पोप लियो : पास्का हमें उस आशा के लिए खोलती है जो खत्म नहीं होती

पास्का महापर्व के समारोही ख्रीस्तयाग में पोप लियो 14वें ने विश्वासियों को याद दिलाया कि पास्का की घोषणा : ख्रीस्त मृतकों में से जी उठे हैं, एक ऐसी आशा के लिए खोलती है जो कभी खत्म नहीं होती, एक ऐसी रोशनी के लिए जो कभी फीकी नहीं पड़ती, एक ऐसी खुशी की ओर जिसे कोई छीन नहीं सकता: मौत को हमेशा के लिए हरा दिया गया है; अब मौत का हम पर कोई असर नहीं है!"

पोप लियो 14वें ने पास्का रविवार को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में प्रभु येसु के पुनरूत्थान का समारोही मिस्सा बलिदान अर्पित किया।

डच फूलों की 40वीं सालगिरह
पास्का पर्व संत पेत्रुस महागिरजाघर में मनाया गया जिसे 65 हजार से ज्यादा ट्यूलिप, डफोडिल, हायसिंथ; अलग-अलग तरह के 7,800 फूलों के साथ-साथ 1,200 से ज़्यादा प्लूमोसा और लंबी विलो कैटकिन डालियों से सजाया गया था।

यह 40वाँ साल है जब नीदरलैंड् ने ईस्टर पर पोप को इन फूलों का तोहफा दिया गया है। इस पहल को डच फूल बेचनेवालों और स्वयंसेवकों ने डच धर्माध्यक्षीय सम्मेलन और "ब्लोमेनप्राक्ट रोम" फ़ाउंडेशन के साथ मिलकर बढ़ावा दिया है।

पोप ने अपने प्रवचन में कहा, “आज सारी सृष्टि नयी ज्योति से चमक रही है, महिमा का एक गीत पृथ्वी से उठ रहा है और हमारे हृदय आनंदित हैं- ख्रीस्त मृतकों में से जी उठे हैं और उनके साथ हम भी अपने में नया जीवन के लिए ऊपर उठाये जाते हैं।”

पास्का परिपूर्ण आनन्द लाता है
पास्का की यह घोषणा हमारे जीवन और इतिहास के रहस्य का आलिंगन करती है, हमारी मृत्यु तक पहुंचती, जहाँ हम अपने में भय का अनुभव करते और कभी-कभी निराश हो जाते हैं। यह हमारे लिए आशा को लेकर आती है जो कभी निराश नहीं करती है, एक ज्योति जो कभी धूमिल नहीं होती है, एक आनंद भरी खुशी को जिसे हम से कोई छीन नहीं सकता है- मृत्यु पर हमेशा के लिए जीत हुई है, मृत्यु का हमारे ऊपर कोई शक्ति नहीं रह गई है।

पोप लियो ने कहा, “यह हमारे लिए एक संदेश है जिसे हमेशा स्वीकार करना सदैव सहज नहीं होता है, एक प्रतिज्ञा जिसका आलिंगन करने हेतु हम अपने में कठिनाई का अनुभव करते हैं, क्योंकि मृत्यु का दंश हमें सदैव, अंदर और बाहर से भयभीत करता है।

आशा को अपनाने की चुनौती
अंदर से यह शक्ति हमें भयभीत करती है जब पापों का भार हमें अपने “पंखों को फैलने” और उड़ने में बाधा उत्पन्न करता है,या जब निराशा या अकेलेपन की अनुभूति हमारी आशा को खत्म कर देती है। यह तब भी हम पर हावी हो जाता है जब हमारी चिंताएँ या हमारा गुस्सा जीने की खुशी को कुलच देती है, जब हम दुःखी या थके हुए होते हैं, या जब हम धोखा खाने या छोड़ दिये जाने का अनुभव करते हैं। जब हमें अपनी कमजोरी, दुःख और रोजमर्रा की भागदौड़ को स्वीकार करना पड़ता है, तो हमें ऐसा लग सकता है जैसे हम एक ऐसी सुरंग में फँस गए हैं जिसका कोई अंत नहीं दिख रहा है।

बाहर से, भय सदैव छिपा हुआ है। हम इसे अन्याय में उपस्थित पाते हैं, पार्टी के स्वार्थ में, गरीबों पर ज़ुल्म में, सबसे कमजोर लोगों पर ध्यान न देने में। हम इसे हिंसा में, दुनिया के जख्मों में, हर कोने से उठनेवाली दर्द की चीख में देखते हैं, उन जुल्मों की वजह से जो हमारे बीच सबसे कमजोर लोगों को कुचल देती है, मुनाफे की लोभ जिसे धरती के संसाधनों को लूटा जाता है, युद्ध की हिंसा जो मार डालती और नष्ट करती है।

निगाहों को उठाने और हृदयों को खोलने का निमंत्रण
इस सच्चाई में, ईश्वर का पास्का हमें अपनी निगाहों को उठाने और अपने हृदयों को खोलने का निमंत्रण देता है। यह हमारी आत्मा के अंदर और पूरे इतिहास में वादा की गई जीत के बीज को पोषित करता है। यह हममें गति लाती है, मरियम मगदलेना और प्रेरितों की भांति, जिससे हम येसु को खाली कब्र में खोजे, और इसलिए हर मृत्यु में हम अनुभव करते हैं कि हमारे लिए एक नये जीवन का स्थान है। ईश्वर जीवित हैं और हमारे संग रहते हैं। अंधेरे में खुलने वाली पुनरुत्थान की दरारों के जरिए, वे हमारे दिलों में भरोसे रूपी उम्मीद को छोड़ते हैं जो हमें सहारा देती है: मौत की ताकत हमारे जीवन की आखिरी मंजिल नहीं है। हम सभी, एक बार और हमेशा के लिए, पूर्णता के रास्ते की ओर अग्रसर होते हैं, क्योंकि मसीह में हम भी जी उठे हैं।

पोप फ्रांसिस हमें अपने प्रथम प्रेरितिक प्रबोधन, एवंनजेली गौदियुम में ख्रीस्त के पुनरूत्थान की सुनिश्चितता की याद करते हुए कहते हैं, “यह अतीत की घटना नहीं है, इसमें एक आवश्यक शक्ति है जिससे यह दुनिया भरी है। जहाँ सब मौन होते हैं, पुनरूत्थान की निशानी अचानक फूट कर निकलती है। यह एक अवरोधी शक्ति है। बहुधा ऐसा लगता है कि ईश्वर का अस्तित्व नहीं है- हमारे जीवन की सारी चीजों में हम अन्याय, बुराई, उदासीनता और क्रूरूता को देखते हैं। लेकिन यह भी सत्य है कि अंधेरे के बीच में कुछ नया सदैव जीवन के लिए फूट कर निकलता है और यह आज नहीं तो कल फल उत्पन्न करता है।”