देवदूत प्रार्थना में पोप : धन्यताएँ आनन्द का पैमाना बन सकती हैं
रविवार को देवदूत प्रार्थना के दौरान अपने संदेश में पोप लियो 14वें ने जोर दिया कि धन्यताएँ हमारे लिए खुशी ला सकती हैं, दुनिया की छाया में उजाला ला सकती हैं और हमारे हृदय को नवीनीकृत कर सकती हैं।
वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 1 फरवरी को पोप लियो 14वें ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया, जिसके पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, “प्रिय भाइयो एवं बहनो, शुभ रविवार।”
दिन के पाठ पर चिंतन करते हुए उन्होंने कहा, “आज की धर्मविधि, सुसमाचार पाठ के एक सुन्दर अनुच्छेद की घोषणा करती है जिसको येसु पूरे मानव जाति के लिए घोषणा करते हैं: सुसमाचार की धन्यताएँ।” (मति. 5:1-12)
पोप ने कहा, “ये वास्तव में, प्रकाश हैं जिन्हें प्रभु इतिहास के अंधेरे में प्रज्वलित करते हैं, मुक्ति की योजना को प्रकट करते हुए जिसको पिता अपने पुत्र के माध्यम से, पवित्र आत्मा की शक्ति द्वारा पूरा करते हैं।”
जीवन को नवीनीकृत करतीं
पर्वत पर येसु ने अपने शिष्यों को एक नया नियम प्रदान किया, जो पत्थर पर लिखा हुआ नहीं था। यह एक ऐसा नियम है जो हमारे जीवन को नवीनीकृत करता और उसे अच्छा बना देता है, ऐसे समय में भी जब लगता है कि दुनिया ने हमें असफल कर दिया है और सब कुछ दयनीय हो गया है।
पोप ने गौर किया कि सिर्फ ईश्वर ही हैं जो सचमुच गरीब और पीड़ित को धन्य कह सकते हैं। क्योंकि वे ही सर्वोत्तम हैं जो अपने आपको अनन्त प्रेम के साथ सबके लिए दे देते हैं। सिर्फ ईश्वर ही उन लोगों को संतुष्ट कर सकते हैं जो शांति और न्याय की खोज करते हैं, (पद 6.9), क्योंकि वे दुनिया के सच्चे न्यायकर्ता और अनन्त शांति के निर्माता हैं। केवल येसु में विनम्र, दयालु एवं शुद्ध हृदय के लोग खुशी पाते हैं। (पद 5.7-8) क्योंकि वे ही उनकी उम्मीदों को पूरा करते हैं। अत्याचार में ईश्वर ही मुक्ति के स्रोत हैं, झूठ में वे ही सच्चाई के सहारे हैं। इसलिए येसु कहते हैं : “खुश हो और आनन्द मनाओ।” (12)
शांति का निर्माण करतीं
ये धन्यताएँ उन लोगों के लिए सिर्फ विरोधाभास हैं जो मानते हैं कि ईश्वर वैसे नहीं हैं जैसे ख्रीस्त ने उन्हें प्रकट किया है। जो लोग सोचते हैं कि सिर्फ अभिमानी ही पृथ्वी पर राज कर सकते हैं वे प्रभु के वचनों से विस्मित हैं। जो लोग यह सोचने के आदी हैं कि खुशी धनियों का है उन्हें लग सकता है कि येसु एक भ्रम हैं।
हालांकि भ्रम, खासकर, वहाँ होती है जहाँ ख्रीस्त में विश्वास की कमी है। वे एक गरीब व्यक्ति के समान हैं जो सभी के लिए अपना जीवन देते, एक विनम्र व्यक्ति, जो दुःख में दृढ़ बने रहते, और शांति निर्माता जिन्हें क्रूस पर मौत तक का अत्याचार सहना पड़ा।
इस तरह येसु इतिहास के अर्थ को आलोकित करते हैं। यह विजेताओं के द्वारा नहीं लिखा गया है, बल्कि ईश्वर द्वारा, जो शोषित लोगों को बचाने के द्वारा इसे पूरा कर पाये हैं। पुत्र दुनिया को पिता के प्रेम से देखते हैं। दूसरी ओर, जैसा कि पोप फ्राँसिस ने कहा है, कुछ लोग “झूठ के पंडित” भी हैं। हमें उन्हें अनुमति नहीं देनी चाहिए क्योंकि वे हमें आशा नहीं दे सकते।” (देवदूत, 17 फरवरी 2019) इसके विपरात, ईश्वर हमें आशा प्रदान करते हैं, खासकर, ऐसे लोगों को जिन्हें दुनिया बेकार मानती और दरकिनार करती है।
आनन्द के स्रोत
इसलिए पोप ने कहा, “प्यारे भाइयो एवं बहनो, धन्यताएँ हमारे लिए आनन्द के स्रोत हैं, जो हमें यह पूछने पर मजबूर करती हैं कि क्या हम इसे हासिल की जानेवाली उपलब्धि मानते हैं या दिया जानेवाला उपहार; चाहे हम इसे इस्तेमाल की जानेवाली वस्तु में रखें या उन रिश्तों में जो हमारे साथ हैं। यह वास्तव में, ख्रीस्त के कारण हैं, और उसके द्वारा ही मुश्किलों की कड़वाहट, मुक्ति प्राप्त लोगों की खुशी में बदल जाती हैं। येसु दूर की सांत्वना की बात नहीं करते, किन्तु निरंतर कृपा की बात करते हैं जो हमें हमेशा पोषित करती, विशेषकर, दुःख की घड़ी में।
दीनों को महान बनातीं
धन्यताएँ दीन लोगों को ऊपर उठाती हैं और घमंडियों को उनके मन के विचारों से दूर करते हैं (लूक 1:51)। इसलिए, संत पापा ने माता मरियम से प्रार्थना करने का आह्वन करते हुए कहा, “हम धन्य कुँवारी मरियम से प्रार्थना करें, जो प्रभु की दासी हैं, जिन्हें सभी पीढ़ियाँ धन्य कहती हैं।”
इतना कहने के बाद पोप ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद किया।