सत्य तुम्हें स्वतन्त्र बना देगा

ख्रीस्तीय मूल्यों में जीवन बदलने की शक्ति है। ख्रीस्तीय मूल्य हमारे जीवन में कैसे काम करते है, और यह कैसे न केवल ख्रीस्तीयों के जीवन में, बल्कि गैर ख्रीस्तीयों के जीवन में भी अप्रत्याशित रूप से परिवर्तन ला सकते है। यह मैं आपको इस दिसम्बर में घटित एक सच्ची कहानी से बताता हूँ। 
यह घटना दिसम्बर महीने के शुरू में जर्मनी की एक मेट्रो ट्रेन में घटित हुई। इस कहानी में एक भारतीय युवक जर्मनी की एक मेट्रो ट्रेन में यात्रा कर रहा होता है। उसके चेहरे से साफ़ दिखाई पड़ता है कि वह परेशान, चिंतित, अनमना सा और थका हुआ है। तभी उस लड़के के बगल में एक गोरी लड़की आकर बैठ जाती है, जिसे वह पहचानता भी नहीं होता है। वह लड़की उस लड़के को देखती है और वह कोशिश करती है कि वह लड़का उससे कुछ बोलेगा या कोई प्रतिक्रिया देगा। मगर वह लड़का चुपचाप बैठा रहता है। वो लड़की कई बार कोशिश करती है कि वह लड़का उस पर ध्यान दे, मगर वह लड़का कोई प्रतिक्रिया नहीं देता है। इसी बीच कोई उनकी फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देता है। कुछ ही समय में यह तस्वीर पूरे जर्मनी में वायरल हो जाती है। और फिर शुरू होता है किस्मत का खेल। क्योंकि वह युवती कोई आम लड़की नहीं, बल्कि मशहूर टीवी सीरीज़ गेम ऑफ़ थ्रोन्स की अदाकारा “मेसी विलियम्स” होती है। 
जब यह तस्वीर पूरे जर्मनी में वायरल होती है, तो एक मशहूर जर्मन मैगज़ीन "डेर स्पीगल" उस भारतीय लड़के को ढूंढना शुरू करती है, कि ऐसा कौन लड़का है जिसने मेसी विलियम्स को अनदेखा किया है। आखिरकार उनकी यह तलाश म्यूनिख शहर के एक मॉल में जाकर खत्म होती है। वहां पत्रकारों को पता चलता है कि वह युवक जर्मनी में अवैध रूप से रह रहा है। न उसके पास रहने का वैध परमिट है और न ही उसकी जेब में एक भी यूरो। वह रोज ट्रेन में चोरी-छिपे सफर करता है, और डर और अनिश्चितता के बीच अपनी जिंदगी जी रहा होता है।
जब पत्रकार ने उससे पूछा कि क्या आपको पता था कि आपके बगल में बैठी गोरी लड़की मेसी विलियम्स थी, जो मशहूर सीरीज़ गेम ऑफ़ थ्रोन्स की हीरोइन है? दुनिया भर में उसके करोड़ो फ़ैन हैं जो उसके साथ सेल्फ़ी लेने का सपना देखते हैं, लेकिन आपने बिल्कुल भी रिएक्ट नहीं किया। क्यों?" उस नौजवान ने शांति से जवाब दिया: "जब आपके पास रहने का परमिट नहीं होता, आपकी जेब में एक भी यूरो नहीं होता, और आप हर दिन ट्रेन में 'गैर-कानूनी' तरीके से सफ़र करते हो, तो आपको इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि आपकी बगल में कौन बैठा है।"
उसकी ईमानदारी, सादगी और हालात से प्रभावित होकर, मैगज़ीन ने उसे 800 यूरो (लगभग 85,588 भारतीय रूपये) महीने की सैलरी पर पोस्टमैन की नौकरी ऑफर करती है। इस जॉब कॉन्ट्रैक्ट की वजह से, उसे जर्मनी में वैध रूप से रहने का परमिट भी मिल जाता है। और अब वह स्वतंत्र रूप से कहीं भी घूम सकता है। 
