अर्मेनिया - अजरबैजान शांति समझौता ने 2026 जायद पुरस्कार जीता

मानव बंधुत्व के लिए अंतरराष्ट्रीय जायद पुरस्कार 2026, अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच शांति समझौते एवं अफगान शिक्षा वकील ज़रका यफताली को दिया गया है।

मानव बंधुत्व के लिए जायद पुरस्कार की घोषणा 19 जनवरी को हुई। आधिकारिक बयान अनुसार पुरस्कार वितरण समारोह 4 फरवरी को, अबूधाबी में संस्थापक के स्मारक पर अंतरराष्ट्रीय मानव बंधुत्व दिवस के अवसर पर सम्पन्न किया जाएगा।  

पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं में आर्मेनिया और अजरबैजान के प्रतिनिधि शामिल हैं, जिन्होंने 8 अगस्त, 2025 को अमेरिका में दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, साथ ही ज़रका यफ़ताली भी शामिल हैं, जो अफगानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा की लंबे समय से समर्थक रही हैं।

यह पहली बार है जब अंतरराष्ट्रीय समिति ने कॉकेशस और अफगानिस्तान के विजेताओं को सम्मानित किया है।

शांति एक यात्रा
बयान में बताया गया है कि दो कॉकेशस देशों के बीच हुए समझौते को मान्यता देने का फैसला, दोनों देशों द्वारा किए गए “शांति, बातचीत, सामान्यकरण और झगड़े सुलझाने की प्रक्रिया” को मानता है, और इस बात पर जोर देता है कि मेल-मिलाप “कोई एक काम नहीं है, बल्कि एक लगातार चलनेवाला सफर है।”

इस समझौते को “दूरदर्शी नेतृत्व से लिए गए एक ऐतिहासिक फ़ैसले” का नतीजा बताया गया है, जिसका मकसद कॉकेशस में दशकों से चल रहे झगड़े और मानवीय तकलीफ को खत्म करना है।

अर्मेनियाई प्रधानमंत्री निकोल पाशिनयान ने इस अवॉर्ड को “एक बड़ा सम्मान” बताया, और “इस ऐतिहासिक समझौते” के समर्थन में की गई कोशिशों को मान्यता दी।

इसी तरह अजरबैजान के राष्ट्रपति इलहाम अलियेब ने पुरस्कार की अहमियत पर जोर दिया, यह बताते हुए कि इसका नाम संयुक्त अरब अमीरात के संस्थापक स्वर्गीय शेख जायद बिन सुल्तान अल नाहयान के नाम पर रखा गया है, और इसे पोप लियो 14वें एवं अल-अजहर के ग्रैंड इमाम अहमद अल-तैयब का समर्थन है।

अफगान लड़कियों की आवाज
ज़र्का यफ़ताली को बयान में “एक हिम्मतवाली महिला बताया गया है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन महिलाओं और बच्चों की शिक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए लगा दिया है।”

अपने काम के जरिए, उन्होंने पूरे अफगानिस्तान में 100,000 से ज्यादा लोगों को संसाधन, मनो सामाजिक समर्थन और आवश्यक सेवाएँ दी हैं, जिससे बहुत मुश्किल हालात में रहनेवाली युवा महिलाओं को उम्मीद मिली है।

इस समाचार पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सुश्री यफताली ने कहा कि वे पुरस्कार मिलने की खबर से गहराई से प्रभावित हुई हैं और इसे अफगान महिलाओं के लिए एक प्रभावशाली एवं अर्थपूर्ण संदेश बताया।   

उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पहचान उम्मीद और हिम्मत देती है, खासकर, ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त करनेवाले विद्यार्थियों और शांति, सुरक्षा और नेतृत्व के पाठ्यक्रमों में नामांकित युवतियों के लिए।

बातचीत और सहअस्तित्व को बढ़ावा देना
विजेताओं की चयन एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय न्यायपीठ ने किया है, जिसमें संस्कृति और शिक्षा विभाग के प्रीफेक्ट कार्डिनल जोस टोलेंटिनो दी मेंडोंका शामिल हैं।

ज़ायद अवॉर्ड के महासचिव, जज मोहम्मद अब्देलसलाम ने कहा कि आर्मेनिया और अज़रबैजान को सम्मानित करना इस पुरस्कार के मिशन को दिखाता है: “बातचीत और सहअस्तित्व की संस्कृति को बढ़ावा देना और प्रोत्साहन देना।”

उन्होंने कहा कि यह समझौता कॉकेशस में लगभग चार दशकों के तनाव और संघर्ष को खत्म करता है, और “दोनों लोगों के लिए एक साझा और ज्यादा सुरक्षित भविष्य के लिए मजबूत नींव रखता है।”

यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसेल ने कहा कि समिति खास तौर पर ज़रका यफ़ताली को महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए उनकी प्रतिबद्धता के लिए पहचान देना चाहती है, ऐसे समय में जब बहुत बड़ी चुनौतियाँ हैं।

उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति के प्रशासन के प्रमुख सईदा मिर्ज़ियोयेवा ने कहा कि 2026 के पुरस्कार विजेताओं का चुनाव शांति और मानवीय सम्मान के लिए दुनिया भर में नैतिक प्रतिबद्धता को दिखाता है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उम्मीद का एक नया संदेश देता है।

2019 में अबू धाबी में पोप फ्राँसिस और अहमद अल-तैयब के मानव बंधुत्व पर दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से प्रेरित होकर, और शेख ज़ायद बिन सुल्तान अल नाहयान की विरासत से जुड़ा, ज़ायद अवॉर्ड उन लोगों और संगठनों को सम्मानित करता है जो मानव बंधुत्व के मूल्यों पर आधारित एक अधिक शांतिपूर्ण, सामंजस्यपूर्ण और दयालु दुनिया बनाने में योगदान देते हैं।

अपनी स्थापना के बाद से, यह अवॉर्ड 19 देशों के 19 पानेवालों को दिया जा चुका है।

hindi Survey Popup Image