पोप लियो : तकनीकी मानव की सेवा करे, न कि उनकी जगह ले

60वें विश्व सामाजिक संचार दिवस के लिए अपने संदेश में, पोप लियो 14वें ने इस बात पर जोर दिया कि यह जरूरी है कि तकनीकी में नई चीजें, खासकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मानव की सेवा करे, न कि मानव की गरिमा को कम करे या उसकी जगह ले।

चेहरा और आवाज हर इंसान की खासियतें होती हैं, और इंसान की पहचान एवं रिश्तों की नींव बनती हैं। इस सच्चाई पर चिंतन करते हुए, पोप लियो 14वें ने 60वें विश्व सामाजिक संचार दिवस के लिए अपना संदेश जारी किया, जो 17 मई 2026 को मनाया जाएगा। संदेश में डिजिटल संचार और कृत्रिम बुद्धिमता पर ध्यान केंद्रित किया गया है। साथ ही, तकनीकी विकास के युग में मानव प्रतिष्ठा की रक्षा करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

पोप लियो याद दिलाते हैं कि मानव प्राणी की सृष्टि ईश्वर की छवि और प्रतिरूप में हुई है और शब्द के द्वारा वह संबंध जोड़ने के लिए बुलाया गया है। इसलिए, चेहरों और आवाजों की सुरक्षा का मतलब है हर इंसान में मौजूद दिव्य छाप की रक्षा करना और हर मानव जीवन की बुलाहट को बनाए रखना।

तकनीकी की मानवशास्त्रीय चुनौती
पोप चेतावनी देते हैं कि डिजिटल टेक्नोलॉजी, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम जो आवाजों, चेहरों और भावनाओं की नकल कर सकते हैं, मानवीय बातचीत के जरूरी पहलुओं को बदलने का खतरा पैदा करते हैं।

उन्होंने कहा, चुनौती मूल रूप से तकनीकी नहीं बल्कि मानवशास्त्रीय है, यह मानव पहचान की रक्षा करने की बात है एवं सच्चा संबंध स्थापित करने की बात है।  

पोप ने सोशल मीडिया एल्गोरिदम के असर की ओर ध्यान दिलाया, जो सोचने-समझने के बजाय तेज भावनात्मक प्रतिक्रिया को ज्यादा अहमियत देते हैं, जिससे आलोचनात्मक सोच कमजोर होती है और सामाजिक ध्रुवीकरण बढ़ता है।

वह आगे कहते हैं कि जानकारी, रचनात्मकता और फैसले लेने के लिए कृत्रिम बुद्धिमता पर बढ़ती निर्भरता से व्याख्या करने की क्षमता, कल्पना और व्यक्तिगत जिम्मेदारी कम होने का भी खतरा है।

असली, नकली और सामाजिक प्रभाव
पोप लियो डिजिटल माहौल में असली और नकली के बीच फर्क करने में आनेवाली मुश्किल पर जोर देते हैं, जहाँ स्वचालित एजेंट और चैटबॉट सार्वजनिक विवाद और लोगों की पसंद पर असर डाल सकते हैं, और भावनात्मक प्रतिक्रिया एवं व्यक्तिगत बातचीत को आकार दे सकते हैं।

ऐसी गतिविधियाँ न केवल व्यक्ति को प्रभावित कर सकती हैं बल्कि सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन को भी प्रभावित करती हैं।

जिम्मेदारी, सहयोग और शिक्षा
इन चुनौतियों से निपटने के लिए, पोप जिम्मेदारी, सहयोग और शिक्षा को जरूरी आधार मानते हैं। तकनीकी विकास करनेवाले, राजनीतिक अधिकारियों, मीडिया पेशेवरों और शिक्षकों को सुझाव देते हुए उन्होंने कहा कि वे पारदर्शिता को बढ़ावा दें, मानव सम्मान की रक्षा करें और जानकारी की ईमानदारी सुनिश्चित करें।

वे लिखते हैं कि डिजिटल विकास को आम भलाई की ओर ले जाने के लिए संस्थानों और विभागों के बीच सहयोग जरूरी है।

मीडिया शिक्षा और डिजिटल जागरूकता
पोप लियो ने मीडिया, सूचना और कृत्रिम बुद्धिमता साक्षारता में शिक्षा की अहमियत पर जोर दिया, जिससे आलोचनात्मक जागरूकता बढ़ती है, व्यक्ति की पहचान सुरक्षित रहती है, और संचार की एक जिम्मेदार संस्कृति को समर्थन मिलता है।

पोप ने अंत में कहा कि चेहरे और आवाज की देखभाल, संचार के मानवीय पहलू को बनाए रखने और तकनीकी प्रगति को मानव की सेवा की ओर मोड़ने के लिए जरूरी है।