आपको क्या लगता है उस व्यक्ति की जिंदगी कैसे बदली? और जर्मन मैगज़ीन "डेर स्पीगल" ने उसे नौकरी क्यों ऑफर की? इसका सिर्फ एक ही जवाब हो सकता है, और वह है- "उस व्यक्ति की सच्चाई।" पवित्र बाइबिल हमें सिखाती है कि सत्य तुम्हें स्वतन्त्र बना देगा! (संत योहन 8:32) और यहाँ भी यही हुआ। वह परेशान, निराश, डरा हुआ और आशाहीन व्यक्ति, जो अब तक बिना परमिट के, बिना छत के, बिना पैसें के और हर दिन पकड़े जाने का डर से जी रहा होता है। उस व्यक्ति को सत्य ने स्वतन्त्र बना दिया। उसकी सच्चाई ने न सिर्फ उसे नौकरी दी बल्कि जर्मनी में वैध रूप से रहने का परमिट भी प्रदान किया।
यह कहानी हमें बतलाती है कि ख्रीस्तीय मूल्य हमारे जीवन में कैसे कार्य करते है। हमें बस आवश्यकता है ईश्वर के वचन पर विश्वास करने की। मैंने कई बार यह वचन पढ़ा था कि "सत्य तुम्हें स्वतन्त्र बना देगा," मगर मैं हमेशा सोचता था कि सत्य हमें कैसे स्वतंत्र कर सकता है? हम तो पहले से ही स्वतंत्र है। अब हमें स्वतंत्रता की क्या ही ज़रूरत है। लेकिन मैं गलत था। हम सभी संवैधानिक रूप से तो अवश्य ही स्वतंत्र है, मगर हम बहुत सारी छोटी- छोटी चीज़ों के गुलाम है, या कई प्रकार के मानसिक और वैचारिक और शारीरिक रूप से बंधनों में बंधे हुए है। और इन बंधनों से हमें सिर्फ ईश्वर ही छुटकारा दिला सकते है। हमारे पास ईश्वर का वचन और ख्रीस्तीय मूल्य है। जो हमें ख्रीस्त के सच्चे अनुयायी बना सकते है। हमारे पास दैनिक जीवन में कई कैसे अवसर आते है, जब हमारे पास किसी कार्य को करने के कई विकल्प मौजूद होते है। तब हमें ख्रीस्तीय मूल्यों को ध्यान में रखकर सही कार्य को चुनना चाहिए। जिससे हम ख्रीस्त के सच्चे अनुयायी बन सकते है। "यदि तुम मेरी शिक्षा पर दृढ़ रहोगे, तो सचमुच मेरे शिष्य सिद्ध होगे। (संत योहन 8:31)
बहुत से लोग सच में ईश्वर की मर्ज़ी के हिसाब से ज़िंदगी जीना चाहते हैं, लेकिन हम अक्सर सुनते हैं कि इसका क्या मतलब है, इस बारे में अलग-अलग विचार होते हैं। सांसारिक मूल्यों में दौलत, ताकत, मज़ा, बदला, शोहरत, घमंड और रुतबा शामिल हैं। ये उन लोगों के लिए सबसे ज़रूरी चीज़ें हैं जो खुद से परे कोई ताकत या मकसद नहीं देखते। सांसारिक मूल्य शैतान के इच्छा के हिसाब से लोगों के बीच जलन, नाराज़गी और झगड़ों को बढ़ावा देते हैं।
बाइबल में सिखाए गए ख्रीस्तीय मूल्य अक्सर सांसारिक मूल्यों के उलट होते हैं: ताकत के बजाय सभी लोगों के लिए दया और इज़्ज़त; रुतबे के बजाय विनम्रता; दौलत के बजाय ईमानदारी और दरियादिली; खुद की मनमानी के बजाय आत्म-नियंत्रण; बदले के बजाय माफ़ी। ख्रीस्तीय मूल्य ईश्वर के इच्छा के हिसाब से लोगों के बीच शांति और सद्भावना को बढ़ावा देते हैं। हम इस ज़िंदगी में कभी भी पूर्णता हासिल नहीं कर पाएंगे, लेकिन जो लोग ईश्वर की शिक्षा मानने की कोशिश करते हैं, उन्हें अक्सर खुशी और शांति का ऐसा एहसास होता है जिसकी बराबरी कोई भी सांसारिक इनाम नहीं कर सकता!
