अफगानिस्तान : पांच साल से कम उम्र के 37 लाख बच्चे कुपोषण के खतरे में
यूनिसेफ की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पांच साल से कम उम्र के 37 लाख अफगान बच्चों को कुपोषण का खतरा है, और देश में सबसे अधिक भूख के दिनों में समय से पहले बचाव के उपायों में तुरंत निवेश करने की अपील की गई है।
यूनिसेफ की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अफगानिस्तान में पाँच साल से कम उम्र के 37 लाख बच्चों के लिए कुपोषण का खतरा बढ़ गया है, क्योंकि खाने की कमी और खराब पोषण देश के सबसे छोटे और सबसे कमजोर बच्चों की जान के लिए खतरा बना हुआ है।
सोमवार को प्रकाशित रिपोर्ट, 'टू लिटिल, टू लेट: द डाइट क्राइसिस फेसिंग यंग चिल्ड्रन इन अफगानिस्तान', पूरे देश में बच्चों के पोषण में खतरनाक गिरावट को दिखाती है, और वार्षिक कुपोषण की अवधि तेज होने से पहले बचाव के उपायों में तुरंत निवेश करने की अपील करती है।
अफगानिस्तान दशकों के संघर्ष, आर्थिक गिरावट और बार-बार होनेवाले जलवायु परिवर्तन के बाद दुनिया के सबसे गंभीर मानवीय संकटों का सामना कर रहा है। अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद से, देश ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मदद में भारी गिरावट, बड़े पैमाने पर गरीबी और पहले से ही कमजोर स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा पर बढ़ते दबाव का अनुभव किया है। महिलाओं और लड़कियों को भी शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन पर बड़ी पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे देशभर में परिवारों के सामने आनेवाली चुनौतियाँ और बढ़ गई हैं।
बच्चों में कुपोषण का विश्लेषण
पहली बार, यूनिसेफ ने अफगानिस्तान के हर प्रांत में बच्चों के एक ही दल में घरेलू खाने और पोषण की कमी के साथ-साथ बच्चों में कुपोषण का भी आकलन किया है। विश्वेषण में शुरुआती चेतावनी के संकेतों की पहचान की गई है - जिसमें खाने में विविधता में कमी, खाना छोड़ना, बच्चों का जरूरत से कम खाना और भूखे रहना शामिल है - जो अक्सर तीव्र कुपोषण से पहले होते हैं।
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब अफ़गानिस्तान उस समय में प्रवेश कर रहा है जब तीव्र कुपोषण पारंपरिक रूप से जुलाई और सितंबर के बीच अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच जाता है। हालांकि, देश के पोषण दल के हालिया डेटा से पता चलता है कि संकट उम्मीद से पहले बिगड़ रहा है, 2025 की तुलना में अफगानिस्तान के 34 प्रांतों में से 26 में कुपोषण बढ़ रहा है।
दो साल से कम उम्र के बच्चों पर सबसे ज्यादा बोझ पड़ रहा है। वे देशभर में गंभीर तीव्र कुपोषण के 83 प्रतिशत और मध्यम तीव्र कुपोषण के 77 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार हैं।
अफगानिस्तान में यूनिसेफ के प्रतिनिधि डॉ. ताजुदीन ओयेवाले ने कहा, "अफगानिस्तान में छोटे बच्चे भूखे काल शुरू होने से पहले ही कुपोषण के शिकार हो रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "ये नए नतीजे हमें बच्चों के गंभीर कुपोषण तक पहुंचने से पहले कार्रवाई करने का मौका देते हैं। जब परिवार खाना छोड़ना शुरू कर देते हैं या पौष्टिक खाना कम कर देते हैं, तो यह सिर्फ कठिनाई की निशानी नहीं है - यह एक शुरुआती चेतावनी है कि बच्चे को जल्द ही गंभीर कुपोषण हो सकता है।"
हालांकि जान बचाने के लिए इलाज जरूरी है, लेकिन डॉ. ओयेवाले ने जोर देकर कहा कि रोकथाम में ज़्यादा निवेश की जरूरत है, जिसकी शुरुआत छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं के आहार में सुधार से होनी चाहिए।
कई कारणों से संकट पैदा हुआ
यूनिसेफ के मुताबिक, बच्चों के बिगड़ते पोषण को न सिर्फ खाने की कमी से बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि बीमारियों का फैलना, कम वैक्सीनेशन कवरेज, पानी, सफाई और स्वच्छता की कमी, और फंडिंग एवं जरूरी सप्लाई की बढ़ती कमी से भी बढ़ावा मिल रहा है।
ये दबाव मिलकर बच्चों में गंभीर कुपोषण की संभावना को बढ़ा रहे हैं और एक ऐसे तालमेल वाले जवाब की जरूरत को दिखाते हैं जिसमें पोषण, स्वास्थ्य देखभाल, पानी और सफाई, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा सेवा शामिल हों।
तीव्र कुपोषण एक गंभीर और संभावित रूप से जीवन-घातक स्थिति है जिसमें एक बच्चा अपनी ऊंचाई के हिसाब से खतरनाक रूप से पतला हो जाता है, अक्सर भोजन की कमी और बीमारी या दोनों के कारण। शीघ्र उपचार के बिना, यह तेजी से घातक हो सकता है।
रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना करनेवाले घरों में रहनेवाले बच्चों को भूखे के मौसम में तीव्र कुपोषण से पीड़ित होने की छह गुना अधिक संभावना है।
तुरंत कार्रवाई की मांग
यूनिसेफ ने दानदाताओं और साझेदारों से अपील की है कि वे संकट के अधिक गहराने से पहले निवारक पोषण सेवा को मजबूत करने के लिए तुरंत फंडिंग दें।
एजेंसी अपने "फर्स्ट फूड्स" पहल में ज्यादा निवेश की मांग कर रही है, जिसमें छह से 23 महीने के बच्चों को प्राथमिकता दी जाती है, साथ ही निवारक पोषण सेवा को बढ़ाया जाता है और बच्चों के पोषण जरूरतों को पूरा करनेवाली जरूरी सेवाओं को बेहतर तरीके से शामिल किया जाता है।
रिपोर्ट के अंत में कहा गया है कि "चेतावनी के संकेत पहले से दिख रहे हैं, और जवाब भी पहले आना चाहिए।"