देश और देश के युवाओं के लिए प्रार्थना की एक जोरदार अपील
बॉम्बे महाधर्मप्रांत के सहायक धर्माध्यक्ष, बिशप दोमिनिक सावियो फर्नांडीस ने देश और देश के युवाओं के लिए प्रार्थना की एक जोरदार अपील जारी की है। उन्होंने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देश में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा युवाओं पर हो रहे उत्पीड़न की निंदा की है।
वे एक वीडियो जारी करते हुए कहते हैं, “प्यारे भाइयो एवं बहनो, आज मैं बड़े भारी दिल और एक अत्यन्त जरूरी अपील के साथ आया हूँ, कृपया हमारे देश भारत के लिए निष्ठा के साथ प्रार्थना करें और विशेषकर, हमारे युवाओं के लिए जो न्याय और अपने लोकतांत्रिक अधिकार के लिए अपनी आवाज उठा रहे हैं।”
वर्तमान परिस्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए धर्माध्यक्ष कहते हैं, “कुछ समय से हम प्रदर्शनों को बढ़ते देख रहे हैं : छात्रों, युवाओं, जेन जी, पत्रकार, नागरिक समाज और कई आम नागरिकों का दलों द्वारा। इन प्रदर्शनों की शुरूआत उन चिंताओं के बीच हुई है जैसे, नीट पेपर लीक, चुनावी कानून और एसआईआर इत्यादि। रिपोर्ट दिखाते हैं कि इस प्रक्रिया के दौरान 13 करोड़ से अधिक लोगों के नाम प्रस्तावित चुनाव सूची से काट दिया गया है। बहिष्कार का यह पैमाना नागरिकों में बहुत अधिक चिंता उत्पन्न कर रहा है कि क्या सभी सक्षम नागरिक वोट कर पायेंगे जो उनका लोकतांत्रिक अधिकार है।”
संविधान में अधिकारों की रक्षा
वे अवगत कराते हैं कि हमारे संविधान का अनुच्छेद 19 बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करता है, निहत्था और शांतिपूर्ण सभाएँ करने का अधिकार देता है। इसलिए एक स्वस्थ लोकतंत्र, अधिकारियों से सवाल करने, असहमति जताने और उनसे जवाबदेही की मांग करने का अधिकार देता है। सबसे अधिक चिंता की बात ये है कि कुछ प्रदर्शनों को किस तरह से रोका गया है। प्रदर्शन कार्यों के खिलाफ पुलिस की कारर्वाई की तस्वीर और वीडियो सामने आ रहे हैं। सोशल मीडिया में क्रूरतापूर्वक लाठी चलाये जाने के वीडियो देखे जा सकते हैं। लोगों के हटने पर भी आँसू गैस छोड़ा जाना, हिरासत में लिया जाना, बल प्रयोग और महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न हो रहे हैं। महिला पत्रकारों की ओर से भी शिकायत है कि हाल के प्रदर्शनों में लोगों को क्रूरता से पीटा गया, पुलिसवालों ने यौन उत्पीड़न किया है। और इससे भी हैरान करनेवाली बात है कि पुलिस अधिकारी पुलिस के खिलाफ एफआईआर करने से इंकार कर रही है। यह स्पष्ट है कि यदि जिन्हें कानून की रक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है वे स्वयं नागरिकों की मानव प्रतिष्ठा और उनके अधिकारों का हनन करते हैं तो यह गंभीर मामला है।
मेरा विचार है कि इस तरह की स्थिति में गृहमंत्री और प्रधानमंत्री को सीधे हस्ताक्षेप करना चाहिए। पुलिस की जिम्मेदारी मुश्किल जरूर है, उन्हें जनता को व्यवस्थित रखना और नागरिक की रक्षा करना है, न कि उन्हें हानि या चोट पहुँचाना है। अधिकारियों को हमेशा संयम, जवाबदेही और सम्मान के साथ मानव गरिमा के साथ अपना काम करना चाहिए, बल का प्रयोग कभी भी लोगों को चुप करने या अपमानित करने का साधन न बने।
मेरी विनम्र अपील सभी से है कि हम अपनी आवाज बंद न कर लें, बल्कि हमारी आवाज को हमेशा शांतिपूर्ण रहने दें। आइये, हम हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अनुसरण करते हुए हिंसा का जवाब अहिंसा से दें। हमारी मांग तभी मजबूत होगी जब हम इसे सच्चाई, साहस, अनुशासन, प्रेम, एक दूसरे के लिए सम्मान और अहिंसा के साथ रखेंगे।
कलीसिया की जिम्मेदारी
कलीसिया का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, “इस सब में कलीसिया कहाँ खड़ी है, कलीसिया उदासीन नहीं रह सकती हैं जब मानव गरिमा खतरे में हो। नबी इसायस कहते हैं, “भलाई करना सीखो। न्याय के अनुसार आचरण करो, पद्दलितों को सहायता दो...।”(इसायस 1: 17) उन्होंने कहा कि ये सिर्फ सुन्दर वचन नहीं हैं बल्कि इनको कार्य में बदलना चाहिए। काथलिक कलीसिया सिखाती है कि राजनीतिक अधिकार जनता की भलाई के लिए होती है और मानव के मौलिक अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए। नागरिकों की भी यह जिम्मेदारी है कि वे अपने देश के सामाजिक और राजनीतिक जीवन में हिस्सा लें।
इसलिए वे ख्रीस्तीयों से प्रार्थना करने का आह्वान करते हैं कि सबसे बढ़कर हम भारत के लिए प्रार्थना करने, “सच्चाई के लिए, न्याय के लिए और हमारे लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रार्थना के लिए। हम उन सभी के लिए प्रार्थना करें जिन्हें लगता है कि उनकी आवाज दबा दी जायेगी और सबसे बढ़कर आइये, हम हमारे युवाओं जेन जी की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करें। जिन्होंने साहसपूर्वक और निःस्वार्थ रूप से ये कदम उठाया है और जो सिर्फ अपने लिए आवाज नहीं उठा रहे हैं बल्कि हरेक नागरिक के अधिकार के लिए आवाज उठा रहे हैं।
प्रार्थना करने का आह्वान
आइये, हम महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करें जो इन शांतिपूर्ण आंदोलनों में भाग ले रहे हैं।
आइये हम उन पत्रकारों के लिए प्रार्थना करें जो कठिनाइयों के बीच भी और कभी कभी खतरनाक परिस्थितियों में भी रिपोर्टिंग की अपनी जिम्मेदारी को पूरा करने का प्रयास करते हैं जो वे देखते हैं। आइये हम हमारे पुलिसकर्मियों के लिए प्रार्थना करें, ईश्वर उन्हें सद्बुद्धि प्रदान करें और उन्हें दया और साहस प्रदान करें, ताकि वे अपने अधिकार का प्रयोग सही तरीके से कर सकें। उन सभी नागरिकों के मानव अधिकार का सम्मान और रक्षा कर सकें जिनकी रक्षा करने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई है।
बोम्बे के धर्माध्यक्ष ने राजनीतिक नेताओं और संस्थाओं के लिए भी प्रार्थना करने की सलाह दी है कि वे “हरदम याद रख सकें कि पद हमेशा एक जिम्मेदारी है, विशेषाधिकार नहीं। अधिकार सेवा करने के लिए दिया गया है डराने-धमकाने करने के लिए नहीं। हरेक व्यक्ति चाहे वह किसी भी जाति या धर्म का क्यों न हो अनुल्लंघनीय मानव प्रतिष्ठा का अधिकारी है। ईश्वर इस कठिन समय में हमारे य
