्पित सहभागिता पर जोर दिया है।
अपने संदेश में, सीसीबाआई के अध्यक्ष कार्डिनल फिलिप नेरी फेराओ ने धर्माध्यक्षों को आमंत्रित किया है कि वे इस समय को आध्यात्मिक रूप से नया बनाने, जिम्मेदारी साझा करने और कलीसिया के जीवन में गहरी एकता लाने का समय बनाएँ। उन्होंने मौजूदा समय को सभी धर्मप्रांतों में सहभागिता, बातचीत और मिशनरी समर्पण को मजबूत करने का एक कृपा भरा मौका बताया।
यह पत्र रोम में सिनॉड के महासचिवालय द्वारा तैयार किए गए रोडमैप के अनुसार है। इसमें अक्टूबर 2028 में वाटिकन सिटी में होनेवाली कलीसियाई सभा तक के सफर की रूपरेखा बताई गई है। इस योजना के अनुसार, साल 2025 और 2026 स्थानीय कलीसियाओं में इसे लागू करने के लिए हैं, इसके बाद 2027 और 2028 में क्षेत्रीय, धर्मप्रांतीय, राष्ट्रीय और महाद्विपीय स्तर पर मूल्यांकन किया जाएगा।
कार्यान्वयन चरण का मकसद है धर्मप्रांतीय स्तर पर दैनिक प्रेरितिक जीवन में सिनॉडालिटी (एक साथ चलने) का अभ्यास करने में मदद करना। यह प्रशिक्षण, ध्यान से सुनना, साझा नेतृत्व, आध्यात्मिक आत्मपरख, पारदर्शी प्रशासन और नए सिरे से मिशनरी पहुँच को बढ़ावा देता है। इसका मकसद कलीसिया की संरचना और क्रिया-कलाप को अधिक सहभागी और विश्वासियों की जरूरतों के हिसाब से प्रत्युत्तर देनेवाला बनाना है।
पत्र में याद दिलाया गया है कि इस प्रक्रिया को मार्गदर्शन देने और इसमें साथ देने की मुख्य जिम्मेदारी धर्मप्रांतीय धर्माध्यक्ष की है। इसमें सभी स्तर पर सिनॉडल (सहभागिता) जीवन को बनाए रखने और धर्मप्रांतीय प्रतिभागिता एवं सिनॉडल टीम की भूमिका पर भी जोर दिया गया है।
सीसीबाई ने पहले ही एक राष्ट्रीय सिनॉडल टीम बनाई है, जिसे फादर क्रिस्टोफर विमलराज समन्वित करेंगे। धर्मप्रांतीय टीमों को उनके काम में समर्थन देने और साथ देने के लिए हर महीने ऑनलाइन मीटिंग आयोजित की जाएंगी।
कार्डिनल फेराओ ने सभी धर्मप्रांतों से अपील की है कि वे सिनॉडल प्रक्रिया को अपनी नियमित प्रेरितिक योजना में शामिल करें और सिनॉड सचिवालय और सीसीबीआई से मिले संसाधन का पूरा इस्तेमाल करें। उन्होंने धर्माध्यक्षों, पुरोहितों, धर्मसंघियों और लोकधर्मियों से एक सुननेवाली, समझनेवाली और मिशन पर ध्यान देनेवाली कलीसिया बनाने के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया है।
अपने संदेश के अंत में, उन्होंने उम्मीद जताई है कि पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन में, भारत की कलीसिया एक सच्चे सिनॉडल, सहभागी और मिशनरी समुदाय के रूप में आगे बढ़ेगी।