पोप : पर्यावरण संकट सामाजिक आर्थिक संकट का छोटा चेहरा है
10वें ऑस्ट्रियन विश्व शिखर सम्मेलन के लिए प्रेषित एक वाडियो संदेश में पोप लियो 14वें ने विश्वास, आशा और प्रेम को एक ऐसी विषयवस्तु के रूप में बताया है जो जलवायु संकट पर चिंतन करने में मदद कर सकती हैं लेकिन सामाजिक, नैतिक और आर्थिक मामलों को भी छूती है।
पोप लियो 14वें ने 16 जून को जारी एक वीडियो संदेश में कहा, “जलवायु संकट से असरदार तरीके से निपटने के लिए, हमें अपने समाज की बुनियाद में मौजूद सामाजिक और नैतिक मुद्दों पर ध्यान देना होगा, जैसे सभी मनुष्यों की समान इज्जत और मानवाधिकारों की अहमियत।”
पोप लियो ने कृत्रिम बुद्दिमता के समय में मानव की सुरक्षा पर हाल ही में प्रकाशित, अपने प्रेरितिक विश्वपत्र, मनिफिका उमानितास का जिक्र करते हुए कहा, “पर्यावरण संकट ‘कोई अकेला मुद्दा नहीं है, बल्कि आज के सामाजिक-आर्थिक संकट का पारिस्थितिक पहलू है’।”
पोप ने इस बात पर जोर दिया कि कैसे विश्वास, आशा और प्यार तीन ऐसे विषय हैं जो पर्यावरण संकट से निपटने के तरीके पर सोचने में मदद करते हैं।
पोप का वीडियो संदेश दसवें ऑस्ट्रियन वर्ल्ड समिट को दिया गया, जो वियना में होनेवाला एक वार्षिक सम्मेलन है, जिसका मकसद जलवायु संकट से अलग समाधान और विचार विमर्श के लिए एक प्लेटफॉर्म देना है।
यह 16 जून को हो रहा है और इसे श्वार्ज़नेगर जलवायु पहल आयोजित कर रहा है, जिसे अभिनेता और कलिफोर्निया के पूर्व गवर्नर, अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर ने लॉन्च किया था।
जलवायु संकट सामाजिक-आर्थिक संकट का एक रूप है
पोप लियो 14वें ने याद किया कि कैसे उन्होंने मनिफिका उमानितास में “सभी इंसानों की समान गरिमा और बुनियादी मानवाधिकारों के महत्व पर जोर दिया है, इन दोनों को आम भलाई, चीजों का अंतिम लक्ष्य, सहायकता, एकात्मता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को ठीक से लागू करके अच्छी तरह मजबूत किया जा सकता है।”
पोप ने कहा, “ये जरूरी निजी और सामाजिक मामले जलवायु संकट से गहराई से जुड़े हुए हैं, जो, जैसा कि मैंने कहा, बड़े सामाजिक-आर्थिक संकट का एक रूप है– और एक अहम रूप है।”
“असल में, जब तक इन पर ध्यान नहीं दिया जाता, पर्यावरण की रक्षा के लिए किसी भी तकनीकी समाधान को अपना मनचाहा मकसद हासिल करने का मौका नहीं मिलेगा।”
इस बारे में, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाधान निकालते और विचार करते समय सबसे गरीब और पर्यावरण के नुकसान के सबसे ज्यादा खतरे में रहनेवाले लोगों पर खास ध्यान देने की जरूरत है।
आस्था जीवन और प्रकृति की रक्षा करने में मदद करती है
पोप लियो ने बतलाया कि ये बहुआयामी दृष्टिकोण, जो हमारे समाज पर असर डालनेवाले अलग-अलग मुद्दों के आपस में जुड़े होने को मानता है, विश्वास के दृष्टिकोण से जुड़ा है।
