पोप लियो : हमारी दुनिया और हमारे परिवारों में शांति के लिए प्रार्थना करें
वर्ष 2026 के अपने प्रथम दिन, देवदूत प्रार्थना के पूर्व अपने संदेश में पोप लियो हमें याद दिलाते हैं कि जुबली ने हमें सिखाया है कि एक नई दुनिया के लिए उम्मीद कैसे जगाई जाए, और कहते हैं कि ईश्वर हमें “लोगों के बीच शांति और दोस्ती के युग की शुरुआत करके अपने समय को नया करने” के लिए बुला रहे हैं।
पोप लियो 14वें ने 1 जनवरी को कुँवारी मरियम ईश्वर की माता एवं विश्व शांति दिवस के अवसर पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। जिसके पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, नूतन वर्ष मुबारक हो।
जब महीनों की गति खुद को दोहरा रही है, प्रभु हमें अपने समय को नवीकृत करने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं, सभी लोगों के लिए शांति और मित्रता का दौर शुरू करते हुए। अच्छाई की इस इच्छा के बिना, कैलेंडर के पन्ने पलटना और अपनी डायरी भरना बेकार होगा।
जुबली जो समाप्त होनेवाली है, हमें एक नई दुनिया की आशा करना सिखायी है, हमारे दिलों को ईश्वर की ओर मोड़ते हुए, गलतियों को माफी में, दर्द को तसल्ली में, और अच्छे कामों के इरादे को अच्छे कामों में बदलने के लिए। वास्तव में, इसी तरह ईश्वर खुद इतिहास में रहते और इसे गुमनामी से बचाते हैं, दुनिया को मुक्तिदाता येसु प्रदान करते हैं। वे इकलौता बेटे हैं जो हमारे भाई बन जाते हैं, अच्छी सोच रखनेवालों को आलोकित करते हैं, ताकि हम भविष्य को हर उस पुरूष और महिला के लिए एक मेहमाननवाज घर के तौर पर बना सकें जो रोशनी में आता है।
इस बारे में, आज क्रिसमस का महापर्व हमारी नजर मरियम पर डालता है, जिन्होंने सबसे पहले ख्रीस्त के दिल की धड़कन महसूस की थी। उनके कुंवारी गर्भ की शांति में, जीवन का वचन खुद को कृपा की धड़कन के रूप में बताता है।
ईश्वर भले सृजनहार हमेशा से मरिया के हृदय और हमारे हृदय को जानते हैं। इंसान बनकर, वे हमें अपना दिल दिखाते हैं: इसलिए, येसु का दिल हर पुरूष और महिला के लिए धड़कता है, जो उनका स्वागत करने के लिए तैयार हैं, जैसे चरवाहे; या जो उन्हें नहीं चाहते, जैसे हेरोद। उनका दिल उन लोगों के लिए बेपरवाह नहीं है जिनके दिल में अपने पड़ोसी के लिए कोई जगह नहीं है। यह नेक लोगों के लिए धड़कता है, ताकि वे अपने समर्पण में डटे रहें, और बुरे लोगों के लिए, ताकि वे अपनी जिदगी बदल सकें और शांति पा सकें।
मुक्तिदाता एक नारी से जन्म लेकर दुनिया में आये, आइए, हम इस घटना पर चिंतन करने के लिए रुकें, जो सबसे पवित्र मरियम में चमकती है और हर अजन्मे बच्चे में दिखाई देती है, और हमारे शरीर पर छपी दिव्य छवि को दिखाती है।
इस दिन में हम एक साथ शांति के लिए प्रार्थना करें, सबसे बढ़कर, उन राष्ट्रों के लिए जो युद्ध और कष्ट से लहुलूहान हैं, किन्तु हम अपने परिवारों के लिए भी प्रार्थना करें जो हिंसा और दुःख से घायल हैं। निश्चय ही ख्रीस्त हमारी आशा, न्याय के एक ऐसे सूरज हैं जो कभी सूर्यास्त नहीं होते।
विश्वासियों से प्रार्थना करने का आह्वान करते हुए पोप ने कहा, आइये “हम पूरे विश्वास के साथ मरियम, ईश्वर की माता और कलीसिया की माता से प्रार्थना करें।”
इतना कहने के बाद पोप ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।