पोप : विमान से शांति आनी चाहिए, युद्ध और तबाही नहीं

पोप लियो 14वें ने इटली की नेशनल एयरलाइन ITA एयरवेज़ को परमाध्यक्ष को प्रेरितिक यात्राओं पर ले जाने के लिए धन्यवाद दिया और युद्ध के मैदानों में मौत एवं तबाही के वाहक के रूप में विमानों के इस्तेमाल पर दुख जताया।

पोप लियो 14वें ने 23 मार्च को वाटिकन के क्लेमेंटीन सभागार में ITA एयरवेज़ के संचालकों और कर्मचारियों से मुलाकात की। वाटिकन में उनका सहर्ष स्वागत करते हुए उन्होंने कहा ,मुझे ITA एयरवेज़ के प्रतिनिधियों और लुफ्थांसा ग्रुप के एक प्रतिनिधि-मंडल का स्वागत करते हुए खुशी हो रही है।

पोप पॉल षष्टम से शुरू होकर, हवाई जहाज़ से परमाध्यक्षों की प्रेरितिक यात्राओं का इतिहास खास तौर पर इटालियन नेशनल एयरलाइन, पहले अल इतालिया और अब ITA एयरवेज़ से जुड़ा है। और मुझे भी, ईश्वर ने चाहा तो, बीस दिनों में अपनी अफ़्रीका यात्रा के लिए आपकी सेवाओं का फिर से फ़ायदा उठाने का मौका मिलेगा।

कीमती सेवा के लिए शुक्रिया
पोप लियो ने परमाध्यक्षों और उनके साथ यात्रा में गये सभी लोगों की ओर से पुनः उनकी सेवा के लिए धन्यवाद दिया। संत पापा ने कहा कि विमान में ऐसे लोग भी मिलते हैं जो एक शांत, लगभग परिवार जैसा माहौल बना सकते हैं, जहाँ सम्मान और भक्ति का मेल होता है।

पोप ने कहा, “आपसे मिलकर वे व्यक्तिगत रुप से और परमधर्मपीठ के ओर से इस कीमती सेवा के लिए शुक्रिया अदा करने का मौका मिला है। मुझे यह भी भरोसा है कि इस मज़बूत और अच्छे सहयोग की भावना से, संत पापा, उनके साथियों और उनके साथ उड़ान भरने वाले पत्रकारों का स्वागत उस खास ध्यान और भलाई को दिखाता रहेगा, जिसकी आज के समय में और भी ज़रूरत है।”

विमान हमेशा शांति के वाहक
पोप ने कहा कि परमाध्यक्ष की उड़ानें आज के ज़माने में पेत्रुस के उत्तराधिकारियों के मिशन की सबसे साफ़ निशानियों में से एक हैं। खास तौर पर, अपनी प्रेरितिक यात्राओं में, संत पापा सभी को शांति के दूत के तौर पर दिखाई देते हैं: उनके रास्ते वही हैं जो हमेशा होने चाहिए: बातचीत, मुलाकात और भाईचारे के पुल। हवाई जहाज़ हमेशा शांति के वाहक होने चाहिए, युद्ध के कभी नहीं! किसी को भी आसमान से मौत और तबाही के खतरों से डरना नहीं चाहिए। 20वीं सदी के दुखद अनुभवों के बाद, हवाई बमबारी पर हमेशा के लिए रोक लग जानी चाहिए थी! इसके बजाय, वे अभी भी मौजूद हैं और प्रौद्योगिक विकास, जो अपने आप में सकारात्मक है, युद्ध की सेवा में लगा दिया गया है। यह तरक्की नहीं, बल्कि पीछे हटना है!

आगे पोप ने कहा कि, इस हालात में, स्वर्ग में शांति के रास्ते बनाना और भी ज़रूरी हो जाता है। संत पापा उन्हें  धन्यवाद देते हें क्योंकि, जो मिशन ईश्वर ने उन्हें सौंपा है, उसमें संत पापा उनपर भरोसा कर सकते हैं।

अंत में पोप ने ITA एयरवेज़ और लुफ्थांसा ग्रुप को उनकी यात्रा में सफलता की शुभकामनाएँ देते हुए उन्हें और उनके परिवारों को आशीर्वाद दिया।