ख्रीस्तीय मूल्य बाइबिल के मुख्य सिद्धांत हैं, जो ईश्वर और पड़ोसी के लिए प्यार पर केंद्रित हैं, जो विश्वासियों को करुणा, विनम्रता, सत्यता, ईमानदारी, क्षमा और सेवा के साथ जीने का मार्गदर्शन करते हैं, येसु के जीवन और शिक्षाओं को दर्शाते हैं, और ईमानदारी, धैर्य, उदारता और सभी लोगों के प्रति सम्मान जैसे गुणों को बढ़ावा देते हैं। ये मूल्य रोज़मर्रा की ज़िंदगी के लिए एक नैतिक ढाँचा बनाते हैं, जो विश्वास, प्रार्थना और बाइबिल के मानकों का पालन करके अच्छे कामों और आध्यात्मिक विकास को प्रोत्साहित करते हैं। हम बाहरी रूप से ईश्वर से सदृश्य है। मगर प्रेम (अगापे), करुणा और दया, विनम्रता और सेवाभाव, ईमानदारी और सच्चाई, क्षमा और अनुग्रह, प्रभु में विश्वास और भरोसा, धैर्य और दृढ़ता, उदारता, सम्मान, न्याय आदि ख्रीस्तीय मूल्य और गुण है। जो आतंरिक रूप से भी हमें ख्रीस्त के प्रतिरूप बना सकते है।
ख्रीस्तीय मूल्य सिर्फ ख्रीस्तीयों के लिए नहीं है बल्कि सम्पूर्ण मानवजाति के लिए है। हम सालों से आगमन काल में, चालीसा काल में और पास्का काल में आध्यात्मिक तैयारी करते आ रहे है। मगर अब हमें तैयारी से आगे बढ़कर ख्रीस्तीय मूल्यों को हमारे जीवन में लागू करना होगा। हमें हमारे जीवन में ख्रीस्तीय मूल्यों को धारण कर और ख्रीस्त की शिक्षाओं को ग्रहण कर कार्य करना होगा। हमें ख्रीस्तीय मूल्यों को संसार के कोने कोने तक पहुंचना है। क्योंकि ख्रीस्तीय मूल्यों में ही परिवर्तन की शक्ति है। यहाँ मैं धर्म के प्रचार की बात नहीं कर रहा हूँ। येसु ने स्वयं कहा है कि अगर तुम मेरी आज्ञाओं का पालन करोगे और मेरी शिक्षाओं पर चलोगे तो लोग तुम्हे पहचान लेंगे की तुम किसका अनुसरण कर रहे हो। तुम्हे बताने की आवशयकता नहीं पड़ेगी कि तुम ख्रीस्त के अनुयायी हो। और यह ख्रीस्तीय मूल्य ही है जो सभों के जीवन में अप्रत्याशित रूप से परिवर्तित ला सकते है। 

यह येसु की शिक्षा और आज्ञाओं को जीवन में लागू करने का उपयुक्त समय है। जिस समय से आप येसु की शिक्षाओं और आज्ञाओं का पालन करना शुरू करते हो वही परिवर्तन का सबसे सुन्दर समय होता है। जिससे आपकी जिंदगी बदल सकती है। अगर हम अपने जीवन में ख्रीस्तीय मूल्यों को धारण करते है, तो हम लोगों के लिए एक आदर्श बन सकते है। ख्रीस्तीय मूल्य हमारे जीवन से सभी नकारात्मक चीज़ों को दूर करके हमें पवित्र बना देगा। ख्रीस्तीय मूल्यों को ग्रहण करने के लिए ईश्वर पर पूर्ण श्रद्धा रखते हुए पवित्र आत्मा से कृपा मांगे।

प्रवीण परमार