उन्होंने समझाया, "जो लोग मानते हैं कि हमारी दुनिया ईश्वर ने बनाई है और यह अपने आप में अच्छी है, उन्हें सृष्टि की देखभाल करने की और भी बड़ी ज़िम्मेदारी लेनी पड़ती है, क्योंकि यह उनके विश्वास की जरूरत है।"
उन्होंने पोप फ्रांसिस के 2015 के प्रेरितिक विश्व पत्र, लौदातो सी’ का ज़िक्र करते हुए कहा, "ईश्वर की सृष्टि की रक्षा करने की अपनी बुलाहट को जीना, सदाचारी जीवन जीने के लिए जरूरी है।"
पोप लियो ने यह भी बताया कि कैसे कई अलग-अलग धर्म सृष्टि को एक ईश्वरीय उपहार मानते हैं और जीवन की पवित्रता पर जोर देते हैं, इस तरह "धार्मिक विश्वास जीवन की रक्षा करने और प्रकृति की देखभाल करने की पूरी इच्छा को मजबूत करते हैं।"
उम्मीद एक बहुत बड़ी ताकत है
उम्मीद के बारे में, पोप लियो ने माना कि आज दुनिया जिन चुनौतियों और तनावों का सामना कर रही है, उनकी वजह से “यह जागरूकता बढ़ रही है कि दुनिया के प्रति सम्मान की कमी, प्राकृतिक संसाधनों की लूट और जलवायु परिवर्तन की वजह से जीवन की गुणत्ता में लगातार गिरावट से शांति को खतरा है।”
उन्होंने यह भी बताया कि जलवायु के मुद्दों पर बातचीत में अक्सर “रास्ता बदलने का डर, ताकत खोने का डर और अनिश्चित नतीजों का डर” होता है।
इस बारे में, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग, “एकजुट और आगे की सोच वाले बहुपक्षवाद” पर जोर दिया और इन डरों पर काबू पाने के लिए हिम्मत दी।
पोप ने इस बात पर बल दिया कि धार्मिक नेता और समुदाय इसमें अहम भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि “बाइबल में ऐसे कई उदाहरण हैं कि कैसे उम्मीद से लोगों के डर पर काबू पाया जा सकता है।”
“यह सिर्फ अच्छा ही नहीं बल्कि सच में मुमकिन भी है कि COP30 में हुई तरक्की के बाद ऐसे समाजों की ओर सही बदलाव हो, जहाँ आम भलाई को मुनाफे से ज्यादा अहमियत दी जाए, और आर्थिक मॉडल एकजुटता और इंसानी इज्जत पर आधारित हों।”
हालांकि, उन्होंने कहा कि इसके लिए अमीर देशों को चाहिए कि वे गरीब देशों को पैसे से मदद करें, और इन देशों की मदद “एक नया इंसान-केंद्रित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचा” बनाकर करनी होगी।
प्यार की सभ्यता का निर्माण
अंत में, पोप लियो ने प्यार विषयवस्तु और “हमारे पर्यावरण की देखभाल की एक सच्ची संस्कृति बनाने” के महत्व पर जोर दिया, जिसमें पोप फ्राँसिस द्वारा कहे गये ‘नागरिक और राजनीतिक प्यार’ शामिल हैं।
पोप लियो ने लौदातो सी का फिर से जिक्र करते हुए कहा, “समाज को ज्यादा मानवीय, मानव के ज्यादा लायक बनाने के लिए, सामाजिक जीवन में प्यार – राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक – को नई अहमियत देनी होगी, जो सभी कार्यक्रमों के लिए लगातार और सबसे बड़ा नियम बन जाए,” जिससे जलवायु संकट का सामना करने के लिए बड़ी रणनीतियाँ बनाने में मदद मिलेगी।
पोप लियो 14वें ने यह उम्मीद जताते हुए बात समाप्त की कि सम्मेलन में हिस्सा लेनेवाले लोग देखभाल की संस्कृति को बढ़ावा देंगे और प्यार की सभ्यता बनाने में योगदान करेंगे।