2 सितंबर, 2025, सामान्य समय के बाईसवें सप्ताह का मंगलवार

" चुप रह, इस मनुष्य से बाहर निकल जा"।

लूकस 4:31-37
वे गलीलिया के कफ़रनाहूम नगर आये और विश्राम के दिन लोगों को शिक्षा दिया करते थे।
लोग उनकी शिक्षा सुन कर अचम्भे में पड़ जाते थे, क्योंकि वे अधिकार के साथ बोलते थे।
सभागृह में एक मनुष्य था, जो अशुद्ध आत्मा के वश में था। वह ऊँचे स्वर से चिल्ला उठा,
"ईसा नाज़री! हम से आप को क्या? क्या आप हमारा सर्वनाश करने आये हैं? मैं जानता हूँ कि आप कौन हैं-ईश्वर के भेजे हुए परमपावन पुरुष।"
ईसा ने यह कहते हुए उसे डाँटा, " चुप रह, इस मनुष्य से बाहर निकल जा"। अपदूत ने सब के देखते-देखते उस मनुष्य को भूमि पर पटक दिया और उसकी कोई हानि किये बिना वह उस से बाहर निकल गया।
सब विस्मित हो गये और आपस में यह कहते रहे, "यह क्या बात है! वे अधिकार तथा सामर्थ्य के साथ अशुद्ध आत्माओं को आदेश देते हैं और वे निकल जाते हैं।"
इसके बाद ईसा की चर्चा उस प्रदेश के कोने-कोने में फैल गयी।

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